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== अर्धचालक युक्ति मूल तत्व == [[चित्र:P-doped Si.svg|right|thumb|[[सिलिकॉन]] में [[बोरॉन]] के दूषण से [[डोपिगं]]]] अर्धचालक पदार्थों का सबसे महत्वपूर्ण आकर्शण है के इन्हे दूषित कर इनके व्यवहार को नियंत्रित किया जा सकता है। दूषण की इस प्रक्रिया को [[डोपिगं|<span title="Doping">डोपिगं</span>]] कहते हैं। अर्धचालकों के [[चालन|<span title="Conductivity">चालन</span>]] को [[विद्युत्-क्षेत्र|<span title="Electric Field">वैद्युत क्षेत्र</span>]], [[प्रकाश|<span title="Light">रोशनी</span>]], [[ऊष्मा|<span title="Heat">ऊष्मा</span>]], यहाँ तक [[दाब|<span title="Pressure">दबाव</span>]] से भी नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिये, अर्धचालकों का उपयोग संवेदकों को बनाने में होता है। विद्युतधारा का प्रवाह होता है "मुक्त" [[इलेक्ट्रॉन|<span title="Electron">इलेक्ट्रान</span>]] और "[[इलेक्ट्रॉन कोटर|<span title="Electron Holes">छिद्रों</span>]]" के द्वारा, जिन्हे [[आवेश वाहक|<span title="Charge Carriers">आवेश वाहक</span>]] भी कहते है। [[सिलिकॉन]] जैसे अर्धचालक में [[फास्फोरस|फॉस्फोरस]] या [[बोरॉन]] जैसे तत्वों को डालकर डोपिगं किया जाता है, जिससे अर्धचालक में उपलब्ध मुक्त इलेक्ट्रान या छिद्रों की मात्रा काफी हद तक बढ जाती है। जब दूषित अर्धचालक में अधिक्षम छिद्र होतें हैं तो उसे [[पी-प्रकार अर्धचालक|<span title="P-Type Semiconductor">P-प्रकार अर्धचालक</span>]] कहतें हैं और जब अधिक्षम इलेक्ट्रान होतें हैं तो उसे [[एन-प्रकार अर्धचालक|<span title="N-Type Semiconductor">N-प्रकार अर्धचालक</span>]] कहतें हैं, जहाँ P या N [[धनात्मक प्रभार|<span title="Positive Charge">धनात्मक प्रभार</span>]] या [[ऋणात्मक प्रभार|<span title="Negative Charge">ऋणात्मक प्रभार</span>]] के आवेश वाहकों का सूचक हैं। अर्धचालकों का उत्पादन और उनके डोपिगं की प्रकृया अत्यंत ही नियंत्रित वातावरण, जिसे [[अर्धचालक फैब|<span title="Fab (Semiconductor Fabrication)">फैब</span>]] कहते हैं, में होती है। P-प्रकार और N-प्रकार के अर्धचालकों के बीच के जोड को [[पी एन जंक्शन|<span title="P-N Junction">P-N जोड</span>]] कहते हैं। === डायोड === [[चित्र:Forward-Biased_pn_Junction.svg|right|thumb|[[अग्र अभिनत]] P-प्रकार [[सिलिकॉन]] से बना [[डायोड]]]] P-N जोड से बने '''[[डायोड|<span title="Diode">डायोड</span>]]''' मे P-प्रकार और N-प्रकार के अर्धचालकों के बीच के जोड में [[अवक्षय क्षेत्र|<span title="Depletion Zone">अवक्षय क्षेत्र</span>]] होता है जो विद्युतधारा के प्रवाह को N से P की ओर नही होने देता, पर P से N की ओर होने देता है। जब डायोड ''[[अग्र अभिनत|<span title="Forward Biased">अग्र अभिनत</span>]]'' होता है, जहाँ P की तरफ उच्चतर वैद्युत सन्चालन शक्ति होती है, तब विद्युतधारा प्रवाह होता है। इसके विपरीत, ''[[उत्त्क्रम अभिनत|<span title="Reverse Biased">उत्त्क्रम अभिनत</span>]]'' डायोड में धारा प्रवाह ना के बराबर होता है। अर्धचालक पर रोशनी डालने