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	<title>भारतपीडिया - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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	<updated>2026-08-25T09:35:24Z</updated>
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		<title>गोवर्धन पूजा</title>
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		<updated>2021-08-05T10:32:21Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;2409:4041:6E99:7FD:0:0:E70B:E006: dipa&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{स्रोतहीन|date=सितंबर 2014}}&lt;br /&gt;
[[File:Govardhan -1.JPG|thumb|गोवर्धन पूजा की झलक]]&lt;br /&gt;
hi&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कथा ==&lt;br /&gt;
दीपावली की अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में काफी महत्व है। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध दिखाई देता है। इस पर्व की अपनी मान्यता और लोककथा है। गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि गाय उसी प्रकार पवित्र होती है जैसे नदियों में गंगा। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। इनका बछड़ा खेतों में अनाज उगाता है। इस तरह गौ सम्पूर्ण मानव जाती के लिए पूजनीय और आदरणीय है। गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है और इसके प्रतीक के रूप में गाय की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उँगली पर उठाकर रखा और गोप-गोपिकाएँ उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे। सातवें दिन भगवान ने गोवर्धन को नीचे रखा और हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी। तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|url=https://www.livehindustan.com/astrology/story-govardhan-puja-katha-2019-know-gowardhan-pooja-2019-date-time-shubh-muhurat-puja-vidhi-2820104.html|title=Govardhan Puja Katha 2019: पढें गोवर्धन पूजा कथा, श्रीकृष्ण ने रची थी लीला|website=Hindustan|language=hindi|access-date=2020-11-14}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कबीर साहेब जी अपनी वाणी में कहते है:&amp;lt;blockquote&amp;gt;कबीर, गोवर्धन कृष्ण जी उठाया, द्रोणागिरि हनुमंत।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शेष नाग सब सृष्टी उठाई, इनमें को भगवंत।।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|url=https://news.jagatgururampalji.org/govardhan-puja-in-hindi-2020/|title=Govardhan Puja in Hindi: गोवर्धन पूजा पर जानिए कौनसी साधना उचित है?|date=2020-11-11|website=S A NEWS|language=en-US|access-date=2020-11-14}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;गोवर्धन पूजा के सम्बन्ध में एक लोकगाथा प्रचलित है। कथा यह है कि देवराज इन्द्र को अभिमान हो गया था। इन्द्र का अभिमान चूर करने हेतु भगवान श्री कृष्ण जो स्वयं लीलाधारी श्री हरि विष्णु के अवतार हैं ने एक लीला रची। प्रभु की इस लीला में यूं हुआ कि एक दिन उन्होंने देखा के सभी बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे। श्री कृष्ण ने बड़े भोलेपन से मईया यशोदा से प्रश्न किया &amp;quot; मईया ये आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं&amp;quot; कृष्ण की बातें सुनकर मैया बोली लल्ला हम देवराज इन्द्र की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं। मैया के ऐसा कहने पर श्री कृष्ण बोले मैया हम इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं? मैईया ने कहा वह वर्षा करते हैं जिससे अन्न की पैदावार होती है उनसे हमारी गायों को चारा मिलता है। भगवान श्री कृष्ण बोले हमें तो गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाये वहीं चरती हैं, इस दृष्टि से गोर्वधन पर्वत ही पूजनीय है और इन्द्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते व पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं अत: ऐसे अहंकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लीलाधारी की लीला और माया से सभी ने इन्द्र के बदले गोवर्घन पर्वत की पूजा की। देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। प्रलय के समान वर्षा देखकर सभी बृजवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगे कि, सब इनका कहा मानने से हुआ है। तब मुरलीधर ने मुरली कमर में डाली और अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्घन पर्वत