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== इतिहास == [[चित्र:Shyamji krishna varma.jpg|right|thumb|250px|क्रान्तिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा (इण्डिया हाउस के संस्थापक)]] श्यामजी कृष्ण वर्मा ने 1888 में [[राजस्थान]] के अजमेर में वकालत के साथ [[स्वराज]] के लिये काम करना शुरू कर दिया था। बाद में रतलाम [[रियासत]] में वे दीवान नियुक्त हो गये। [[मध्यप्रदेश]] के [[रतलाम]], राजस्थान के [[उदयपुर]] और गुजरात के [[जूनागढ़]] में काफी लम्बे समय तक दीवान रहने के उपरान्त जब उन्होंने यह अनुभव किया कि ये राजे-महाराजे अंग्रेजों के खिलाफ़ कुछ नहीं करेंगे तो वे इंग्लैण्ड चले गये और अंग्रेजों की नाक के नीचे लन्दन में हाईगेट के पास एक तिमंजिला भवन खरीद लिया जो किसी पुराने रईस ने आर्थिक तंगी के कारण बेच दिया था। इस भवन का नाम उन्होंने इण्डिया हाउस रखा और उसमें रहने वाले भारतीय छात्रों को छात्रवृत्ति देकर लन्दन में उनकी शिक्षा का व्यवस्था की।<ref name="क्रान्त">{{cite book |last1=क्रान्त |first1= |authorlink1= |last2= |first2= |editor1-first= |editor1-last= |editor1-link= |others= |title=स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास |url=http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 |format= |accessdate=११ फरबरी २०१४ |edition=1 |series= |volume=1 |date= |year=2006 |month= |origyear= |publisher=[[प्रवीण प्रकाशन]] |location=[[नई दिल्ली]] |language=hi |isbn=81-7783-119-4 |oclc= |doi= |id= |page=२५० |pages= |chapter= |chapterurl= |quote=उन्होंने जब यह अनुभव किया कि ये राजे-महाराजे अंग्रेजों के खिलाफ़ कुछ नहीं करेंगे तो वे इंग्लैण्ड चले गये और अंग्रेजों की नाक के नीचे लन्दन में हाईगेट के पास एक तिमंजिला भवन खरीद लिया जो किसी पुराने रईस ने आर्थिक तंगी के कारण बेच दिया था। |ref= |bibcode= |laysummary= |laydate= |separator= |postscript= |lastauthoramp= |archive-url=https://web.archive.org/web/20131014175453/http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 |archive-date=14 अक्तूबर 2013 |url-status=live }}</ref>
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