से [[इलेक्ट्रान-छिद्र जोडें|<span title="Electron-Hole Pair">इलेक्ट्रान-छिद्र के जोडे</span>]] बढ जातें हैं, जिससे चालकता बढ जाती है। इस प्रतिभास का फायदा उठाकर [[फोटो डायोड|<span title="Photo Diode">फोटो डायोड</span>]] बनाया गया। [[संयोजित अर्धचालक|<span title="Compound semiconductor">संयोजित अर्धचालक</span>]] डायोडों से प्रकाश पैदा की जा सकती है, जैसे [[प्रकाश उत्सर्जक डायोड|<span title="Light Emitting Diode">प्रकाश उत्सर्जक डायोड</span>]] (LED) और [[लेज़र डायोड|<span title="Laser Diode">लेज़र डायोड</span>]] में। === ट्रांज़िस्टर === [[चित्र:BJT-transistor01.png|right|thumb|[[द्विध्रुवीय जोड ट्रांज़िस्टर]]]] '''[[ट्रांजिस्टर|<span title="Transistor">ट्रांज़िस्टरों</span>]]''' के प्रमुख प्रकार, [[द्विध्रुवीय जोड ट्रांज़िस्टर|<span title="Bipolar junction transistors">द्विध्रुवीय जोड ट्रांज़िस्टर</span>]] दो p-n जोडों, n-p-n या p-n-p समग्राकृतों में बनते हैं। मध्य खण्ड, जिसे "बेस" भी कहा जाता है, संकीर्ण होता है। अन्य खण्डों को [[उत्सर्जक|<span title="Emitter">उत्सर्जक</span>]] (एमिटर) और [[समाहर्ता|<span title="Collector">समाहर्ता</span>]] (कलेक्टर) कहते हैं। बेस और उत्सर्जक के बीच आवेश के अंतरावहित करने से बेस-समाहर्ता के गुणस्वभाव मे अन्तर आ जाता है, ततः, बेस-समाहर्ता के अग्र अभिनत होने के बावजूद धारा प्रवाह होता है। बेस-उत्सर्जक के छोटे से प्रवाह के बदलाव के अनुपात से कई गुना अधिक प्रवाह बेस-समाहर्ता के बीच मिलता है। एक अन्य तरह का ट्रांज़िस्टर है [[क्षेत्र प्रभाव ट्रांज़िस्टर|<span title="Field Effect Transistor">क्षेत्र प्रभाव ट्रांज़िस्टर</span>]] - इस अर्धचालक के चालकता को विद्युत क्षेत्र के प्रभाव से बढाया-घटाया जाता है। विद्युत क्षेत्र के प्रभाव से मुक्त इलेक्ट्रान और या छिद्रों की मात्रा तक बढ जाती है, इस प्रकार चालकता बढ जाती है। अगर इस विद्युत क्षेत्र को लगाने के लिये उत्त्क्रम अभिनत P-N जोड का प्रयोग करें, तो उसे [[जोड क्षेत्र प्रभाव ट्रांज़िस्टर|<span title="junction field effect transistor">जोड क्षेत्र प्रभाव ट्रांज़िस्टर</span>]] (JFET) कहतें हैं; अगर इस विद्युत क्षेत्र को लगाने के लिये धातु ऑक्साइड का प्रयोग करतें हैं, तो बनता है [[धातु ऑक्साइड अर्धचालक क्षेत्र प्रभाव ट्रांज़िस्टर|<span title="metal-oxide-semiconductor field effect transistor">धातु ऑक्साइड अर्धचालक क्षेत्र प्रभाव ट्रांज़िस्टर</span>]] (MOSFET) [[चित्र:FET_cross_section.png|right|thumb|क्षेत्र प्रभाव ट्रांज़िस्टर]] आज मॉस्फेट (MOSFET) सबसे महत्वपूर्ण अर्धचालक युक्ति है। विद्युत क्षेत्र को उत्पन्न करने का काम "गेट" (द्वार) विद्युदग्र करती है, जिससे "सोर्स" और "ड्रैन" के बीच के चैनल के चालकता का नियंत्रण होता है। इस चैनल के दो प्रकार हैं, P-चैनल (छिद्र) या N-चैनल (इलेक्ट्रान)। हालांकि धातु से मॉस्फेट को उसका नाम मिला, पर आज [[पॉलि सिलिकॉन|<span title="Poly-Silicon">पॉलि सिलिकॉन</span>]] को उपयोगित किया जाता है।
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