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== इतिहास == खनिज विज्ञान के बारे में आरंभिक लेखन, विशेषकर रत्न आदि के बारे में प्राचीन [[कसदी|बेबीलोनिया]], प्राचीन [[यूनान]]-[[रोम]] साम्राज्यों, प्राचीन [[चीन]] और [[प्राचीन भारत]] के [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में उपलब्ध [[पुराण|पौराणिक]] [[साहित्य]] में मिलता है।<ref name="needham volume 3 637">Needham, Volume 3, 637.</ref> इस विषय पर उपलब्ध पुस्तकों में [[:en:Pliny the Elder|प्लाइनी द एल्डर]] की [[:en:Naturalis Historia|नैचुरैलिस हिस्टोरिया]] है, जिसमें विभिन्न खनिजों का वर्णन ही नहीं किया गया है, वरन उनके कई गुणों का भी ब्यौरा दिया है। [[जर्मन भाषा|जर्मन]] पुनर्जागरण विशेषज्ञ [[जॉर्जियस एग्रिकोला]] ने ''[[:en:De re metallica|डी रे मैटेलिका]]'' (''धातुओं पर'', [[१५५६]]) और ''[[:en:De Natura Fossilium|डी नैच्युरा फॉसिलियम]]'' (''शैलों की प्रकृति पर'', [[१५४६]]) जैसे कई ग्रन्थ दिये हैं, जिनमें इस विषय पर वैज्ञानिक पहलुओं पर विचार किया गया है। यूरोप में [[पुनर्जागरण]] उपरांत के युग में खनिजों और पाषाणों के क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित वैज्ञानिक अध्ययनों का विकास हुआ।<ref name="needham volume 3 636">नीढाम, खण्ड तृतीय, पृ.६३६</ref> खनिज विज्ञान के आधुनिक रूप का आधार [[सत्रहवीं शताब्दी|१७वीं शताब्दी]] में [[सूक्ष्मदर्शी]] यंत्र के आविष्कार [[क्रिस्टलोग्राफी]] के सिद्धांतों और शैलों के अनुभाग काटों के नमूनों का सूक्ष्म अध्ययन पर हुआ।<ref name="needham volume 3 636"/> खनिजों के गुणों का अध्ययन और उनका वर्गीकरण उनकी भौतिक विशेषताओं पर निर्भर करता है। खनिज की कठोरता की जांच के लिए मॉस्केल टेस्ट किया जाता है। किसी खनिज की कठोरता या कोमलता इस बात पर निर्भर करती है कि इसकी आंतरिक संरचना में परमाणुओं का विन्यास कैसा है।
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