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	<title>भारतपीडिया - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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		<title>ऐलेक्ज़ैन्डर ग्राहम बेल</title>
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		<updated>2021-08-16T18:34:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;2402:3A80:1045:413A:3898:15C3:1AA1:5D0B: /* जीवनी */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{स्रोतहीन|date=सितंबर 2014}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[चित्र:Alexander Graham Bell.jpg|thumb|right|अलेक्ज़ांडर ग्राहम बेल]]&lt;br /&gt;
&#039;&#039;&#039;अलेक्जेंडर ग्राहम बेल&#039;&#039;&#039; (Alexander Graham Bell) (3 मार्च 1847 – 2 अगस्त 1922) को पूरी दुनिया आमतौर पर [[दूरभाष|टेलीफोन]] के [[आविष्कार और आविष्कारक|आविष्कारक]] के रूप में ही ज्यादा जानती है। बहुत कम लोग ही यह जानते हैं कि ग्राहम बेल ने न केवल टेलीफोन, बल्कि कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई और भी उपयोगी आविष्कार किए हैं। ऑप्टिकल-फाइबर सिस्टम, फोटोफोन, बेल और डेसिबॅल यूनिट, मेटल-डिटेक्टर आदि के आविष्कार का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। ये सभी ऐसी तकनीक पर आधारित हैं, जिसके बिना संचार-क्रंति की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।&amp;lt;ref name=&amp;quot;WDL&amp;quot;&amp;gt;{{cite web |url = http://www.wdl.org/en/item/11375/ |title = Alexander Graham Bell Laboratory Notebook, 1875-1876 |website = [[World Digital Library]] |date = 1875-1876 |accessdate = 2013-07-23 |archive-url = https://www.webcitation.org/6INB5iujx?url=http://www.wdl.org/en/item/11375/ |archive-date = 25 जुलाई 2013 |url-status = live }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जीवनी ==&lt;br /&gt;
ग्राहम बेल का जन्म [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैण्ड]] के एडिनबर्ग में ३ मार्च सन १८४७ को हुआ था।&lt;br /&gt;
मरण&lt;br /&gt;
२ अगस्त,१९२२&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{अनुवाद}}== विलक्षण प्रतिभा के धनी ==&lt;br /&gt;
ग्राहम बेल की विलक्षण प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे महज तेरह वर्ष के उम्र में ही ग्रेजुएट हो गए थे। यह भी बेहद आश्चर्य की बात है कि वे केवल सोलह साल की उम्र में एक बेहतरीन म्यूजिक टीचर के रूप में मशह थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मां के बधिरपन ने दिखाया रास्ता ==&lt;br /&gt;
अपंगता किसी भी व्यक्ति के लिए एक अभिशाप से कम नहीं होती, लेकिन ग्राहम बेल ने अपंगता को अभिशाप नहीं बनने दिया। दरअसल, ग्राहम बेल की मां बधिर थीं। मां के सुनने में असमर्थता से ग्राहम बेल काफी दुखी और निराश रहते थे, लेकिन अपनी निराशा को उन्होंने कभी अपनी सफलता की राह में रुकावट नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी निराशा को एक सकारात्मक मोड देना ही बेहतर समझा। यही कारण था कि वे ध्वनि विज्ञान की मदद से न सुन पाने में असमर्थ लोगों के लिए ऐसा यंत्र बनाने में कामयाब हुए, जो आज भी [[बधिर]] लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बधिरों से खास लगाव ==&lt;br /&gt;
