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== दिगम्बर जैन मुनि == {{मुख्य|दिगम्बर}} [[चित्र:Acharya Gyansagar.jpg|अंगूठाकार|दिगंबर [[ज्ञानसागर (छाणी)|आचार्य, ज्ञानसागर]]]] दिगम्बर का अर्थ होता हैं: "दिशाएं ही जिनका अम्बर (वस्त्र) हों।{{Sfn|Zimmer|1953|p = 210}} दिगम्बर मुनि केवल कमंडल, पिच्छी और शास्त्र ही रख सकते हैं। {{sfn|Singh|2008|p = 316}} [[कुन्दकुन्द|आचार्य कुन्दकुन्द]] इस काल के प्रमुख दिगम्बर आचार्य थे।{{Sfn|Jain|2011|p = vi}} प्रत्येक दिगम्बर मुनि को २८ मूल-गुणों का पालन करना अनिवार्य हैं, यह हैं-{{sfn|प्रमाणसागर|२००८|p=१८९}} {|class="wikitable" |- ! व्रत ! नाम ! अर्थ |- style="background:#ffd70;" |rowspan="5"|'''महाव्रत'''-<br /> तीर्थंकर आदि महापुरुष जिनका पालन करते है |१. [[अहिंसा]] |किसी भी जीव को मन, वचन, काय से पीड़ा नहीं पहुँचाना। |- style="background:#ffd70;" |२. [[सत्य]] | हित, मित, प्रिय वचन बोलना। |- style="background:#ffd70;" |३. [[अस्तेय]] | जो वस्तु नहीं दी जाई उसे ग्रहण नहीं करना। |- style="background:#ffd70;" |४. [[ब्रह्मचर्य]] |मन, वचन, काय से मैथुन कर्म का पूर्ण त्याग करना। |- style="background:#ffd70;" |५. [[अपरिग्रह]] |पदार्थों के प्रति ममत्वरूप परिणमन का पूर्ण त्याग |- style="background:#FFFF00;" |rowspan="5"|'''समिति'''-<br /> प्रवृत्तिगत सावधानी {{sfn|प्रमाणसागर|२००८|p=१८९}} |६.ईर्यासमिति |सावधानी पूर्वक चार हाथ जमीन देखकर चलना |- style="background:#FFFF00;" |७.भाषा समिति | निन्दा व दूषित भाषाओं का त्याग |- style="background:#FFFF00;" |८.एषणासमिति |श्रावक के यहाँ छियालीस दोषों से रहित आहार लेना |- style="background:#FFFF00;" |९.आदाननिक्षेप |धार्मिक उपकरण उठाने रखने में सावधानी |- style="background:#FFFF00;" |१०.प्रतिष्ठापन |निर्जन्तुक स्थान पर मल-मूत्र का त्याग |- style="background:#00ff00;" |rowspan="1"|'''पाँचेंद्रियनिरोध''' |११.१५ |पाँचों इंद्रियों पर नियंत्रण |- style="background:#fff" |rowspan="6"|'''छः आवश्यक'''<br />आवश्यक करने योग्य क्रियाएँ |१६. सामायिक (समता) |समता धारण कर आत्मकेन्द्रित होना |- style="background:#fff;" |१७. स्तुति |२४ [[तीर्थंकर]]ों का स्तवन |- style="background:#fff;" |१८. वंदन |[[जैन धर्म में भगवान|भगवान]] की प्रतिमा और आचार्य को प्रणाम |- style="background:#fff;" |१९.प्रतिक्रमण |ग़लतियों का शोधन |- style="background:#fff;" |२०.प्रत्याख्यान |त्याग |- style="background:#fff;" |२१.[[कायोत्सर्ग]] |देह के ममत्व को त्यागकर आत्म स्वरूप में लीन होना |- style="background:#gold;" |rowspan="7"|अन्य-<br /> '''७ अन्य''' |२२. अस्नान |स्नान नहीं करना |- style="background:#gold;" |२३. अदंतधावन |दातौन नहीं करना |- style="background:#gold;" |२४. भूशयन |चटाई, जमीन पर विश्राम करना |- style="background:#gold;" |२५. एकभुक्ति |दिन में एक बार भोजन |- style="background:#gold;" |२६. स्थितिभोजन | खड़े रहकर दोनो हाथो से आहार लेना |- style="background:#gold;" |२७. [[केश लोंच]] |सिर और दाड़ी के बाल हाथों से उखाड़ना |- style="background:#gold;" |२८. नग्नता | -- |- style="background:#gold;" |} प्रत्येक जैन संत और श्रावक को पांच व्रतों का पालन करना अनिवार्य हैं <ref name="pshah">Pravin Shah, [http://www.fas.harvard.edu/~pluralsm/affiliates/jainism/jainedu/5greatvows.htm Five Great Vows (Maha-vratas) of Jainism] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141231033127/http://www.fas.harvard.edu/~pluralsm/affiliates/jainism/jainedu/5greatvows.htm |date=31 दिसंबर 2014 }} Jainism Literature Center, Harvard University Archives (2009)</ref> === केश लोंच === प्रत्येक जैन मुनि को केश-लोंच करना अनिवार्य हैं। वे नियमित अंतराल पर अपने बालों को अपने हाथों से उखाड़ लेते हैं। जिसकी समयसीमा उत्कृष्ट से 2 माह, मध्यम 3 माह और जघन्य 4 माह होती है।
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