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=== अकृतक लोक === ==== [[अकृतक त्रैलोक्य|महर्लोक]] ==== ध्रुवलोक से एक करोड़ योजन ऊपर महर्लोक है। ==== [[अकृतक त्रैलोक्य|जनलोक]] ==== महर्लोक से बीस करोड़ योजन ऊपर जनलोक है। ==== [[अकृतक त्रैलोक्य|तपलोक]] ==== जनलोक से आठ करोड़ योजन ऊपर तपलोक है। ==== [[सत्यलोक]] ==== तपलोक से बारह करोड़ योजन ऊपर सत्यलोक है। जन, तप और सत्य लोक – तीनों अकृतक लोक कहलाते हैं। महर्लोक कृतक और अकृतक लोकों के मध्य में है और कल्पान्त में यह केवल जनशून्य हो जाता है, नष्ट नहीं होता है। इसलिये इसे कृतकाकृतक लोक कहते हैं।
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