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	<title>भारतपीडिया - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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		<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%95_%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%80&amp;diff=3902</id>
		<title>अशोक सुंदरी</title>
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		<updated>2021-08-27T09:52:36Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;103.206.51.151: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{infobox deity&lt;br /&gt;
|image = Ashokasundari 2 245CMR.jpg&lt;br /&gt;
| caption = अशोकसुंदरी का एक चित्र&lt;br /&gt;
| parents = भगवान [[शिव]] और देवी [[पार्वती]]&lt;br /&gt;
| spouse = [[नहुष]]&lt;br /&gt;
| affiliation = [[देवी]]&lt;br /&gt;
| texts = [[पद्म पुराण|पद्मपुराण]]&lt;br /&gt;
| type = Hindu&lt;br /&gt;
| siblings = [[गणेश]] ( छोटे भाई ) , [[कार्तिकेय]] ( बड़े भाई ),[[अय्यपा]] ( छोटे भाई ) ,[[मनसा देवी]]( छोटी बहन ) और देवी [[ ज्योति]] ( छोटी बहन )  &lt;br /&gt;
| |deity_of=कल्पना, सपने और सुंदरता की देवी}}&lt;br /&gt;
&#039;&#039;&#039;अशोक सुंदरी&#039;&#039;&#039; (संस्कृत: [https://sa.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%80 अशोकसुन्दरी], Aśokasundarī) यह एक हिन्दू देवकन्या हैं, जिनका वर्णन भगवान [[शिव]] और [[पार्वती]] की बेटी के रूप में किया गया है। वह आम तौर पर मुख्य शास्त्रों में शिव के पुत्री के रूप में वर्णित नहीं हैं, उनकी कथा [[पद्म पुराण|पद्मपुराण]] में अंकित है। राजा नहुष की पत्नी हैं। जिनके २ पुत्र और १०० पुत्रियां हैं । &lt;br /&gt;
माता पार्वती के अकेलेपन को दूर करने हेतु [[कल्पवृक्ष]] नामक पेड़ के द्वारा ही अशोक सुंदरी की रचना हुई थी।&lt;br /&gt;
अ+शोक अर्थात् सुख, माता पार्वती को सुखी करने हेतु ही उनका निर्माण हुआ था और वह अत्यंत सुंदर थीं इसी कारण इन्हें सुंदरी कहा गया। यें भगवान शिव और माता पार्वती बेटी हैं यें भगवान कार्तिकेय से छोटी किन्तु गणेशजी  ,मनसा देवी, देवी ज्योति और भगवान अय्यपा से बड़ी हैं ।  महर्षि [[जरत्कारु|जरत्कारू]]  इनके बहनोई  हैं।  महर्षि आस्तिक की मौसी हैं । देवसैना , वल्ली और ऋद्धि , सिद्धि   की ननंद तथा  [[संतोषी माता]]  , [[क्षेम]]  और  [[लाभ]] की बुआ हैं     &amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=http://vedpuran.net/download-all-ved-and-puran-pdf-hindi-free/ |title=पद्मपुराण यहाँ से डाउनलोड करें। |access-date=19 मई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140517032204/http://vedpuran.net/download-all-ved-and-puran-pdf-hindi-free/ |archive-date=17 मई 2014 |url-status=dead }}&amp;lt;/ref&amp;gt;  इनके  परिवार में निम्नलिखित सदस्य है:  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== दिव्य चरित्र ==&lt;br /&gt;
अशोक सुंदरी के जन्म की कथा पद्म पुराण में बताई गई है जो [[नहुष]] नामक राजा के चरित्र वर्णन की इकाई है।&lt;br /&gt;
एक बार माता पार्वती द्वारा विश्व में सबसे सुंदर उद्यान लाने के आग्रह से भगवान शिव पार्वती को [[तपोवन|नंदनवन]] ले गये, वहाँ माता को कल्पवृक्ष से लगाव हो गया और उन्होने उस वृक्ष को ले लिया। कल्पवृक्ष मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष है, पार्वती नें अपने अकेलेपन को दूर करने हेतु उस वृक्ष से यह वर माँगा कि उन्हे एक कन्या प्राप्त हो, तब कल्पवृक्ष द्वारा अशोक सुंदरी का जन्म हुआ। माता पार्वती नें उस कन्या को वरदान दिया कि उसका विवाह देवराज इंद्र जितने शक्तिशाली यूवक से होगा।&lt;br /&gt;
एक बार अशोक सुंदरी अपने दासियों के संग नंदनवन में विचरण कर रहीं थीं तभी वहाँ हुंड नामक राक्षस का प्रवेश हुआ जो अशोक सुंदरी के सुंदरता से मोहित हो गया तथा विवाह का प्रस्ताव किया, तब उस कन्या ने भविष्य में उसके पूर्वनियत विवाह के संदर्भ में बताया।&lt;br /&gt;
राक्षस नें कहा कि वह नहूष को मार डालेगा तब अशोक सुंदरी ने राक्षस को श्राप दिया कि उसकी मृत्यु नहूष के हाथों होगी।&lt;br /&gt;
उस राक्षस नें नहुष का अपहरण कर लिया जिससे नहूष को हुंड की एक दासी ने बचाया। महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में नहूष बड़ा हुआ तथा आगे जाकर उसने हुंड का वध किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बाद में नहूष तथा अशोक सुंदरी का विवाह हुआ तथा वह [[ययाति]] जैसे वीर पुत्र तथा सौ रूपवती कन्याओं की माता बनीं।&lt;br /&gt;
इंद्र के अभाव में नहूष को ही आस्थायी रूप से इंद्र बनाया गया, उसके घमंड के कारण उसे श्राप मिला तथा इसीसे उसका पतन हुआ।&lt;br /&gt;
बादमें इंद्र नें अपनी गद्दी पुन: ग्रहण की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
* [[शिव]]&lt;br /&gt;
* [[पार्वती]]&lt;br /&gt;
* [[कार्तिकेय]]&lt;br /&gt;
* [[गणेश]]&lt;br /&gt;
* [[पद्म पुराण|पद्मपुराण]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
