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	<title>भारतपीडिया - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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	<subtitle>सदस्य द्वारा योगदान</subtitle>
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		<title>भगवान बुद्ध और उनका धम्म</title>
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		<updated>2021-04-05T11:37:56Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;150.242.62.181: /* बाहरी कड़ियाँ */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{Infobox book&lt;br /&gt;
| name     = भगवान बुद्ध और उनका धम्म&lt;br /&gt;
| title_orig  = [[:en:The Buddha and His Dhamma|The Buddha and His Dhamma]]&lt;br /&gt;
| translator  = डॉ. [[भदन्त आनन्द कौशल्यायन]]&lt;br /&gt;
| image     = &lt;br /&gt;
| caption = &lt;br /&gt;
| author    = [[बोधिसत्व]] [[भीमराव आंबेडकर|डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर]]&lt;br /&gt;
| illustrator  = &lt;br /&gt;
| cover_artist = &lt;br /&gt;
| country    = [[भारत]]&lt;br /&gt;
| language   = [[अंग्रेज़ी]]&lt;br /&gt;
| series    = [[नवयान]]&lt;br /&gt;
| subject    = &lt;br /&gt;
| genre     = [[बौद्ध धर्म]]&lt;br /&gt;
| publisher   = सिद्धार्थ महाविद्यालय प्रकाशन, मुंबई&amp;lt;ref&amp;gt;Ambedkar,Dr. B. R. [http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00AMBEDKAR/AMBEDKAR_BUDDHA/00_fwp.html The BUDDHA and HIS DHAMMA] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20161210190018/http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00ambedkar/ambedkar_buddha/00_fwp.html |date=10 दिसंबर 2016 }}, retrieved 2008-12-27&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
| pub_date   = १९५७&lt;br /&gt;
| english_pub_date = &lt;br /&gt;
| media_type  = &lt;br /&gt;
| pages     = ५९९&lt;br /&gt;
| isbn     = &lt;br /&gt;
| oclc     = &lt;br /&gt;
| preceded_by  = &lt;br /&gt;
| followed_by  = Dr. Babasheb Ambedkar, writings and speeches, v. 12. Unpublished writings ; Ancient Indian commerce ; Notes on laws ; Waiting for a visa ; Miscellaneous notes, etc.&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&#039;&#039;&#039;भगवान बुद्ध और उनका धम्म&#039;&#039;&#039; यह [[भीमराव आंबेडकर|डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर]] द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रन्थ है।इस ग्रन्थ में डॉ॰ अम्बेडकर ने अपने अनुसार [[महात्मा बुद्ध]] के विचारों की व्याख्या की है। यह [[गौतम बुद्ध|तथागत बुद्ध]] के जीवन और [[बौद्ध धर्म]] के सिद्धान्तों पर प्रकाश डालता है। यह डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा रचित अंतिम ग्रन्थ है। यह ग्रंथ [[नवयान]]ी बौद्ध अनुयायिओं का धर्मग्रंथ है और उनके द्वारा एक पवित्र ग्रन्थ के रूप में उपयोग किया जाता है। । संपूर्ण विश्व भर और मुख्यतः बौद्ध जगत में यह ग्रंथ अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite book|first1=डॉ॰ भीमराव|last1=आंबेडकर|title=द बुद्ध एंड हिज़ धम्म|trans-title=भगवान बुद्ध और उनका धम्म|date=1957|publisher=सिद्धार्थ महाविद्यालय, मुंबई|location=मुंबई|page=599|pages=599| language = en}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह ग्रंथ मूलतः [[अंग्रेज़ी]] में &#039;द बुद्धा ऐण्ड हिज़ धम्मा&#039; (The Buddha and His Dhamma) नाम से लिखा हुआ है और [[हिन्दी]], [[गुजराती]], [[तेलुगु]], [[तमिल]], [[मराठी]], [[मलयालम]], [[कन्नड़]], [[जापानी]] सहित और कई भाषाओं में [[अनुवाद]] किया गया है। प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान और [[भिक्खू]] डॉ. [[भदन्त आनंद कौसल्यायन]] जी ने इस ग्रंथ का [[हिंदी]] अनुवाद किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने उल्लेख किया है कि उनकी [[बौद्ध धर्म]] की सोच जानने के लिए उनकी तीन किताबें पढनी आवश्यक है- (१) भगवान बुद्ध और उनका धम्म,  (२) [[बुद्ध]] और [[कार्ल मार्क्स]]; और (३) भारत में क्रांति और प्रतिक्रांति।&amp;lt;ref name=&amp;quot;columbia.edu&amp;quot;&amp;gt;{{Cite web|url=http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00AMBEDKAR/AMBEDKAR_BUDDHA/00_pref_unpub.html|title=00_pref_unpub|website=www.columbia.edu|access-date=10 मार्च 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20180502081913/http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00ambedkar/ambedkar_buddha/00_pref_unpub.html|archive-date=2 मई 2018|url-status=dead}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ब्रिटेन]] के एक बौद्ध [[विहार]] में डॉ॰ बाबासाहेब की मूर्ति स्थापित है, और वहां&lt;br /&gt;
डॉ॰ बाबासाहेब के हाथ में ‘भगवान बुद्ध और उनका धम्म’ ग्रंथ है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
यह ग्रन्थ का पहली बार बाबासाहेब की [[मृत्यु]] [[६ दिसंबर]] [[१९५६]] के बाद [[१९५७]] में प्रकाशित हुआ था। फिर से सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा [[१९७९]] में &#039;डॉ. आंबेडकर का सम्पूर्ण लेखन और भाषण&#039; के रूप में ग्यारह भागों में प्रकाशित किया गया था। &amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|url=https://openlibrary.org/|title=Welcome to Open Library &amp;amp;#124; Open Library|website=openlibrary.org|access-date=19 जुलाई 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190719193623/https://openlibrary.org/|archive-date=19 जुलाई 2019|url-status=live}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
;डॉ. आंबेडकर का ग्रंथ लिखने का उद्देश्य:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
इस किताब को लिखने के लिए आग्रह करता हूं कि एक अलग मूल है। 1951 में कलकत्ता की महाबोधि सोसायटी के जर्नल के संपादक ने मुझसे पूछा वैशाख ([[बुद्ध जयंती]]) संख्या के लिए एक लेख लिखने के लिए। उस लेख में मैंने तर्क दिया कि बुद्ध का धर्म ही धर्म है जो एक समाज विज्ञान से जागा स्वीकार कर सकता था, और जिसके बिना यह नाश होगा। मैंने यह भी बताया है कि आधुनिक दुनिया के लिए बौद्ध धर्म ही सही धर्म है जो वह खुद को बचाने के लिए होना चाहिए था। यही कारण है कि बौद्ध धर्म का तथ्य यह है कि, बौद्ध धर्म का साहित्य इतना विशाल है कि कोई भी इसके बारे में पूरा पढ़ नहीं सकते है, यही वजह से [एक] धीमी गति से अग्रिम है बनाता है। यह एक बाइबिल के रूप में ऐसी कोई बात नहीं है कि ईसाइयों के रूप में है, इसकी सबसे बड़ी बाधा है। इस लेख के प्रकाशन पर, मैं कई कॉल, लिखित और मौखिक, इस तरह के एक किताब लिखने के लिए प्राप्त किया। यह इन कहता है कि मैं काम किए हैं के जवाब में है।&amp;lt;ref name=&amp;quot;columbia.edu&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== हिन्दी संस्करण ===&lt;br /&gt;