अगर यह कहें कि ग्राहम बेल ने अपना पूरा जीवन बधिर लोगों के लिए कार्य करने में लगा दिया, तो शायद गलत नहीं होगा। उनकी मां तो बधिर थीं हीं, ग्राहम बेल की पत्नी और उनका एक खास दोस्त भी सुनने में असमर्थ था। चूंकि उन्होंने शुरू से ही ऐसे लोगों की तकलीफ को काफी करीब से महसूस किया था, इसलिए उनके जीवन की बेहतरी के लिए और क्या किया जाना चाहिए, इसे वे बेहतर ढंग से समझ सकते थे। हो सकता है कि शायद अपने जीवन की इन्हीं खास परिस्थितियों की वजह से ग्राहम बेल टेलीफोन के आविष्कार में सफल हो पाए हों।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आविष्कारों के जनक ==&lt;br /&gt;
ग्राहम बेल बचपन से ही ध्वनि विज्ञान में गहरी दिलचस्पी रखते थे, इसलिए लगभग 23 साल की उम्र में ही उन्होंने एक ऐसा पियानो बनाया, जिसकी मधुर आवाज काफी दूर तक सुनी जा सकती थी। कुछ समय तक वे स्पीच टेक्नोलॉजी विषय के टीचर भी रहे थे। इस दौरान भी उन्होंने अपना प्रयास जारी रखा और एक ऐसे यंत्र को बनाने में सफल हुए, जो न केवल म्यूजिकॅल नोट्स को भेजने में सक्षम था, बल्कि आर्टिकुलेट स्पीच भी दे सकता था। यही टेलीफोन का सबसे पुराना मॉडल था।&lt;br /&gt;
[[चित्|अंगूठाकार|ग्राहम बेल के टेलीफोन पेटेंट रेखांकन सन मार्च ७ १८७६  ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==शिक्षा==&lt;br /&gt;
युवा बालक के रूप में बेल अपने भाइयो की ही तरह थे, उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही अपने पिता से ही ग्रहण की थी। अल्पायु में ही उन्हें स्कॉटलैंड के एडिनबर्घ की रॉयल हाई स्कूल में डाला गया था और 15 साल की उम्र में उन्होंने वह स्कूल छोड़ दी थी। उस समय उन्होंने पढाई के केवल 4 प्रकार ही पुरे किये थे। उन्हें विज्ञान में बहुत रूचि थी, विशेषतः जीवविज्ञान में, जबकि दुसरे विषयो में वे ज्यादा ध्यान नही देते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्कूल छोड़ने के बाद बेल अपने दादाजी एलेग्जेंडर बेल के साथ रहने के लिये लन्दन चले गये थे। जब बेल अपने दादा के साथ रह रहे थे तभी उनके अंदर पढने के प्रति अपना प्यार जागृत हुए और तभी से वे घंटो तक पढाई करते थे। युवा बेल ने बाद में अपनी पढाई में काफी ध्यान दिया था। उन्होंने अपने युवा छात्र दृढ़ विश्वास के साथ बोलने के लिये काफी कोशिशे भी की थी। और उन्होंने जाना की उनके सभी सहमित्र उन्होंने एक शिक्षक की तरह देखना चाहते है और उनसे सीखना चाहते है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
16 साल की उम्र में ही बेल वेस्टन हाउस अकैडमी, मोरे, स्कॉटलैंड के वक्तृत्वकला और संगीत के शिक्षक भी बने। इसके साथ-साथ वे लैटिन और ग्रीक के विद्यार्थी भी थे। इसके बाद बेल ने एडिनबर्घ यूनिवर्सिटी भी जाना शुरू किया, और वही अपने भाई मेलविल्ले के साथ रहने लगे थे। 1868 में अपने परिवार के साथ कनाडा शिफ्ट होने से पहले बेल ने अपनी मेट्रिक की पढाई पूरी कर ली थी और फिर उन्होंने लन्दन यूनिवर्सिटी में एडमिशन भी ले लिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
{{Reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
[https://web.archive.org/web/20090304191113/http://hindi.samaylive.com/articles/232723812352236623612350-234823752354-23442375-23252368-23412368-2350237523352354-23372367233523752325238123352352-23252368-232623792332.html ग्राहम बेल ने की थी मेटल डिटेक्टर की खोज]। समय लाइव। २ मार्च २००९। रमेश चंद्र&lt;br /&gt;
**&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:दूरसंचार|बेल, अलेक्ज़ांडर ग्राहम]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:आविष्कारक|बेल, अलेक्ज़ांडर ग्राहम]]&lt;/div&gt;</summary>
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