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{{स्रोतहीन|date=दिसम्बर 2020}} '''स्वामी हरिदास''' (1478-1573) भक्त कवि, शास्त्रीय संगीतकार तथा कृष्णोपासक [[सखी संप्रदाय]] के प्रवर्तक थे। इन्हें [[ललिता सखी]] का अवतार माना जाता है। वे वैष्णव भक्त थे तथा उच्च कोटि के संगीतज्ञ भी थे। वे प्राचीन शास्त्रीय संगीत के अद्भुत विद्वान एवम् चतुष् ध्रुपदशैली के रचयिता हैं। प्रसिद्ध गायक [[तानसेन]] इनके शिष्य थे। [[अकबर]] इनके दर्शन करने [[वृन्दावन]] गए थे। ‘केलिमाल’ में इनके सौ से अधिक पद संग्रहित हैं। इनकी वाणी सरस और भावुक है। स्वामी हरिदास का जन्म 1478 में हुआ था। इनके जन्म स्थान और गुरु के विषय में कई मत प्रचलित हैं। हरिदासपुर अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) इनका जन्म स्थान माना जाता है।इनका जन्म समय कुछ ज्ञात नहीं है। ये महात्मा वृन्दावन में निंबार्क सखी संप्रदाय के संस्थापक थे और अकबर के समय में एक सिद्ध भक्त और संगीत-कला-कोविद माने जाते थे। कविताकाल सन् 1543 से 1560 ई. ठहरता है। प्रसिद्ध गायनाचार्य तानसेन इनका गुरूवत् सम्मान करते थे। यह प्रसिद्ध है कि अकबर बादशाह साधु के वेश में तानसेन के साथ इनका गाना सुनने के लिए गया था। कहते हैं कि तानसेन इनके सामने गाने लगे और उन्होंने जानबूझकर गाने में कुछ भूल कर दी। इसपर स्वामी हरिदास ने उसी गाना को शुद्ध करके गाया। इस युक्ति से अकबर को इनका गाना सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो गया। पीछे अकबर ने बहुत कुछ पूजा चढ़ानी चाही पर इन्होंने स्वीकार नहीं की। ==इन्हें भी देखें== *[[सखी संप्रदाय|सखी सम्प्रदाय]] ==बाहरी कड़ियाँ== *[https://web.archive.org/web/20180612112951/https://www.spiritualawareness.co.in/bhakt-stories/haridas स्वामी हरिदास] {{भक्तिकाल के कवि}} [[श्रेणी:भक्त कवि]] [[श्रेणी:कवि]] [[श्रेणी:महाकवि]] [[श्रेणी:हिन्दी]] [[श्रेणी:भाषा]] [[श्रेणी:हिन्दी साहित्य]] [[श्रेणी:शास्त्रीय संगीतकार]] [[श्रेणी:भक्ति आन्दोलन]]
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