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== परिचय == किसी हेतु या वाद के नीचे के न्यायाधीश या न्यायाधिकरण से हटाकर उच्चतर नयायाधीश या न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करना चार विभिझ प्रणलियों द्वारा होता है-- (1) अपील द्वारा, (2) पुनरीक्षण द्वारा, (3) लेख द्वारा, तथा (4) निर्देश की कार्रवाई द्वारा। पुनरावलोकन की कार्रवाई द्वारा किसी न्यायाधीश या न्यायाधिकरण के निर्णय का पुनर्विचार उसी न्यायाधीश या न्यायाधीश द्वारा भी हो सकता है। अपील और पुनरीक्षण में अंतर यह है कि पुनरीक्षण उच्चतर न्यायालय के स्वविवेक पर सदैव निर्भर रहता है और अधिकार या स्वत्व के रूप में उसकी माँग नहीं की जा सकती। उच्चतर न्यायालय पुनरीक्षण इसी आधार पर वियुक्त कर सकता है कि नीचे के न्यायालय द्वारा सार रूप में न्याय हो चुका है चाहे वह निर्णय विधि के प्रतिकूल ही हुआ हो। परंतु अपील ऐसे किसी आधार पर वियुक्त नहीं की जा सकती क्योंकि अपील का, एक बार स्वीकार हो जाने पर, निर्णय विधि के अनुसार किया जाना तब तक अनिवार्य है जब तक अपील करनेका अधिकार देनेवालीे समविधि में कोई विपरीत उपबंध न हो। अपील [[भारत]] की लेखप्रणाली से अनेक रूपों में भिन्न है। लेख की कार्रवाई केवल उच्च न्यायालयों तथा उच्चतम न्यायालय में हो सकती है जब कि अपील उच्च न्यायालयों तथा उच्चतम न्यायालय के अतिरिक्त अन्य न्यायालयों या न्यायाधिकरण में भी हो सकती है। लेख उच्च न्यायालय की अधीकरण शक्ति के अंतर्गत इस हेतु निकाला जाता है कि नीचे के न्यायालय, न्यायाधिकरण, शासन या उसके अधिकारीगण अपने क्षेत्राधिकार के बाहर काम न करें या सार्वजनिक प्रयोजन के लिए दिए हुए क्षेत्राधिकार का प्रयोग करना अस्वीकार न करें, अथवा उनके निर्णय प्रत्यक्ष रूप से देश की विधि के प्रतिकूल न होने पावें तथा वे अपना कर्तव्यपालन उचित रीति से करें। अपील इस प्रकार सीमाबद्ध नहीं है। अपील सभी प्रश्नों को लेकर हो सकती है---प्रश्न चाहे तथ्य का हो चाहे विधि का। द्वितीय अपील केवल विधि के प्रश्नों तक ही सीमित रहती है। अपील और निर्देश में यह भेद है कि निर्देश की याचना नीचे के न्यायालय द्वारा उच्च्तर न्यायालय से की जाती है ताकि विधि या प्रथा के किसी ऐसे प्रश्न का, जिसके संबंध में नीचे के न्यायालय को युक्तियुक्त संदेह हो, उच्चतर न्यायालय द्वारा निर्णय करा लिया जाए।
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