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== इतिहास == प्राचीन मिस्र में अभाज्य संख्या का ज्ञान होने का संकेत रायंड पपायरस (Rhind Papyrus) में मिलता है। अभाज्य संख्या पे विस्तृत जानकारी प्राचीन यूनान (३०० ईसापूर्व) के गणितज्ञ [[यूक्लिड]] के द्वारा लिखी पुस्तक "एलिमेंट्स" में मिलती है। अभाज्य संख्या का अगला विस्तृत उल्लेख सत्रवहीं शताब्दी के गणितज्ञ पियेरे डे फरमैट(1601-1665) के द्वारा मिलता है। फरमैट ने एक सूत्र दिया था जिससे अभाज्य संख्या का अनुमान लगाया जा सकता है। फरमैट ने अनुमान लगाया की जिस भी संख्या को ( 2^2^n +1), जहाँ n एक प्राकृतिक संख्या है, के रूप में लिखा जा सकता है, वो अभाज्य संख्या होंगे। <ref>{{Cite web |url=http://www.vigyanprasar.gov.in/dream/apr2012/dreamapril2012eng.pdf |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 सितंबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161012203829/http://www.vigyanprasar.gov.in/dream/apr2012/DreamApril2012Eng.pdf |archive-date=12 अक्तूबर 2016 |url-status=live }}</ref> हालाँकि n=4 तक ये सही था, पर n=5 पर जो संख्या आती है- (2^32 +1) वह 641 से विभाजित हो जाती है, अतः ये अभाज्य संख्या नहीं है। इसके बाद जो अभाज्य संख्या पे उल्लेखनीय कार्य हुआ, उसका श्रेय जर्मनी के वैज्ञानिक और गणितज्ञ जोहान्न कार्ल फ्रेडरिक ग़ौस्स (1777- 1855) को जाता है। गणित में काफ़ी संख्या शृंखलाएं होती हैं, जैसे ज्यामितीय श्रेणी, समांतर श्रेणी इत्यादि, जिनके सूत्र की मदद से शृंखला के किसी संख्या को पता किया जा सकता है, पर अभाज्य संख्याओं की ऐसी कोई शृंखला सूत्र का पता नहीं चल पाया है, क्योंकि ये कोई स्थाई प्रारूप (Pattern) का पालन नहीं करती | गणित के छेत्र में आज भी ये एक अनसुलझी समस्या है।
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