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== इतिहास == {{Infobox ethnic group |group = चीन में बौद्ध धर्म |image = |pop = '''1.07 अरब – 1.22 अरब (2010)'''<ref> चीनी बौद्ध जनसंख्या [http://buddhaweekly.com/buddhism-now-2nd-largest-spiritual-path-1-6-billion-22-worlds-population-according-recent-studies/]</ref> <br /> '''चीन की जनसंख्या में 80% – 91%''' |regions = [[शिंजियांग]] के अलावा [[चीन के प्रशासनिक प्रभाग|चीन के सभी प्रशासनिक विभाग]]ों में बहुसंख्यक |langs = [[चीनी भाषा|चीनी]], [[मन्दारिन भाषा|मन्दारिन]], [[चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार|चीनी-तिब्बती]] एवं [[तिब्बती भाषा|तिब्बती]] }} [[चीन की सभ्यता]] विश्व की पुरातनतम सभ्यताओं में से एक है। प्राचीन चीन में बौद्ध धर्म के पहले कई महान राजवंशों का धर्म प्रचलित था। उनमें से एक शा राजवंश था, जो 2070 ईसा पूर्व था। शा वंश से पहले चीन में तीन अधिपतियों और पांच सम्राटों का काल था। पांच सम्राटों में से अंतिम सम्राट शुन था। शुन ने अपनी गद्दी यु महान को सौंपी और उसी से [[शा राजवंश]] सत्ता में आया। इसे [[शिया राजवंश]] भी कहा जाता था जिसके बाद [[शांग राजवंश]] का दौर आया, जो 1600 ईसापूर्व से 1046 ईसापूर्व तक चला। शांग राजवंश के बाद चीन में [[झोऊ राजवंश]] सत्ता में आया। यदि विश्वस्तर पर देखा जाए तो [[गौतम बुद्ध]] के समय में [[चीन]] में [[कन्फ़्यूशियस|कन्फ्यूशियस]] विचार, [[भारत]] में [[वैदिक धर्म|वैदिक]] और बुद्ध के विचार तथा [[ईरान]] में [[ज़रथुश्त्र|जरथुस्त्र]] विचारधारा का बोलबाला था, बाकी दुनिया [[यूनान|ग्रीस]] को छोड़कर लगभग विचारशून्य ही थी। न [[ईसाई धर्म]] था और न [[इस्लाम]]। [[यीशु|ईसा मसीह]] के जन्म के पूर्व [[बौद्ध धर्म]] की गूंज [[यरुशलम|येरुशलम]] तक पहुंच चुकी थी। चीन में [[झोऊ राजवंश]] का काल लंबे समय तक चला। इनके ही काल में [[चीन]] में [[कन्फ़्यूशियस|कन्फ्यूशियस]] के विचार और [[बौद्ध धर्म]] ([[गौतम बुद्ध]]) का विकास हुआ। बाद में [[ताओ धर्म|ताओ वाद]] ([[लाओत्से तुंग]]), [[मोहीवाद]] ([[मोजी]]) और [[न्यायवाद]] ([[हान फेईजी]] और [[ली सी]]) भी खूब फला-फूला। लेकिन इन सभी के बीच [[बौद्ध धर्म]] ने अपनी जड़ें जमाईं और इसने [[चीन]] की भिन्न-भिन्न विचारधाराओं को एक सूत्र में बांध दिया। बौद्ध धर्म के कारण चीन में जातिगत [[एकता]] और [[शक्ति]] का विकास हुआ। इस विचारधारा के फैलने के कारण चीन में दासप्रथा के खात्मे के साथ ही [[छिन राजवंश]] का उदय हुआ। छिन के बाद हान ने 8वीं सदी तक राज्य किया। इन सभी राजवंशों और [[धर्म]] व [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]] के विकास के पूर्व काल में [[चीन]] का नाम हरिवर्ष था। [[भारतीय धर्मग्रंथ]]ों के अनुसार उसे हरिवर्ष कहा जाता था। जम्बूदीप के राजा अग्नीघ्र के 9 पुत्र हुए- नाभि, किम्पुरुष, हरिवर्ष, इलावृत, रम्य, हिरण्यमय, कुरु, भद्राश्व और केतुमाल। राजा अग्नीघ्र ने उन सब पुत्रों को उनके नाम से प्रसिद्ध भूखंड दिया। हरिवर्ष को मिला आज के चीन का भाग, जो प्राचीन भूगोल के अनुसार [[एशिया|जंबूद्वीप]] का एक भाग या वर्ष था। हरिवर्ष का उल्लेख [[जैन धर्म|जैन]]] सूत्रग्रंथ '[[जंबूद्वीप प्रज्ञप्ति]]'
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