{{Reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20140519184508/http://www.vedpuran.com/brahma.asp?bookid=6&amp;amp;secid=1&amp;amp;pageno=0001&amp;amp;Ved=Y&amp;amp;PuranName=Padma वेदपुराण डॉट कॉम], संपूर्ण पद्मपुराण को अॉनलाइन सुनें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{शैव धर्म}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी: हिन्दू देवियाँ]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>103.206.51.151</name></author>
	</entry>
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		<title>राधा</title>
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		<updated>2021-08-27T09:37:19Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;103.206.51.151: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{redirect|राधिका}}&lt;br /&gt;
&#039;&#039;&#039;राधा&#039;&#039;&#039; अथवा &#039;&#039;&#039;अहीर गोपिका राधा&#039;&#039;&#039;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite book|first=Chattar |last=Singh |title=Social and Economic Change in Haryana |url=https://books.google.com/books?id=reTZAAAAMAAJ&amp;amp;dq |year=2004 |publisher=National Book Organisation, 2004 |isbn=9788187521105 |page=222}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref name=mmwradha&amp;gt;Monier Monier-Williams, [http://www.ibiblio.org/sripedia/ebooks/mw/0900/mw__0909.html Rādhā], Sanskrit-English Dictionary with Etymology, Oxford University Press, page 876&amp;lt;/ref&amp;gt; को अक्सर &#039;&#039;&#039;राधिका&#039;&#039;&#039; भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में विशेषकर [[वैष्णव सम्प्रदाय]] में प्रमुख देवी हैं। वह [[कृष्ण]] की प्रेमिका और संगी के रूप में चित्रित की जाती हैं। इस प्रकार उन्हें [[राधा कृष्ण]] के रूप में पूजा जाता हैं। उनके ऊपर कई काव्य रचना की गई है और [[रासलीला|रास लीला]] उन्हीं की शक्ति और रूप का वर्णन करती है । वैष्णव सम्प्रदाय में राधाको भगवान कृष्ण की शक्ति स्वरूपा भी माना जाता है , जो स्त्री रूप मे प्रभु के लीलाओं मे प्रकट होती हैं |&amp;quot;गोपाल सहस्रनाम&amp;quot; के 19वें श्लोक मे वर्णित है कि महादेव जी द्वारा जगत देवी पार्वती जी को बताया गया है कि एक ही शक्ति के दो रूप है राधा और माधव(श्रीकृष्ण) तथा ये रहस्य स्वयं श्री कृष्ण द्वारा राधा रानी को बताया गया है। अर्थात राधा ही कृष्ण हैं और कृष्ण ही राधा हैं। भारत के धार्मिक सम्प्रदाय निम्बार्क और चैतन्य महाप्रभु इनसे भी राधा को सम्मीलित  किया गया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अधिकतर लोग जो कृष्ण की राधा के बारे मे बाते करते है,राधा कृष्ण के प्रेम की चर्चा किया करते है राधा कृष्ण को मन धन से प्रेमी रूप मे पूजन करती थी और श्री कृष्ण भी अपनी बासुरी को और राधा को अधिकाधिक प्रेम करते थे जिनके प्रेम जोडी आज के नवयुगलों को उत्साहित करते है और राधा और कृष्ण के प्रेम गाथा से प्रेम मे समर्पित होने की प्रेरणा प्रदान करते है। &lt;br /&gt;
{{Hdeity infobox| &lt;br /&gt;
 image          = Radha krishna.jpg ‎ &lt;br /&gt;
| caption         = राधा-कृष्ण&lt;br /&gt;
| name           = राधा&lt;br /&gt;
| sanskrit_transliteration = राधा&lt;br /&gt;
| devanagari        = राधा&lt;br /&gt;
| affiliation       = देवी महा[[लक्ष्मी]] की अवतार &lt;br /&gt;
| mantra          = ॐ वृषभानुज्यै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात॥&lt;br /&gt;
| abode          = [[वृन्दावन|वृंदावन]] &lt;br /&gt;
| mount          = &lt;br /&gt;
|other_names=कृष्णप्रिया , वृषभानुलली , राधिका ,  किशोरी , माधवी आदि|father=वृषभानु|mother=कीर्ति देवी|spouse=[[कृष्ण]]}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मान्यता ==&lt;br /&gt;
{{विस्तार}}[[चित्र: Radha Madhavam.jpg|thumb|झूला झूलते राधा कृष्ण| &#039;&#039;&#039;[[राजा रवि वर्मा]] द्वारा बनाई गयी एक पेंटिंग में चित्रित [[कृष्ण]] एवं राधा&#039;&#039;&#039;]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा जिले के गोकुल-महावन कस्बे के निकट रावल गांव में मुखिया वृषभानु गोप एवं कीर्ति की पुत्री के रूप में राधा रानी का प्राकट्य जन्म हुआ। राधा रानी के जन्म के बारे में यह कहा जाता है कि राधा जी माता के पेट से पैदा नहीं हुई थी उनकी माता ने अपने गर्भ को धारण कर रखा था उन्होंने योग माया कि प्रेरणा से वायु को ही जन्म दिया। परन्तु वहां स्वेच्छा से श्री राधा प्रकट हो गई। श्री राधा रानी जी निकुंज प्रदेश के एक सुन्दर मंदिर में अवतीर्ण हुई उस समय भाद्र पद का महीना था, शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, अनुराधा नक्षत्र, मध्यान्ह काल 12 बजे और सोमवार का दिन था।  इनके जन्म के साथ ही इस दिन को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राधा रानी जी श्रीकृष्ण जी से ग्यारह माह बड़ी थीं। लेकिन श्री वृषभानु जी और कीर्ति देवी को ये बात जल्द ही पता चल गई कि श्री किशोरी जी ने अपने प्राकट्य से ही अपनी आंखे नहीं खोली है। इस बात से उनके माता-पिता बहुत दुःखी रहते थे।&lt;br /&gt;