इस प्रसिद्ध ग्रंथ के अनुवादक पू. डॉ॰ [[भदन्त आनन्द कौसल्यायन]] (१९०५-१९८८) सन् १९५८ में [[थाईलैंड]] जाने के लिए [[बम्बई]] (अब [[मुंबई]]) से [[कलकत्ता]] जा रहे थे। स्टेशन पर उन्हें &#039;&#039;&#039;The Buddha and His Dhamma&#039;&#039;&#039;&#039; की एक प्रति उपलब्ध कराई गई थी। कलकत्ता पहुंचते पहुंचते उन्होंने उसे अधिकांश पढ डाला और अनुवाद आरंभ कर दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[विश्व बौद्ध सम्मेलन]] के उत्सव के अनन्तर वे थाईलैंड में दो महिने तक इस ग्रंथ का अनुवाद समाप्त करने की कामना से रूके रहे। वट महाधात, [[बैंकाक]] के उनके स्नेहीओं ने भी उनके अनुवाद कार्य में हर तरह से सहायता की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुवाद का कार्य सम्प्त कर वे बैंकाक से [[जापान]] और [[बर्मा]] (म्यान्मार) गये। वे बर्मा से [[भारत]] आये एवं सन १९५९ जून महिने में [[श्रीलंका]] रवाना हो गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब सन १९५७ में मूल अंग्रेजी ग्रंथ &#039;&#039;&#039;द बुद्ध एँड हिज् धम्म&#039;&#039;&#039; सर्व प्रथम प्रकाशित हुआ तो भारत एवं कई बौद्ध देशों में इसका स्वागत और विरोध भी हुआ। बोधिसत्व डॉ बाबासाहेब आंबेडकर इस ग्रंथ के प्रकाशन पूर्व ही [[महापरिनिर्वाण]] हुआ था, उन्होंने इस मूल अंग्रेजी ग्रंथ में किसी प्रकार के फूट नोट्स या उद्धारण नहीं दिये थे। आलोचकों का मुंह बंद करने के लिए प्राचीन ग्रंथो में से आधार खोजे गये। [[भन्तेजी]] कौसल्यायन ने श्रीलंका में मूल पालि ग्रंथों को देखकर फूट नोट्स तैयार किये। अब इसका अंग्रेजी अनुवाद तैयार कर अंग्रेजी संस्करण में जोडे गये हैं। इस प्रकार इस महान ग्रंथ की प्रामाणिकता सिद्ध की गई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सन १९६० में विश्व विद्यालय के अवकाश के दिनों में भन्तेजी भारत आये। &#039;&#039;&#039;भगवान बुद्ध और उनका धम्म&#039;&#039;&#039; की पांडुलिपि उनके साथ थी। वे मुंबई गये और उस समय के [[पिपल्स एज्युकेशन सोसाईटी]] के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आर आर भोले से कहां मैंने बाबा साहेब के ग्रंथ का अनुवाद किया है।आप इसको छपवाने की व्यवस्था करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भोले साहब ने डॉ॰ आनंद कौसल्यायन को दो तीन जगह से अनुवाद पढवाकर सुना और कहां कि मैं संतुष्ट हूँ। पुस्तक जल्द ही छपेंगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस का पहला हिन्दी संस्करण सन १९६१ में प्रकाशित हुआ। तब से आज तक इसके कई संस्करण निकले। भन्तेजी ने इस ग्रंथ का [[पंजाबी भाषा]] में भी अनुवाद किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह ग्रंथ [[ताईवान]] में पहुंचा तो &#039;&#039;&#039;दि कार्पोरेट बॉडी ऑफ दि बुद्धा एज्युकेशन फाउंडेशन, ताईवान&#039;&#039;&#039; के पदाधिकारीओं ने इसका हिन्दी एवं अंग्रेजी संस्करण छपवाकर बिना मूल्य वितरित करने इच्छा व्यक्त की है। भारतीय बौद्ध उनके इस पुण्यमय कार्य के लिए अत्यंत कृत्यज्ञ है।&lt;br /&gt;
