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== आरंभिक जीवन, शिक्षा और परिवार == आपका जन्म [[राँची|रांची]] ([[झारखण्ड|झारखंड]]) में हुआ और 40 के दशक में [[अंग्रेजी साहित्य]] में स्नातक करने के बाद आपने लिखना शुरू किया। आपका पूरा नाम एलिस ख्रिस्तयानी पूर्ति है और वे [[आदिवासी विद्रोह]] के इतिहासप्रसिद्ध अगुआ [[बिरसा मुंडा]] के परिवार से संबंध रखती हैं।<ref>{{cite news|title= विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी जीवन संस्कृति पर पांच किताबें|url=https://www.facebook.com/AdivasiLiterature/photos/pb.159723914221802.-2207520000.1462638917./409662212561303|accessdate=3 जुलाई 2017|date=3 जुलाई 2017}}</ref> पूर्ति मुंडा आदिवासियों का गोत्र है। [[मुंडारी भाषा]] में गोत्र को मुंडा लोग ‘किली’ कहते हैं। एक किली के लोग एक साथ ही रहते हैं। एक ही गांव-क्षेत्र में जीते हैं और साथ-साथ दफनाये जाते हैं। एलिस का परिवार 1900 में हुए मुंडा उलगुलान के पहले ही खूंटी टोली, [[सिमडेगा]] में बस गया था। एलिस के पिता नुअस पूर्ति पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर थे। जब वे रांची में पदास्थापित थे और रांची स्थित लाल सिरम टोली में रह रहे थे वहीं एलिस एक्का का जन्म 8 सितंबर 1917 को हुआ। [[ईसाई]] विश्वास के अनुसार उनका नामकरण संस्कार 25 दिसंबर 1917 को रांची के जीईएल चर्च में किया गया। वे अपनी मां मेरी पूर्ति और पिता नुअस पूर्ति के तीन संतानों में से एक हैं। ग्रेसी पूर्ति और बसंत पूर्ति उनके सगे भाई-बहन हैं जबकि आर्नेस्ट पूर्ति दूसरी मां से हुए भाई हैं। जिनका जन्म उनकी दूसरी मां फ्लोरा बाड़ा से हुआ। पिता नुअस पूर्ति ने उनकी मां की देहांत के बाद फ्लोरा बाड़ा से विवाह कर लिया था। <ref>वंदना टेटे, एलिस एक्का की कहानियां, राधाकृष्ण, [[(राजकमल प्रकाशन)]], नई दिल्ली, 2015, पृष्ठ 11-12</ref> एलिस एक्का की प्राईमरी से मैट्रिक तक की पढ़ाई संत मार्ग्रेट स्कूल, बहु बाजार, रांची में हुई। 1938 में ‘एब्रोजिनल फेलोशिप’ पाने और कलकत्ता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में ग्रेजुएशन करने वाली ग्रेटर झारखंड की वह पहली आदिवासी महिला हैं।<ref>{{cite news|title= ‘एलिस एक्का की कहानियां’ और ‘आदिवासी दर्शन और साहित्य’ पुस्तकों का लोकार्पण|url=http://www.lenseye.co/%E0%A4%8F%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82|accessdate=3 जुलाई 2017|date=3 जुलाई 2017}}</ref> उनके प्रथम ग्रेजुएट होने पर जिला स्कूल, रांची में लगा मेधा स्मारक आज भी मौजूद है। बांकीपुर, पटना के टीचर्स ट्रेनिंग स्कूल से बाद में उन्होंने बीएड किया और रांची विश्वविद्यालय, रांची से 1963-64 में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। एलिस का विवाह 8 जून 1947 को सोलोमोन एक्का से हुआ। सोलोमन मूलतः पिस्का नगड़ी, रांची के रहने वाले थे और वे [[उराँव|उरांव]] आदिवासी समुदाय से आते हैं। सोलोमन डिप्टी डायरेक्टर, कृषि विभाग (सोयल कंजरवेशन) के पद से सेवानिवृत्त हुए और 1996 में उनकी मृत्यु हुई। एलिस और सोलोमन के तीन बच्चे हुए - डॉ॰ रेखा टोप्पो, नीला डे और डॉ॰ सिद्धार्थ एक्का। रेखा मेडिकल प्रोफेशन में गई और सेवानिवृति के बाद बोकारो में रह रही हैं। एकमात्रा बेटा सिद्धार्थ गोस्सनर कॉलेज, रांची के प्राचार्य हैं।<ref name="ReferenceB">वंदना टेटे, एलिस एक्का की कहानियां, राधाकृष्ण, [[(राजकमल प्रकाशन)]], नई दिल्ली, 2015</ref> पेशे के रूप में एलिस ने शिक्षकीय जीवन को चुना। गर्वनमेंट गर्ल्स स्कूल पुरुलिया, संत मार्ग्रेट स्कूल, बहु बाजार और चांदमल बाल मंदिर स्कूल, रातू रोड, रांची में उन्होंने समय-समय पर अध्यापन कार्य किया। लेकिन उनकी योग्यता के अनुसार उन्हें अध्यापन का काम तभी मिल पाया जब नवंबर 1971 में [[झारखंड आंदोलन]] के आदिवासी बुद्धिजीवी डॉ. निर्मल मिंज की अगुआई में गोस्सनर कॉलेज की स्थापना हुई। डॉ. मिंज के आमंत्रण पर वे कॉलेज जुड़ीं और 1972 से उन्होंने वहां अंग्रेजी पढ़ाना शुरू किया। जीवन का साथ छोड़ देने से पहले तक वे वहीं अध्यापक रहीं।<ref name="ReferenceB"/> एलिस की मृत्यु 61 वर्ष की उम्र में 5 जुलाई 1978 को गुंगुटोली (बहु बाजार के पास), रांची में हुई। उन्हें कांटाटोली, रांची के सीएनआई कब्रिस्तान में दफनाया गया जबकि उनके पति सोलोमन जीईएल चर्च के कब्रिस्तान में दफनाये गए।<ref name="ReferenceB"/>
सारांश:
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