कुछ समय पश्चात जब नन्द महाराज कि पत्नी यशोदा जी गोकुल से अपने लाडले के साथ वृषभानु जी के घर आती है तब वृषभानु जी और कीर्ति जी उनका स्वागत करती है यशोदा जी कान्हा को गोद में लिए राधा जी के पास आती है। जैसे ही श्री कृष्ण और राधा आमने-सामने आते है। तब राधा जी पहली बार अपनी आंखे खोलती है। अपने प्राण प्रिय श्री कृष्ण को देखने के लिए, वे एक टक कृष्ण जी को देखती है, अपनी प्राण प्रिय को अपने सामने एक सुन्दर-सी बालिका के रूप में देखकर कृष्ण जी स्वयं बहुत आनंदित होते है। जिनके दर्शन बड़े बड़े देवताओं के लिए भी दुर्लभ है तत्वज्ञ मनुष्य सैकड़ो जन्मों तक तप करने पर भी जिनकी झांकी नहीं पाते, वे ही श्री राधिका जी जब वृषभानु के यहां साकार रूप से प्रकट हुई। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शास्त्रों के अनुसार ब्रह्माजी ने  वृन्दावन में श्री कृष्ण के साथ साक्षात राधा का विधिपूर्वक विवाह संपन्न कराया था।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|title=यहां हुआ था राधा-कृष्ण का विवाह, जानें कब-किसने करवाया|url=https://www.bhaskar.com/news/jm-tid-photos-and-story-of-marriage-place-of-radha-krishna-news-hindi-5569284-pho.html|website=[[भास्कर]]}}&amp;lt;/ref&amp;gt; बृज में आज भी माना जाता है कि राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं और कृष्ण बिना श्री राधा। धार्मिक पुराणों के अनुसार राधा और कृष्ण की ही पूजा का विधान है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सन्दर्भ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
श्रीमद्भागवत महापुराण एवम श्री ब्रह्मवैवर्त पुराण।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{commonscat|Radha|राधा}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{हिन्दू देवी देवता}}&lt;br /&gt;
{{हिन्दू धर्म}}&lt;br /&gt;
{{Authority control}}&lt;br /&gt;
{{आधार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:राधा]]&lt;br /&gt;
[[स्रोत : श्रीमद्भागवत महापुराण, श्री ब्रह्मवैवर्त पुराण,महर्षि गर्ग मुनि रचित ग्रंथ]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>103.206.51.151</name></author>
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		<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%AE%E0%A5%80&amp;diff=7139</id>
		<title>जन्माष्टमी</title>
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		<updated>2021-08-27T09:30:56Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;103.206.51.151: /* भगवान कृष्ण की महानता */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt; &lt;br /&gt;
{{ज्ञानसन्दूक त्योहार &lt;br /&gt;
| त्योहार_के_नाम = जन्माष्टमी&lt;br /&gt;
[[File:RadhaKrishnaUdaipur.JPG|thumb|भगवान कृष्ण]] &lt;br /&gt;
|शीर्षक = माखन चुराते बाल कृष्ण&lt;br /&gt;
|आधिकारिक_नाम = श्रीकृष्ण जन्माष्टमी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|अनुयायी = [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]],[[नेपाली (बहुविकल्पी)|नेपाली]], [[भारतीय]], नेपाली और भारतीय प्रवासी&lt;br /&gt;
|उद्देश्य = भगवान कृष्ण के आदर्शों को याद करना&lt;br /&gt;
|आरम्भ = अति प्राचीन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|अनुष्ठान = श्रीकृष्ण की झाँकी सजाना व्रत व पूजन&lt;br /&gt;
|उत्सव = प्रसाद बाँटना, भजन गाना इत्यादि&lt;br /&gt;
|समान पर्व= &lt;br /&gt;
|type =&amp;lt;!--DO NOT CHANGE! THIS CONTROLS COLOUR--&amp;gt;hindu&amp;lt;!--DO NOT CHANGE! THIS CONTROLS COLOUR--&amp;gt;&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&#039;&#039;&#039;कृष्ण जन्माष्टमी&#039;&#039;&#039;, जिसे केवल &#039;&#039;&#039;जन्माष्टमी&#039;&#039;&#039; या &#039;&#039;&#039;गोकुलाष्टमी&#039;&#039;&#039; के रूप में भी जाना जाता है, एक वार्षिक हिंदू त्योहार है जो [[विष्णु|विष्णुजी]] के दशावतारों में से आठवें और चौबीस अवतारों में से बाईसवें अवतार श्रीकृष्ण के जन्म का जश्न मनाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|url=https://www.britannica.com/topic/Janmashtami|title=Janmashtami {{!}} Celebration, Date, India, &amp;amp; Facts|website=Encyclopedia Britannica|language=en|access-date=2021-08-25}}&amp;lt;/ref&amp;gt; यह हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, कृष्ण पक्ष (अंधेरे पखवाड़े) के आठवें दिन (अष्टमी) को [[श्रावण]] या [[भाद्रपद]] में मनाया जाता है (इस पर निर्भर करता है कि कैलेंडर अमावस्या या पूर्णिमा के दिन को महीने के अंतिम दिन के रूप में चुनता है या नहीं&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite book|url=http://archive.org/details/illustratedencyc0000loch|title=The illustrated encyclopedia of Hinduism|last=Lochtefeld|first=James G.