&#039;&#039;&#039;सब्बे सत्ता सुखी होंतु।&#039;&#039;&#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सामग्री&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|url=http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00ambedkar/ambedkar_buddha/index.html|title=The Buddha and His Dhamma, by Dr. B. R. Ambedkar|website=www.columbia.edu|access-date=7 जनवरी 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170206105843/http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00ambedkar/ambedkar_buddha/index.html|archive-date=6 फ़रवरी 2017|url-status=dead}}&amp;lt;/ref&amp;gt; ==&lt;br /&gt;
=== परिचय ===&lt;br /&gt;
पुस्तक सवाल बौद्ध धर्म चेहरे के आधुनिक छात्रों के लिए एक जवाब के रूप में लिखा है। शुरूआत में, लेखक के बाहर सूचीबद्ध चार सवाल:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;Blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
पहली समस्या भगवान बुद्ध के जीवन की प्रधान घटना प्रव्रज्या के संबंध मे ही है । भगवान बुद्ध प्रव्रज्या क्यों ग्रहण की? परंपरागत जवाब यह है कि उन्होंने प्रव्रज्या लि क्योंकि उन्होंने एक वृद्ध व्यक्ति, एक बीमार व्यक्ति और एक मृत व्यक्ति को देखा था । स्पष्ट ही यह उत्तर प्रभावित करने वाला नही है । भगवान बुद्ध ने 29 साल की उम्र में परिव्रजा ले लि तो वह इन तीनों स्थलों में से एक परिणाम के रूप में परिव्रजा ले लि, यह कैसे वह इन तीन जगहें पहले नहीं देखा था है? ये सैकड़ों द्वारा होने वाली आम घटनाओं रहे हैं, और बुद्ध पहले उन्हें भर में आ करने में विफल नहीं हो सकता था। यह परंपरागत स्पष्टीकरण स्वीकार करते हैं कि यह पहली बार वह उन्हें देखा था असंभव है। स्पष्टीकरण प्रशंसनीय नहीं है और कारण के लिए अपील नहीं करता है। लेकिन अगर इस सवाल का जवाब नहीं है, क्या असली जवाब है?&amp;lt;/Blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;Blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
दूसरी समस्या यह है चार आर्य सत्य द्वारा बनाई गई है। वे बुद्ध की शिक्षाओं मूल के हिस्से के रूप में है? इस फार्मूले को बौद्ध धर्म की जड़ में कटौती। जीवन दु: ख है, मृत्यु दु: ख है, और पुनर्जन्म दु: ख है, तो वहाँ सब कुछ का एक अंत होता है। न तो धर्म है और न ही दर्शन एक आदमी दुनिया में खुशी प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। अगर कोई दु: ख से नहीं बच पाती है, तो, क्या बुद्ध धर्म क्या कर सकते हैं कर सकते हैं, इस तरह के दु: ख से आदमी है जो जन्म से ही कभी वहाँ राहत देने के लिए? चार आर्य सत्य बौद्ध धर्म के सुसमाचार को स्वीकार गैर बौद्धों के रास्ते में एक महान बड़ी बाधा हैं। चार आर्य सत्य के लिए आदमी के लिए आशा इनकार करते हैं। चार आर्य सत्य बुद्ध के सुसमाचार निराशावाद के सुसमाचार बनाते हैं। वे मूल सुसमाचार के फार्म का हिस्सा है, या वे भिक्षुओं द्वारा एक बाद की अभिवृद्धि कर रहे हैं?&lt;br /&gt;
&amp;lt;/Blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;Blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
तीसरी समस्या आत्मा के सिद्धांतों, कर्म और पुनर्जन्म के लिए संबंधित है।भगवान बुद्ध आत्मा के अस्तित्व से इनकार किया। लेकिन उन्होंने यह भी कर्म और पुनर्जन्म के सिद्धांत की पुष्टि की है कहा जाता है। एक बार में एक सवाल उठता है। अगर कोई आत्मा है, कैसे वहाँ कर्म हो सकता है? अगर कोई आत्मा है, कैसे वहाँ पुनर्जन्म हो सकता है? ये चौंकाने वाला सवाल कर रहे हैं। किस अर्थ में बुद्ध शब्द कर्म और पुनर्जन्म का उपयोग किया था? वह उन्हें समझ में आता है जिसमें वे अपने दिन के ब्राह्मणों द्वारा इस्तेमाल किया गया तुलना में एक अलग अर्थ में प्रयोग करते