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{{आज का आलेख}} [[चित्र:Apollo 15 launch.jpg|thumb|अपोलो १५ अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण]] '''रॉकेट''' एक प्रकार का वाहन है जिसके उड़ने का सिद्धान्त [[न्यूटन के गति के नियम|न्यूटन के गति के तीसरे नियम]] क्रिया तथा बराबर एवं विपरीत प्रतिक्रिया पर आधारित है।<ref>{{cite book |last=प्रसाद |first=चन्द्रमोहन |title= भौतिक एवं रसायन विज्ञान |url=https://archive.org/details/dli.ministry.24851 |year=जुलाई २००४ |publisher=भारती सदन |location=कोलकाता |id= |page=43 |access-date= 1 जुलाई २००९}}</ref> तेज गति से गर्म [[वायु]] को पीछे की ओर फेंकने पर रॉकेट को आगे की दिशा में समान अनुपात का बल मिलता है। इसी सिद्धांत पर कार्य करने वाले [[जेट विमान]], [[अंतरिक्ष यान]] एवं [[प्रक्षेपास्त्र]] विभिन्न प्रकार के राकेटों के उदाहरण हैं। रॉकेट के भीतर एक कक्ष में ठोस या तरल [[ईंधन]] को [[आक्सीजन]] की उपस्थिति में जलाया जाता है जिससे उच्च दाब पर गैस उत्पन्न होती है। यह गैस पीछे की ओर एक संकरे मुँह से अत्यन्त वेग के साथ बाहर निकलती है। इसके फलस्वरूप जो प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है वह रॉकेट को तीव्र वेग से आगे की ओर ले जाती है। अंतरिक्ष यानों को वायुमंडल से ऊपर उड़ना होता है इसलिए वे अपना ईंधन एवं ऑक्सीजन लेकर उड़ते हैं। जेट विमान में केवल ईँधन रहता है। जब विमान चलना प्रारम्भ करता है तो विमान के सिरे पर बने छिद्र से बाहर की वायु इंजन में प्रवेश करती है। वायु के ऑक्सीजन के साथ मिलकर ईँधन अत्यधिक दबाव पर जलता है। जलने से उत्पन्न गैस का दाब बहुत अधिक होता है। यह गैस वायु के साथ मिलकर पीछे की ओर के जेट से तीव्र वेग से बाहर निकलती है। यद्यपि गैस का द्रव्यमान बहुत कम होता है किन्तु तीव्र वेग के कारण संवेग और प्रतिक्रिया बल बहुत अधिक होता है।<ref>{{cite book |last=गुप्त |first=तारकनाथ |title= भौतिकी एवं रसायन शास्त्र |year=नवंबर २००४ |publisher=भारती पुस्तक मन्दिर, |location=कोलकाता |id= |page= 63 |access-date= १ जुलाई २००९}}</ref> इसलिए जेट विमान आगे की ओर तीव्र वेग से गतिमान होता है। == इतिहास == रॉकेट का इतिहास १३वी सदी से प्रारंभ होता है। [[चीन]] में राकेट विद्या का विकास बहुत तेज़ी से हुआ और जल्दी ही इसका प्रयोग अस्त्र के रूप में किया जाने लगा।<ref>{{cite book | last = क्रॉसबाय| first = अल्फ्रेड डब्ल्यु | title = थ्रोविंग फायर: प्रोजेक्टाइल टेक्नोलॉजी थ्रू हिस्ट्री| year = 2002 | publisher = कॅम्ब्रिज युनिवर्सिटी प्रेस| location = कॅम्ब्रिज | isbn = 0521791588 | pages = १००-१०३}}</ref> [[मंगोल]] लड़ाकों के द्वारा रॉकेट तकनीक [[यूरोप]] पहुँची और फिर विभिन्न शासकों द्वारा यूरोप और एशिया के अन्य भागों में प्रचलित हुई। सन १७९२ में [[मैसूर]] के शासक [[टीपू सुल्तान]] ने अंग्रेज सेना के विरुद्ध [[लोहा|लोहे]] के बने रॉकेटों का प्रयोग किया। इस युद्ध के बाद [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी|अंग्रेज सेना]] ने रॉकेट के महत्त्व को समझा और इसकी तकनीक को विकसित कर विश्व भर में इसका प्रचार किया।<ref>[http://www.tigerandthistle.net/tipu312.htm टीपू की जीवनी] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070929195356/http://www.tigerandthistle.net/tipu312.htm |date=29 सितंबर 2007 }}, मैसूर का इतिहास</ref> <!-- संपादन अपेक्षित == भारतीय रॉकेट == [[भारत]] ने कई रॉकेट विकसित किए हैं। इनमें से अधिकांश उपग्रह प्रक्षेपण यान यानि ''सैटेलाइट लॉन्च वहीकल'' (एस.एल.वी) थे। पहला उप-कक्षीय भारतीय रॉकेट [[२१ नवंबर]], [[१९६३]] को प्रक्षेपित किय़ा गया था। प्रथम एस.एल.वी. का प्रयोगात्मक प्रक्षेपण [[१० अगस्त]], [[१९७९]] को किया गया था। ग्यारह महीने बाद [[१८ जुलाई]], [[१९८०]] को भारत ने अपना प्रथम उपग्रह रोहिणी-१ श्रीहरिकोटा से एक एस.एल.वी पर प्रक्षेपित किय़ा था। [[२४ मार्च]], [[१९८७]] को ऑग्मेन्टेड एस.एल.वी (ए.एस.एल.ई) का आरंभ हुआ। उसके बाद [[सितंबर]], [[१९९३]] में ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पी.एस.एल.वी) का आरंभ हुआ। [[२८ मार्च]], [[२००१]] को ''जियोसिंक्रोनस'' एस.एल.वी (जी.एस.एल.वी) श्रेणी के रॉकेटों का आरंभ हुआ। ये रॉकेट भू-सतह से २२,३०० मील ऊपर पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह को स्थापित करने की क्षमता रखते थे।<ref name = " ">[http://www.spacetoday.org/India/IndiaSpaceRockets.html भारतीय अंतरिक्ष रॉकेट] स्पेस टुडे पर</ref>--> == चित्र दीर्घा == <gallery> File:ISRO_rockets.JPG|[[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन]] के रॉकेट File:F-84E_launchs_rockets.jpg|F-84E यान शत्रु क्षेत्र पर रॉकेट दागते हुए File:Brahmos_imds.jpg|[[ब्रह्मोस]] प्रक्षेपात्र भी एक प्रकार का रॉकेट है File:Model_rocket_engine_diagram.png|रॉकेट इंजन की आंतरिक बनावट File:Proton-K-Zarya.jpg|प्रो़टोन-क-ज़ार्या - [[अन्तरराष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन]] का प्रमुख अंग </gallery> == सन्दर्भ == {{reflist}} {{pp-semi-template|small=yes}} [[श्रेणी:रॉकेट]] [[श्रेणी:वैमानिक अभियान्त्रिकी]] [[श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना]] [[श्रेणी:राकेटिकी]]
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