|date=2002|publisher=New York : Rosen|others=Internet Archive|isbn=978-0-8239-2287-1}}&amp;lt;/ref&amp;gt;। जो [[ग्रेगोरियन कैलेंडर]] के अगस्त या सितंबर के साथ ओवरलैप होता है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|url=https://www.livehindustan.com/astrology/story-shree-krishna-janmashtami-2021-the-festival-of-janmashtami-will-be-celebrated-in-these-coincidences-know-puja-muhurat-4428300.html|title=Shree Krishna Janmashtami 2021: इन अद्भुत संयोग में मनाया जाएगा जन्माष्टमी का त्योहार, जानिए पूजन का अभिजीत मुहूर्त|website=Hindustan|language=hindi|access-date=2021-08-25}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==विशेषता==&lt;br /&gt;
यह एक महत्वपूर्ण त्योहार है, खासकर हिंदू धर्म की [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] परंपरा में। भागवत पुराण (जैसे रास लीला या कृष्ण लीला) के अनुसार कृष्ण के जीवन के नृत्य-नाटक की परम्परा, कृष्ण के जन्म के समय मध्यरात्रि में भक्ति गायन, [[उपवास]] (उपवास), रात्रि जागरण (रात्रि जागरण), और एक त्योहार  (महोत्सव) अगले दिन जन्माष्टमी समारोह का एक हिस्सा हैं। &amp;lt;ref name=&amp;quot;:0&amp;quot;&amp;gt;{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=0z02cZe8PU8C&amp;amp;redir_esc=y|title=Krishna: A Sourcebook|last=Bryant|first=Edwin Francis|date=2007|publisher=Oxford University Press|isbn=978-0-19-803400-1|language=en}}&amp;lt;/ref&amp;gt;यह मणिपुर, असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश तथा भारत के अन्य सभी राज्यों में पाए जाने वाले प्रमुख वैष्णव और गैर-सांप्रदायिक समुदायों के साथ विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन में मनाया जाता है&amp;lt;ref name=&amp;quot;:0&amp;quot; /&amp;gt;।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृष्ण जन्माष्टमी के बाद त्योहार नंदोत्सव होता है, जो उस अवसर को मनाता है जब [[नन्द बाबा|नंद बाबा]] ने जन्म के सम्मान में समुदाय को उपहार वितरित किए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृष्ण [[देवकी]] और [[वसुदेव|वासुदेव अनाकदुंदुभी]] के पुत्र हैं और उनके जन्मदिन को हिंदुओं द्वारा जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है, विशेष रूप से गौड़ीय वैष्णववाद परंपरा के रूप में उन्हें भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व माना जाता है।  जन्माष्टमी हिंदू परंपरा के अनुसार तब मनाई जाती है जब माना जाता है कि कृष्ण का जन्म मथुरा में भाद्रपद महीने के आठवें दिन (ग्रेगोरियन कैलेंडर में अगस्त और 3 सितंबर के साथ ओवरलैप) की आधी रात को हुआ था।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|url=https://www.financialexpress.com/lifestyle/janamashtmi-2021-datetime-puja-muhurat-when-is-janmashtami-this-year-janmashtami-legends-janmashtami-muhurat-2021-janmashtami-2021-latest-vrindavan-banke-bihari-lord-krishna/2316546/|title=Krishna Janamashtami 2021: What is it and why do Indians celebrate it?|date=2021-08-24|website=The Financial Express|language=en-US|access-date=2021-08-25}}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृष्ण का जन्म अराजकता के क्षेत्र में हुआ था।  यह एक ऐसा समय था जब उत्पीड़न बड़े पैमाने पर था, स्वतंत्रता से वंचित किया गया था, बुराई हर जगह थी, और जब उनके मामा राजा कंस द्वारा उनके जीवन के लिए खतरा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भगवान कृष्ण की महानता==&lt;br /&gt;
कृष्ण जी भगवान विष्णु जी के अवतार हैं, जो तीन लोक के तीन गुणों सतगुण, रजगुण तथा तमोगुण में से सतगुण विभाग के प्रभारी हैं।&amp;lt;ref name=&amp;quot;:5&amp;quot; /&amp;gt; भगवान का अवतार होने की वजह से कृष्ण जी में जन्म से ही सिद्धियां मौजूद थीं। उनके माता पिता वसुदेव और देवकी जी के विवाह के समय मामा कंस जब अपनी बहन देवकी को ससुराल पहुँचाने जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई थी जिसमें बताया गया था कि देवकी का आठवां पुत्र कंस को मारेगा। अर्थात् यह होना पहले से ही निश्चित था अतः वसुदेव और देवकी को जेल में रखने के बावजूद कंस कृष्ण जी को नहीं मार पाया।&amp;lt;ref name=&amp;quot;:5&amp;quot;&amp;gt;{{Cite web|url=https://news.jagatgururampalji.org/krishna-janmashtami-in-hindi/|title=Krishna Janmashtami in Hindi: जन्माष्टमी पर जानें कृष्ण जी से जुड़े अद्भुत रहस्य|date=2021-08-24|website=SA News Channel|language=en-US|access-date=2021-08-25}}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मथुरा की जेल में जन्म के तुरंत बाद, उनके पिता वसुदेव अनाकादुन्दुबी बजाकर कृष्ण को यमुना पार ले जाते हैं, ताकि माता-पिता का गोकुल में नंद और यशोदा नाम दिया जा सके।  यह कथा जन्माष्टमी पर लोगों द्वारा उपवास रखने, कृष्ण प्रेम के भक्ति गीत गाकर और रात में जागरण करके मनाई जाती है।  कृष्ण के मध्यरात्रि के जन्म के बाद, शिशु कृष्ण की मूर्तियों को धोया और पहनाया जाता है, फिर एक पालने में रखा जाता है।  इसके बाद भक्त भोजन और मिठाई बांटकर अपना उपवास तोड़ते हैं।  महिलाएं अपने घर के दरवाजे और रसोई के बाहर छोटे-छोटे पैरों के निशान बनाती हैं जो अपने घर की ओर चलते हुए, अपने घरों में कृष्ण के आने का प्रतीक माना जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== समारोह ==&lt;br /&gt;