हैं? यदि हां, तो क्या अर्थ में? वह उन्हें एक ही भावना है जिसमें ब्राह्मण उन्हें इस्तेमाल में प्रयोग करते हैं? यदि हां, तो आत्मा के इनकार और कर्म और पुनर्जन्म की अभिपुष्टि के बीच एक भयानक विरोधाभास नहीं है? इस विरोधाभास का समाधान किए जाने की जरूरत है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चौथी समस्या भिक्खु से संबंधित है। भिक्खु बनाने में बुद्ध की वस्तु क्या थी? वस्तु एक सही आदमी बनाने के लिए किया गया था? या लोगों की सेवा और उनके दोस्त, गाइड किया जा रहा है और दार्शनिक के लिए अपना जीवन devoting एक सामाजिक सेवक बनाने के लिए अपने उद्देश्य था? यह एक बहुत ही असली सवाल है। इस पर बौद्ध धर्म का भविष्य निर्भर करता है। भिक्खु केवल एक सही आदमी है, तो वह बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए किसी काम का नहीं है, क्योंकि हालांकि एक सही आदमी वह एक स्वार्थी आदमी है। अगर, दूसरे हाथ पर, वह एक सामाजिक नौकर है, वह साबित बौद्ध धर्म की आशा हो सकता है। इस प्रश्न का सैद्धांतिक स्थिरता के हित में है, लेकिन बौद्ध धर्म के भविष्य के हित में इतना नहीं करने का फैसला किया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&amp;lt;/Blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== विषय-सूचि ==&lt;br /&gt;
&amp;quot;भगवान बुद्ध उनका धम्म’ ग्रंथ कि विषय-सूचि&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===प्रथम काण्ड : सिद्धार्थ गौतम–बोधिसत्व किस प्रकार बुद्ध बने===&lt;br /&gt;
* भाग I - जन्म से प्रव्रज्या (गृहत्याग)&lt;br /&gt;
* भाग II - सदा के लिए अभिनिष्क्रमण&lt;br /&gt;
* भाग III - नये प्रकार की खोज में&lt;br /&gt;
* भाग IV - ज्ञान-प्राप्ति और नए मार्ग का दर्शन&lt;br /&gt;
* भाग V - बुद्ध और उनके पूर्वज&lt;br /&gt;
* भाग VI - बुद्ध तथा उनके समकालीन&lt;br /&gt;
* भाग VII - समानता तथा विषमता&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== द्वितीय काण्ड: धम्म दीक्षाओं का आन्दोलन ===&lt;br /&gt;
* भाग I - बुद्ध और उनका विषाद योग&lt;br /&gt;
* भाग II - परिव्रजकों की दीक्षा&lt;br /&gt;
* भाग III - कुलीनों तथा धार्मिकों की धम्म-दीक्षा&lt;br /&gt;
* भाग IV - जन्म भूमि का आवाहन &lt;br /&gt;
* भाग V - धम्म दीक्षा का पुनरारम्भ &lt;br /&gt;
* भाग VI - निम्नस्तर के लोगों की धम्म दीक्षा&lt;br /&gt;
* भाग VII - महिलाओं की धम्म दीक्षा&lt;br /&gt;
* भाग VIII - पतितों और अपराधियों की धम्म दीक्षा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== तृतीय काण्ड: बुद्ध ने क्या सिखाया ===&lt;br /&gt;
* भाग I - धम्म में भगवान बुद्ध की अपनी जगह&lt;br /&gt;
* भाग II - बुद्ध के धम्म के बारें में विभिन्न विचार&lt;br /&gt;
* भाग III - धम्म क्या है ?&lt;br /&gt;
* भाग IV - अधम्म क्या है ?&lt;br /&gt;
* भाग V - सद्धम्म क्या है ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== चतुर्थ काण्ड: धर्म (मज़हब) और धम्म ===&lt;br /&gt;
* भाग I - मजहब और धम्म&lt;br /&gt;
* भाग II - किस प्रकार शाब्दिक समानता तात्विक भेद को छिपाे रकती है&lt;br /&gt;
* भाग III - बौद्ध जीवन का मार्ग&lt;br /&gt;
* भाग IV - बुद्ध के उपदेश &lt;br /&gt;
दुनिया को बदल सकते है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== पंचम काण्ड: संघ ===&lt;br /&gt;
* भाग I - संघ&lt;br /&gt;
* भाग II - [[भिक्खु]]: भगवान बुद्ध की कल्पना&lt;br /&gt;