उठा लिया और सभी बृजवासियों को उसमें अपने गाय और बछडे़ समेत शरण लेने के लिए बुलाया। इन्द्र कृष्ण की यह लीला देखकर और क्रोधित हुए फलत: वर्षा और तेज हो गयी। इन्द्र का मान मर्दन के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियत्रित करें और शेषनाग से कहा आप मेड़ बनाकर पानी को पर्वत की ओर आने से रोकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन्द्र लगातार सात दिन तक मूसलाधार वर्षा करते रहे तब उन्हे एहसास हुआ कि उनका मुकाबला करने वाला कोई आम मनुष्य नहीं हो सकता अत: वे ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और सब वृतान्त कह सुनाया। ब्रह्मा जी ने इन्द्र से कहा कि आप जिस कृष्ण की बात कर रहे हैं वह भगवान विष्णु के साक्षात अंश हैं और पूर्ण पुरूषोत्तम नारायण हैं। ब्रह्मा जी के मुंख से यह सुनकर इन्द्र अत्यंत लज्जित हुए और श्री कृष्ण से कहा कि प्रभु मैं आपको पहचान न सका इसलिए अहंकारवश भूल कर बैठा। आप दयालु हैं और कृपालु भी इसलिए मेरी भूल क्षमा करें। इसके पश्चात देवराज इन्द्र ने मुरलीधर की पूजा कर उन्हें भोग लगाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस पौराणिक घटना के बाद से ही गोवर्घन पूजा की जाने लगी। बृजवासी इस दिन गोवर्घन पर्वत की पूजा करते हैं। गाय बैल को इस दिन स्नान कराकर उन्हें रंग लगाया जाता है व उनके गले में नई रस्सी डाली जाती है। गाय और बैलों को गुड़ और चावल मिलाकर खिलाया जाता है।   &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गोवर्धन पूजा की विधि ==&lt;br /&gt;
इस दिन प्रात: काल शरीर पर तेल की मालिश करने के बाद में स्नान करने का प्राचीन परंपरा है. इस दिन आप सुबह जल्दी उठकर पूजन सामग्री के साथ में आप पूजा स्थल पर बैठ जाइए और अपने कुल देव का, कुल देवी का ध्यान करिए पूजा के लिए गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत पूरी श्रद्धा भाव से तैयार कीजिए. इसे लेटे हुये पुरुष की आकृति में बनाया जाता है. यदि आप से ठीक तरीके से नहीं बने तो आप चाहे जैसा बना लीजिए. प्रतीक रूप से गोवर्धन रूप में आप इसे तैयार कर लीजिए फूल, पत्ती, टहनीयो एवं गाय की आकृतियों से या फिर आप अपनी सुविधा के अनुसार इसे किसी भी आकृति से सजा लीजिए. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गोवर्धन की आकृति तैयार कर उनके मध्य में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति रखी जाती है नाभि के स्थान पर एक कटोरी जितना गड्ढा बना लिया जाता है और वहां एक कटोरि या मिट्टी का दीपक रखा जाता है फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद और बतासे इत्यादि डालकर पूजा की जाती है और बाद में इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गोवर्धन पूजा के दौरान एक मंत्र का जाप करना चाहिए.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ स्थानों पर गोवर्धन पूजा के साथ ही गायों को स्नान कराने की उन्हें सिंदूर इत्यादि पुष्प मालाओं से सजाए जाने की परंपरा भी है इस दिन गाय का पूजन भी किया जाता है तो यदि आप गाय को स्नान करा कर उसे सजा सकते हैं या उसका श्रृंगार कर सकते हैं तो कोशिश करिए कि गाय का श्रृंगार करें और उसके सिंह पर घी लगाए गुड खिलाएं. गाय की पूजा के बाद में एक मंत्र का उच्चारण किया जाता है जिससे लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं और आपके घर में कभी धन की कमी नहीं रहती है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फल मिठाई इत्यादि आप पूजा के दौरान गोवर्धन में अर्पित करिए गन्ना चढ़ाई है और एक कटोरी दही नाभि स्थान में डाल कर झरनी में से छिड्कते हैं. गोवर्धन जो बनाया जाता है गोबर का उसमें दहि डालकर उसको झरनी से छानीये और फिर गोवर्धन के गीत गाते हुए गोवर्धन की सात बार परिक्रमा की जाती है परिक्रमा के समय एक व्यक्ति हाथ में जल का लोटा व दुसारा व्यक्ति अन्न यानि कि जौ लेकर चलते हैं और जल वाला व्यक्ति जल की धारा को धरती पर गिराते हुआ चलता है और दुसरा अन्न यानि कि जौ बोते हुए परिक्रमा पूरी करते हैं.m&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{हिन्दू पर्व-त्यौहार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:संस्कृति|पूजा, गोवर्धन]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू त्यौहार|पूजा, गोवर्धन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:दीपावली|पूजा, गोवर्धन]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:कृष्ण]]&lt;/div&gt;</summary>
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