[[File:Janmashtami 01.jpg|thumb|जन्माष्टमी उत्सव]]&lt;br /&gt;
कुछ समुदाय कृष्ण की किंवदंतियों को मक्कन चोर (मक्खन चोर) के रूप में मनाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिंदू जन्माष्टमी को उपवास, गायन, एक साथ प्रार्थना करने, विशेष भोजन तैयार करने और साझा करने, रात्रि जागरण और कृष्ण या विष्णु मंदिरों में जाकर मनाते हैं।  प्रमुख कृष्ण मंदिर &#039;भागवत पुराण&#039; और &#039;भगवद गीता&#039; के पाठ का आयोजन करते हैं। कई समुदाय नृत्य-नाटक कार्यक्रम आयोजित करते हैं जिन्हें रास लीला या कृष्ण लीला कहा जाता है।  रास लीला की परंपरा विशेष रूप से मथुरा क्षेत्र में, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों जैसे मणिपुर और असम में और राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में लोकप्रिय है।  यह शौकिया कलाकारों की कई टीमों द्वारा अभिनय किया जाता है, उनके स्थानीय समुदायों द्वारा उत्साहित किया जाता है, और ये नाटक-नृत्य नाटक प्रत्येक जन्माष्टमी से कुछ दिन पहले शुरू होते हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=0z02cZe8PU8C&amp;amp;redir_esc=y|title=Krishna: A Sourcebook|last=Bryant|first=Edwin Francis|date=2007|publisher=Oxford University Press|isbn=978-0-19-803400-1|language=en}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== महाराष्ट्र ==&lt;br /&gt;
[[File:Dahi Handi.JPG|thumb|दही हंडी]]&lt;br /&gt;
जन्माष्टमी (महाराष्ट्र में &amp;quot;गोकुलाष्टमी&amp;quot; के रूप में लोकप्रिय) मुंबई, लातूर, नागपुर और पुणे जैसे शहरों में मनाई जाती है।  दही हांडी कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन हर अगस्त/सितंबर में मनाई जाती है। यहां लोग दही हांडी को तोड़ते हैं जो इस त्योहार का एक हिस्सा है।  दही हांडी शब्द का शाब्दिक अर्थ है &amp;quot;दही का मिट्टी का बर्तन&amp;quot;।  त्योहार को यह लोकप्रिय क्षेत्रीय नाम शिशु कृष्ण की कथा से मिलता है।  इसके अनुसार, वह दही और मक्खन जैसे दुग्ध उत्पादों की तलाश और चोरी करते थे और लोग अपनी आपूर्ति को बच्चे की पहुंच से बाहर छिपा देते थे।  कृष्ण अपनी खोज में हर तरह के रचनात्मक विचारों को आजमाते थे, जैसे कि अपने दोस्तों के साथ इन ऊँचे लटकते बर्तनों को तोड़ने के लिए मानव पिरामिड बनाना। यह कहानी भारत भर में हिंदू मंदिरों के साथ-साथ साहित्य और नृत्य-नाटक प्रदर्शनों की कई राहतों का विषय है, जो बच्चों की आनंदमय मासूमियत का प्रतीक है, कि प्रेम और जीवन का खेल ईश्वर की अभिव्यक्ति है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|url=https://www.india.com/hindi-news/faith-hindi/dahi-handi-2020-know-the-importance-and-subh-muhurat-of-dahi-handi-on-krishna-janmashtami-4108989/|title=Dahi Handi 2020: कृष्ण जन्माष्टमी पर जानें क्या है दही हांडी का महत्व, ये है शुभ मुहूर्त|last=Desk|first=India com Hindi News|website=India News, Breaking News {{!}} India.com|language=hi|access-date=2021-08-25}}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र और भारत के अन्य पश्चिमी राज्यों में, इस कृष्ण कथा को जन्माष्टमी पर एक सामुदायिक परंपरा के रूप में निभाया जाता है, जहां दही के बर्तनों को  ऊंचे डंडे से या किसी इमारत के दूसरे या तीसरे स्तर से लटकी हुई रस्सियों से ऊपर लटका दिया जाता है। वार्षिक परंपरा के अनुसार, &amp;quot;गोविंदा&amp;quot; कहे जाने वाले युवाओं और लड़कों की टीमें इन लटकते हुए बर्तनों के चारों ओर नृत्य और गायन करते हुए जाती हैं, एक दूसरे के ऊपर चढ़ती हैं और एक मानव पिरामिड बनाती हैं, फिर बर्तन को तोड़ती हैं।  गिराई गई सामग्री को प्रसाद (उत्सव प्रसाद) के रूप में माना जाता है।  यह एक सार्वजनिक तमाशा है, एक सामुदायिक कार्यक्रम के रूप में उत्साहित और स्वागत किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समकालीन समय में, कई भारतीय शहर इस वार्षिक हिंदू अनुष्ठान को मनाते हैं।  युवा समूह गोविंदा पाठक बनाते हैं, जो विशेष रूप से जन्माष्टमी पर पुरस्कार राशि के लिए एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं।  इन समूहों को मंडल या हांडी कहा जाता है और वे स्थानीय क्षेत्रों में घूमते हैं, हर अगस्त में अधिक से अधिक बर्तन तोड़ने का प्रयास करते हैं।  