* भाग III - भिक्खु के कर्तव्य&lt;br /&gt;
* भाग IV - भिक्खु और गृहस्थ समाज&lt;br /&gt;
* भाग V - गृहस्थ धर्मावलंबियों के लिए विनय (जीवन-नियम)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== षष्ठ काण्ड: भगवान बुद्ध और उनके समकालीन ===&lt;br /&gt;
* भाग I - बुद्ध के समर्थक&lt;br /&gt;
* भाग II - बुद्ध के विरोधी&lt;br /&gt;
* भाग III - उनके सिद्धांतों (धम्म) के आलोचक&lt;br /&gt;
* भाग IV - समर्थक और प्रशंसक&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== सप्तम काण्ड: महान परिव्राजक की अन्तिम चारिका ===&lt;br /&gt;
* भाग I- निकटस्थ जनों से भेट&lt;br /&gt;
* भाग II - वैशाली से विदाई&lt;br /&gt;
* भाग III - महा-परिनिर्वाण&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== अष्टम काण्ड: महामानव सिद्धार्थ गौतम ===&lt;br /&gt;
* भाग I - उनका व्यक्तित्व&lt;br /&gt;
* भाग II - उनकी मानवता&lt;br /&gt;
* भाग III - उन्हें क्या नापसंद था और क्या पसंद ?&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== समाप्ति ===&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&#039;&#039;&#039;&#039;&#039;नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स&#039;&#039;&#039;&#039;&#039;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==इन्हें भी देखें==&lt;br /&gt;
* [[नवयान]] &lt;br /&gt;
* [[दलित बौद्ध आंदोलन]]&lt;br /&gt;
* [[दीक्षाभूमि]]&lt;br /&gt;
* [[चैत्य भूमि]]&lt;br /&gt;
* [[आंबेडकरवाद]]&lt;br /&gt;
* [[आंबेडकर जयंती]]&lt;br /&gt;
* [[भारत में बौद्ध धर्म का पुनरुत्थान]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सन्दर्भ==&lt;br /&gt;
{{Reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ग्रन्थसूची==&lt;br /&gt;
* Fiske, एडेल (2004)। बी.आर. में बौद्ध धर्म ग्रंथों का उपयोग अम्बेडकर की द बुद्ध और उनके धम्म। में: Jondhale, सुरेंद्र; बेल्ट्ज़, जोहानिस (सं।)। दुनिया के पुनर्निर्माण: बी.आर. अम्बेडकर और बौद्ध धर्म भारत में। नई दिल्ली: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20161127110726/http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00ambedkar/ambedkar_buddha/ &#039;&#039;ddha And His Dhamma&#039;&#039; Book Online]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20181201073119/https://ambedkar.webs.com/ Dr.Ambedkar Website]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Buddhism topics}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{DEFAULTSORT:बुद्ध और उनका धम्म}}&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बौद्ध ग्रंथ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बौद्ध धर्म]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:धर्म ग्रंथ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:ग्रन्थ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:दर्शन]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:गौतम बुद्ध]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:बौद्ध साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भीमराव आम्बेडकर द्वारा लिखित पुस्तकें]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:अंग्रेजी साहित्य]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>150.242.62.181</name></author>
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