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इस्लाम में तलाक़
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== प्रक्रिया == कुछ आधुनिक शिक्षा से प्रभावित व्यक्तियों का दावा है कि [[क़ुरआन]] में तलाक़ को न करने लायक़ काम का दर्जा दिया गया है। यही वजह है कि इसको ख़ूब कठिन बनाया गया है। तलाक़ देने की एक विस्तृत प्रक्रिया दर्शाई गई है। परिवार में बातचीत, पति-पत्नी के बीच संवाद और सुलह पर जोर दिया गया है। पवित्र कुरान में कहा गया है कि जहाँ तक संभव हो, तलाक़ न दिया जाए और यदि तलाक़ देना ज़रूरी और अनिवार्य हो जाए तो कम से कम यह प्रक्रिया न्यायिक हो<ref>https://c.mp.ucweb.com/detail/ba9bc74259174ae08168fde1ae52183a?uc_param_str=dnvebichfrmintcpwidsudsvnwpflameefut&set_lang=english{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>। इसके चलते पवित्र क़ुरआन में दोनों पक्षों से बात-चीत या सुलह का प्रयास किए बिना दिए गए तलाक़ का जिक्र कहीं भी नहीं मिलता। इसी तरह पवित्र क़ुरआन में तलाक़ प्रक्रिया की समय अवधि भी स्पष्ट रूप से बताई गई है। एक ही क्षण में तलाक़ का सवाल ही नहीं उठता। खत लिखकर, टेलीफ़ोन पर या आधुनिकाल में ईमेल, एस एम एस अथवा वॉट्सऍप के माध्यम से एक-तरफा और ज़ुबानी या अनौपचारिक रूप से लिखित तलाक़ की इजाज़त इस्लाम कतई नहीं देता। एक बैठक में या एक ही वक्त में तलाक़ दे देना गैर-इस्लामी है।<ref>{{Cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/thoughts-platform/viewpoint/islam-and-talaq/moviearticleshow/18368491.cms |title=संग्रहीत प्रति |access-date=23 फ़रवरी 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140301025242/http://navbharattimes.indiatimes.com/thoughts-platform/viewpoint/islam-and-talaq/moviearticleshow/18368491.cms |archive-date=1 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref> ऐसा किया जाना मिस्र तथा कई अन्य मुस्लिम देशों में अवैध है।
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