सामाजिक हस्तियां और मीडिया उत्सव में भाग लेते हैं, जबकि निगम कार्यक्रम के कुछ हिस्सों को प्रायोजित करते हैं। गोविंदा टीमों के लिए नकद और उपहार की पेशकश की जाती है, और टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, 2014 में अकेले मुंबई में 4,000 से अधिक हांडी पुरस्कारों से लबरेज थे, और गोविंदा की कई टीमों ने भाग लिया था।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/mumbai/nine-tier-handi-breaks-into-guinness-records/articleshow/15441796.cms|title=Nine-tier handi breaks into Guinness Records {{!}} Mumbai News - Times of India|last=Mishra|first=Ambarish|last2=Yeshwantrao|first2=Nitin|website=The Times of India|language=en|access-date=2021-08-21|last3=Aug 11|first3=Bella Jaisinghani / TNN / Updated:|last4=2012|last5=Ist|first5=02:49}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गुजरात और राजस्थान ==&lt;br /&gt;
गुजरात के द्वारका में लोग - जहां माना जाता है कि कृष्ण ने अपना राज्य स्थापित किया था - दही हांडी के समान एक परंपरा के साथ त्योहार मनाते हैं, जिसे माखन हांडी (ताजा मथने वाले मक्खन के साथ बर्तन) कहा जाता है।  अन्य लोग मंदिरों में लोक नृत्य करते हैं, भजन गाते हैं, कृष्ण मंदिरों जैसे द्वारकाधीश मंदिर या नाथद्वारा जाते हैं।  कच्छ जिले के क्षेत्र में, किसान अपनी बैलगाड़ियों को सजाते हैं और सामूहिक गायन और नृत्य के साथ कृष्ण जुलूस निकालते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वैष्णववाद के पुष्टिमार्ग के विद्वान दयाराम की कार्निवल-शैली और चंचल कविता और रचनाएँ, गुजरात और राजस्थान में जन्माष्टमी के दौरान विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=u7XyeTFxY3wC&amp;amp;redir_esc=y|title=The Poetics of Devotion: The Gujarati Lyrics of Dayaram|last=Dwyer|first=Rachel|date=2001|publisher=Psychology Press|isbn=978-0-7007-1233-5|language=en}}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== उत्तरी भारत ==&lt;br /&gt;
[[File:Janamastmi Birthday of Shri Krishna.jpg|thumb|जनमाष्टमी उत्सव के अवसर पर रूप धारण किया हुा बालक]]&lt;br /&gt;
जन्माष्टमी उत्तर भारत के ब्रज क्षेत्र में सबसे बड़ा त्योहार है, मथुरा जैसे शहरों में जहां हिंदू परंपरा कहती है कि कृष्ण का जन्म हुआ था, और वृंदावन में जहां वे बड़े हुए थे।  उत्तर प्रदेश के इन शहरों में वैष्णव समुदाय, साथ ही अन्य राज्य राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमालयी उत्तर के स्थानों में जन्माष्टमी मनाते हैं।  कृष्ण मंदिरों को सजाया जाता है और रोशनी की जाती है, वे दिन में कई आगंतुकों को आकर्षित करते हैं, जबकि कृष्ण भक्त भक्ति कार्यक्रम आयोजित करते हैं और रात्रि जागरण करते हैं।&amp;lt;ref name=&amp;quot;:2&amp;quot;&amp;gt;http://aajtak.intoday.in/story/how-to-do-krishna-janmashtami-pooja-1-884151.html {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170327171121/http://aajtak.intoday.in/story/how-to-do-krishna-janmashtami-pooja-1-884151.html |date=27 मार्च 2017 }} जन्माष्टमी पूजा विधि&amp;lt;/ref&amp;gt;भक्तजन मिठाई बांटते हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=t3WzDipk9xwC&amp;amp;pg=PA118&amp;amp;redir_esc=y#v=onepage&amp;amp;q&amp;amp;f=false|title=Hinduism|last=Kishore|first=B. R.|date=2001|publisher=Diamond Pocket Books (P) Ltd.|isbn=978-81-7182-073-3|language=en}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
त्योहार आम तौर पर वर्षा ऋतु में पड़ता है। फसलों से लदे खेतों और ग्रामीण समुदायों के पास खेलने का समय है।  उत्तरी राज्यों में, जन्माष्टमी को रासलीला परंपरा के साथ मनाया जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है &amp;quot;खुशी का खेल (लीला), सार (रस)&amp;quot;।  इसे जन्माष्टमी पर एकल या समूह नृत्य और नाटक कार्यक्रमों के रूप में व्यक्त किया जाता है, जिसमें कृष्ण से संबंधित रचनाएं गाई जाती हैं। कृष्ण के बचपन की शरारतें और राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंग विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।  क्रिश्चियन रॉय और अन्य विद्वानों के अनुसार, ये राधा-कृष्ण प्रेम कहानियां दैवीय सिद्धांत और वास्तविकता के लिए मानव आत्मा की लालसा और प्रेम के लिए हिंदू प्रतीक हैं।&amp;lt;ref name=&amp;quot;:2&amp;quot; /&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जम्मू में, छतों से पतंग उड़ाना कृष्ण जन्माष्टमी पर उत्सव का एक हिस्सा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत ==&lt;br /&gt;
