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==आदिम-जापानी== इसकी [[आदिम-भाषा]] प्राचीन जापानी की [[आभ्यंतर पुनर्रचना]] और प्राचीन जापानी और रयुक्युवी भाषाएँ की [[तुलनात्मक प्रणाली]] के संयोग से पुनर्रचना की गई है।{{sfnp|Frellesvig|Whitman|2008|p=1}} 20वीं सदी की प्रमुख पुनर्चनाएँ सैम्युएल एल्मो मार्टिन(Samuel Elmo Martin) और शिरो हत्तोरी(Shirō Hattori) द्वारा प्रस्तुत की गई थीं।{{sfnp|Frellesvig|Whitman|2008|p=1}}{{sfnp|Martin|1987}} आदिम-जापानी के शब्द आम तौर पर अनेकाक्षरी(polysyllabic) होते हैं, जिनके अक्षर (C)V के रूप से होते हैं।{{sfnp|Frellesvig|Whitman|2008|p=3}} {|class="wikitable" style=text-align:center |+ आदिम-जापानी व्यंजन |- ! ![[द्वयोष्ठ्य व्यंजन|द्वयोष्ठ्य]] <br /><small>(Bilabial)</small> ![[वर्त्स्य व्यंजन|वर्त्स्य]] <br /><small>(Alveolar)</small> ![[तालव्य व्यंजन|तालव्य]] <br /><small>(Palatal)</small> ![[कण्ठ्य व्यंजन|कण्ठ्य]] <br /><small>(Velar)</small> |- ! [[नासिक्य व्यंजन|नासिक्य]] <br /><small>(Nasal)</small> | {{IPA|*m}} | {{IPA|*n}} | | |- ! [[स्पर्श व्यंजन|स्पर्श]] <br /><small>(Plosive)</small> | {{IPA|*p}} | {{IPA|*t}} | | {{IPA|*k}} |- ! [[संघर्षी व्यंजन|संघर्षी]] <br /><small>(Fricative)</small> | | {{IPA|*s}} | | |- ! [[अन्तस्थ व्यंजन|अन्तस्थ]] <br /><small>(Approximant)</small> | {{IPA|*w}} | | {{IPA|*j}} | |- ! [[तरल स्वन व्यंजन |तरल स्वन]] <br /> <small>(Liquid)</small> | | {{IPA|*r}} | | |} प्राचीन जापानी में घोष व्यंजन "b", "d", "z", "g" जो शामिल थे, जो शब्द-आद्य स्थिति पर कभी आते नहीं थे, वो बीच वाले स्वर के लोप के बाद मौजूद हुए नासिक्य व्यंजन और अघोष व्यंजनों के गुच्छ से पाए हैं।{{sfnp|Whitman|2012|p=27}} अधिकांश लेखक मानते हैं कि आदिम-जापानी में छह स्वर मौजूद थे:{{sfnp|Whitman|2012|p=26}} {| class="wikitable" style=text-align:center |+ आदिम-जापानी स्वर |- ! ![[अग्रस्वर|अग्रस्वर]] ![[मध्यस्वर|मध्यस्वर]] ![[पश्वस्वर|पश्वस्वर]] |- ! [[संवृत स्वर|संवृत]] | {{IPA|*i}} | | {{IPA|*u}} |- ! [[बीच का स्वर|बीच का]] | {{IPA|*e}} | {{IPA|*ə}} | {{IPA|*o}} |- ! [[विवृत स्वर|विवृत]] | | {{IPA|*a}} | |} कुछ लेखक एक संवृत मध्यस्वर {{IPA|*ɨ}} का भी प्रस्ताव करते हैं।{{sfnp|Frellesvig|2010|pp=45–47}}{{sfnp|Vovin|2010|pp=35–36}} बीच के स्वर {{IPA|*e}} और {{IPA|*o}} क्रमशः "i" और "u" तक हर जगह आरोह हुए थे, शब्द-अंत्य के सिवाए।{{sfnp|Frellesvig|Whitman|2008|p=5}}{{sfnp|Frellesvig|2010|p=47}} अन्य प्राचीन जापानी स्वर आदिम-जापानी के स्वर के अनुक्रम से आए थे।{{sfnp|Frellesvig|2010|p=50}} माना जाता है कि एक शाब्दिक [[स्वराघात]] की पुनर्रचना होनी चाहिए, पर उसका सटीक रूप विवादग्रस्त है।{{sfnp|Whitman|2012|p=27}}
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