घर
बेतरतीब
लॉग-इन करें
सेटिंग्स
भारतपीडिया के बारे में
अस्वीकरण
भारतपीडिया
खोजें
"
गुरु पुष्य योग
" सम्पादित करें
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
हर दिन बदलने वाले नक्षत्र मे पुष्य नक्षत्र भी सामिल है, एवं अन्दाज से हर २७वें दिन पुष्य नक्षत्र होता है। यह जिस वार को आता है, इसका नाम भी उसी प्रकार रखा जाता है। इसी प्रकार गुरुवार को पुष्य नक्षत्र होने से गुरु पुष्य योग कहाजात है। गुरु पुष्य योग में विद्वान ज्योतिषियो का कहना हैं कि पुष्य नक्षत्र में धन प्राप्ति, चांदी, सोना, नये वाहन, बही-खातों की खरीदारी एवं गुरु ग्रह से संबंधित वस्तुए अत्याधिक लाभ प्रदान करती है। इस दिन की गई खरीदारी अधिक समय तक स्थायी और समृद्धि प्रदान करती है। इस दिन की गई सुवर्ण अथवा गुरु ग्रह से संबंधित वस्तुए अत्याधिक लाभ प्रदान करती है। पीला पखराज धारण करना इस दिन अत्यन्त शुभ फलदायी मानगया है। [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]]
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)