जन्माष्टमी व्यापक रूप से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के हिंदू वैष्णव समुदायों द्वारा मनाई जाती है।  इन क्षेत्रों में कृष्ण जन्माष्टमी को मनाने की व्यापक परंपरा का श्रेय १५वीं और १६वीं शताब्दी के शंकरदेव और चैतन्य महाप्रभु के प्रयासों और शिक्षाओं को जाता है।  उन्होंने दार्शनिक विचारों के साथ-साथ हिंदू भगवान कृष्ण को मनाने के लिए प्रदर्शन कला के नए रूप विकसित किए जैसे कि बोर्गेट, अंकिया नाट, सत्त्रिया और भक्ति योग अब पश्चिम बंगाल और असम में लोकप्रिय हैं।  आगे पूर्व में, मणिपुर के लोगों ने मणिपुरी नृत्य रूप विकसित किया, एक शास्त्रीय नृत्य रूप जो अपने हिंदू वैष्णववाद विषयों के लिए जाना जाता है, और जिसमें सत्त्रिया की तरह रासलीला नामक राधा-कृष्ण की प्रेम-प्रेरित नृत्य नाटक कला शामिल है।  ये नृत्य नाट्य कलाएं इन क्षेत्रों में जन्माष्टमी परंपरा का एक हिस्सा हैं, और सभी शास्त्रीय भारतीय नृत्यों के साथ, प्राचीन हिंदू संस्कृत पाठ नाट्य शास्त्र में प्रासंगिक जड़ें हैं, लेकिन भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच संस्कृति संलयन से प्रभावित हैं।&amp;lt;ref name=&amp;quot;:3&amp;quot;&amp;gt;{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=xRbkAAAAMAAJ&amp;amp;redir_esc=y|title=Dances of Manipur: The Classical Tradition|last=Doshi|first=Saryu|date=1989|publisher=Marg Publications|isbn=978-81-85026-09-1|language=en}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्माष्टमी पर, माता-पिता अपने बच्चों को कृष्ण की किंवदंतियों, जैसे कि गोपियों और कृष्ण के पात्रों के रूप में तैयार करते हैं।  मंदिरों और सामुदायिक केंद्रों को क्षेत्रीय फूलों और पत्तियों से सजाया जाता है, जबकि समूह भागवत पुराण और भगवत गीता के दसवें अध्याय का पाठ करते या सुनते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जन्माष्टमी मणिपुर में उपवास, सतर्कता, शास्त्रों के पाठ और कृष्ण प्रार्थना के साथ मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है। मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी के दौरान रासलीला करने वाले नर्तक एक उल्लेखनीय वार्षिक परंपरा है। मीतेई वैष्णव समुदाय में बच्चे लिकोल सन्नाबागेम खेलते हैं।&amp;lt;ref name=&amp;quot;:3&amp;quot; /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== ओडिशा और पश्चिम बंगाल ==&lt;br /&gt;
पूर्वी राज्य ओडिशा में, विशेष रूप से पुरी के आसपास के क्षेत्र और पश्चिम बंगाल के नबद्वीप में, त्योहार को श्री कृष्ण जयंती या बस श्री जयंती के रूप में भी जाना जाता है। लोग आधी रात तक उपवास और पूजा कर जन्माष्टमी मनाते हैं।  भागवत पुराण कृष्ण के जीवन को समर्पित एक खंड, १०वें अध्याय से पढ़ा जाता है।  अगले दिन को &amp;quot;नंदा उत्सव&amp;quot; या कृष्ण के पालक माता-पिता नंदा और यशोदा का खुशी का उत्सव कहा जाता है।  जन्माष्टमी के पूरे दिन भक्त उपवास रखते हैं।  वे अपने अभिषेक समारोह के दौरान गंगा स्नान राधा माधव से पानी लाते हैं।  आधी रात को छोटे राधा माधव देवताओं के लिए एक भव्य अभिषेक किया जाता है, जबकि 400 से अधिक वस्तुओं का भोजन (भोग) भक्ति के साथ उनके प्रभु को अर्पित किया जाता है।&amp;lt;ref name=&amp;quot;:1&amp;quot;&amp;gt;{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=7LFzfbhmJcMC&amp;amp;pg=PA185&amp;amp;redir_esc=y#v=onepage&amp;amp;q&amp;amp;f=false|title=The History of Medieval Vaishnavism in Orissa|last=Mukherjee|first=Prabhat|date=1981|publisher=Asian Educational Services|isbn=978-81-206-0229-8|language=en}}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== दक्षिण भारत ==&lt;br /&gt;
गोकुला अष्टमी (जन्माष्टमी या श्री कृष्ण जयंती) कृष्ण का जन्मदिन मनाती है।  गोकुलाष्टमी दक्षिण भारत में बहुत उत्साह के साथ मनाई जाती है। [३९] केरल में, लोग मलयालम कैलेंडर के अनुसार सितंबर को मनाते हैं।  तमिलनाडु में, लोग फर्श को कोलम (चावल के घोल से तैयार सजावटी पैटर्न) से सजाते हैं।  गीता गोविंदम और ऐसे ही अन्य भक्ति गीत कृष्ण की स्तुति में गाए जाते हैं।  फिर वे घर की दहलीज से पूजा कक्ष तक कृष्ण के पैरों के निशान खींचते हैं, जो घर में कृष्ण के आगमन को दर्शाता है। भगवद्गीता का पाठ भी एक लोकप्रिय प्रथा है।  कृष्ण को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद में फल, पान और मक्खन शामिल हैं।  कृष्ण की पसंदीदा मानी जाने वाली सेवइयां बड़ी सावधानी से तैयार की जाती हैं।  उनमें से सबसे महत्वपूर्ण हैं सीदाई, मीठी सीदाई, वेरकादलाई उरुंडई।  यह त्योहार शाम को मनाया जाता है क्योंकि कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था।  ज्यादातर लोग इस दिन सख्त उपवास रखते हैं और आधी रात की पूजा के बाद ही भोजन करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आंध्र प्रदेश में, श्लोकों और भक्ति गीतों का पाठ इस त्योहार की विशेषता है।  इस त्यौहार की एक और अनूठी विशेषता यह है कि युवा लड़के कृष्ण के रूप में तैयार होते हैं और वे पड़ोसियों और दोस्तों से मिलते हैं।  विभिन्न प्रकार के फल और मिठाइयाँ सबसे पहले कृष्ण को अर्पित की जाती हैं और पूजा के बाद इन मिठाइयों को आगंतुकों के बीच वितरित किया जाता है।  आंध्र प्रदेश के लोग भी उपवास रखते हैं।  इस दिन गोकुलनंदन चढ़ाने के लिए तरह-तरह की मिठाइयां बनाई जाती हैं।  कृष्ण को प्रसाद बनाने के लिए दूध और दही के साथ खाने की चीजें तैयार की जाती हैं।  