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== युद्ध का कारण == प्राचीन मिस्र में कई वर्षॆं तक विदेशी [[हिक्सोस]] लोगों ने राज किया पर धीरे धीरे मिस्र के मूल राजाओं की शक्ति बढ़ी और उन्होंने ह्य्क्सोस के राज को हटा दिया और साम्राज्यवाद की नीति अपनाकर अपने पडौसी राज्यों को जीतना शुरू कर दिया। [[मिस्र का अठारहवां वंश|मिस्र के १८ वें वंश के राजाओं]] ने सबसे पहले इस नीति को अपनाया और सबसे पहला मिस्र साम्राज्य खड़ा किया, १८ वें वंश के राजा [[थुतमोस तृतीय]] अपनी दिग्विजिय के कारण काफी प्रसिद्ध हुए। पर बाद में १८ वें वंश के राजा [[अखेनातेन]] के काल में [[मिस्र साम्राज्य]] डगमगाने लगा और उसने अपने कई प्रान्त खो दिए, अखेनातेन ने प्राचीन मिस्र के पारंपरिक धर्म को त्याग कर [[अतेन]] नाम के ईश्वर की पूजा करने लगा और इसे राष्ट्रीय धर्म घोषित कर दिया था जिस कारण मिस्र में अराजकता फ़ैल गई थी। अखेनातेन के बाद उसके पुत्र [[तुथंखमुन]] ने और उसके उत्तराधिकारियों ने मिस्र के खोये हुए गौरव को वापस लाने का काफी प्रयास किया पर वे नाकाम रहे। होरेम्हेब जो १८ वें वंश का आखिरी राजा था उसकी कोई संतान नहीं थी इसीलिए उसने अपने अमात्य [[रामेसेस प्रथम]] को अपना उत्तराधिकारी बनाया और रामेसेस प्रथम ने १९ वें वंश की नीव रखी। रामेसेस प्रथम और उसके पुत्र सेती प्रथम ने भी १८ वें वंश की तरह साम्राज्यवाद की नीति अपनाई और मिस्र के खोये गौरव को लाने का प्रयास किया। कर्नाक मंदिर के लेखोंं के अनुसार सेती प्रथम ने कन्नन और सीरिया पर विजय पाई थी। वही मिस्र के उत्तर में इराक से लेकर तुर्क तक फैला हित्तिते साम्राज्य भी साम्राज्य विस्तार कर रहा था। सिरिया तब १८ वें वंश के अधीन था पर वो हित्तिते साम्राज्य के अधीन चला गया था। मिस्र साम्राज्य के खोये हुए प्रांत को जितने के लिए रामेसेस ने कादेश पर हमला किया जो कि सिरिया का एक नगर था।<ref>Bryce, Trevor, The Kingdom of the Hittites, Oxford University Press, new edition 2005, ISBN 0-19-927908-Xm p.233</ref> रामेसेस के पिता [[सेती प्रथम]] ने अपने काल में [[कादेश]] पर विजय पाई थी, पर सेती प्रथम के शासन काल के अंतिम समय में कादेश दुबारा हित्तिते साम्राज्य के अधीन हो गया। यह भी युद्ध का कारण था।
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