राज्य के कुछ मंदिरों में कृष्ण के नाम का आनंदपूर्वक जप होता है।  कृष्ण को समर्पित मंदिरों की संख्या कम है।  इसका कारण यह है कि लोगों ने मूर्तियों के बजाय चित्रों के माध्यम से उनकी पूजा की जाती है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृष्ण को समर्पित लोकप्रिय दक्षिण भारतीय मंदिर हैं, तिरुवरुर जिले के मन्नारगुडी में राजगोपालस्वामी मंदिर, कांचीपुरम में पांडवधूथर मंदिर, उडुपी में श्री कृष्ण मंदिर और गुरुवायुर में कृष्ण मंदिर विष्णु के कृष्ण अवतार की स्मृति को समर्पित हैं।  किंवदंती कहती है कि गुरुवायुर में स्थापित श्री कृष्ण की मूर्ति द्वारका की है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह समुद्र में डूबी हुई थी।&amp;lt;ref name=&amp;quot;:1&amp;quot; /&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== भारत के बाहर ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== नेपाल ===&lt;br /&gt;
नेपाल की लगभग अस्सी प्रतिशत आबादी खुद को हिंदू के रूप में पहचानती है और कृष्ण जन्माष्टमी मनाती है।  वे आधी रात तक उपवास करके जन्माष्टमी मनाते हैं। भक्त भगवद गीता का पाठ करते हैं और भजन और कीर्तन नामक धार्मिक गीत गाते हैं।  कृष्ण के मंदिरों को सजाया जाता है।  दुकानों, पोस्टरों और घरों में कृष्ण के रूपांकन हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== बांग्लादेश ===&lt;br /&gt;
जन्माष्टमी बांग्लादेश में एक राष्ट्रीय अवकाश है।   जन्माष्टमी पर, बांग्लादेश के राष्ट्रीय मंदिर, ढाकेश्वरी मंदिर ढाका से एक जुलूस शुरू होता है, और फिर पुराने ढाका की सड़कों से आगे बढ़ता है।  जुलूस 1902 का है, लेकिन 1948 में रोक दिया गया था। जुलूस 1989 में फिर से शुरू किया गया था।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|url=https://www.hinduismtoday.com/|title=Hinduism Today - Authentic resources for a billion-strong religion in renaissance|website=Hinduism Today|language=en-US|access-date=2021-08-23}}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== फ़िजी ===&lt;br /&gt;
फिजी में कम से कम एक चौथाई आबादी हिंदू धर्म का पालन करती है, और यह अवकाश फिजी में तब से मनाया जाता है जब से पहले भारतीय गिरमिटिया मजदूर वहां पहुंचे थे।  फिजी में जन्माष्टमी को &amp;quot;कृष्णा अष्टमी&amp;quot; के रूप में जाना जाता है।  फ़िजी में अधिकांश हिंदुओं के पूर्वज उत्तर प्रदेश, बिहार और तमिलनाडु से उत्पन्न हुए हैं, जिससे यह उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण त्योहार है।  फिजी का जन्माष्टमी उत्सव इस मायने में अनोखा है कि वे आठ दिनों तक चलते हैं, जो आठवें दिन तक चलता है, जिस दिन कृष्ण का जन्म हुआ था।  इन आठ दिनों के दौरान, हिंदू घरों और मंदिरों में अपनी &#039;मंडलियों&#039; या भक्ति समूहों के साथ शाम और रात में इकट्ठा होते हैं, और भागवत पुराण का पाठ करते हैं, कृष्ण के लिए भक्ति गीत गाते हैं, और प्रसाद वितरित करते हैं।&amp;lt;ref name=&amp;quot;:4&amp;quot;&amp;gt;{{Cite web|url=https://fijisun.com.fj/2015/09/06/hindus-mark-birth-of-lord-krishna/|title=Hindus Mark Birth Of Lord Krishna|language=en-US|access-date=2021-08-24}}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== रीयूनियन ===&lt;br /&gt;
फ्रांसीसी द्वीप रीयूनियन के मालबारों में, कैथोलिक और हिंदू धर्म का एक समन्वय विकसित हो सकता है।  जन्माष्टमी को ईसा मसीह की जन्म तिथि माना जाता है।&amp;lt;ref name=&amp;quot;:4&amp;quot; /&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== अन्य ===&lt;br /&gt;
एरिज़ोना, संयुक्त राज्य अमेरिका में, गवर्नर जेनेट नेपोलिटानो इस्कॉन को स्वीकार करते हुए जन्माष्टमी पर संदेश देने वाले पहले अमेरिकी नेता थे।  यह त्योहार कैरिबियन में गुयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, जमैका और पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश फिजी के साथ-साथ सूरीनाम के पूर्व डच उपनिवेश में हिंदुओं द्वारा व्यापक रूप से मनाया जाता है।  इन देशों में बहुत से हिंदू तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और बिहार से आते हैं;  तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और उड़ीसा के गिरमिटिया प्रवासियों के वंशज।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संदर्भ ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{हिन्दू पर्व-त्यौहार}}[https://powerwala https://powerwala.blogspot.com]{{Dead link|date=जुलाई 2021 |bot=InternetArchiveBot }}&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:संस्कृति]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू त्यौहार]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भारत में त्यौहार]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:कृष्ण]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>103.206.51.151</name></author>
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