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==उत्पत्ति== तबले का इतिहास सटीक तौर पर नामालूम है और इसकी उत्पत्ति के बारे में कई उपस्थापनायें मौजूद हैं।<ref name="Gottlieb1993p1">{{cite book|author=रॉबर्ट ऍस॰ गौट्लिब|title=Solo Tabla Drumming of North India |trans-title=उत्तर भारतीय एकल तबला वादन |url=https://books.google.com/books?id=f-xk7L_DNcUC&pg=PA1|year=1993|publisher=मोतीलाल बनारसीदास |isbn=978-81-208-1093-8|pages=1–3}}</ref><ref name="Dean2012p104">{{cite book|author=मैट डीन|title=The Drum: A History|tran_stitle=ड्रम: एक इतिहास|url=https://books.google.com/books?id=4CdzdFgfV8YC&pg=PA104|year=2012|publisher=स्केयरक्रो|isbn=978-0-8108-8170-9|page=104|access-date=26 फ़रवरी 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20140101072455/http://books.google.com/books?id=4CdzdFgfV8YC|archive-date=1 जनवरी 2014|url-status=live}}</ref> इसकी उत्पत्ति के सम्बन्ध में वर्णित विचारों को दो समूहों में बाँटा जा सकता है:<ref name="Gottlieb1993p1"/> ===तुर्क-अरब उत्पत्ति=== औपनिवेशिक शासन के दौरान इस परिकल्पना को काफी बलपूर्वक पुरःस्थापित किया गया कि तबले की मूल उत्पत्ति मुस्लिम सेनाओं के साथ चलने वाले जोड़े ड्रम से हुई है; इस स्थापना का मूल अरबी के "तब्ल" शब्द पर आधारित है जिसका अर्थ "ड्रम (ताल वाद्य)" होता है। बाबर द्वारा सेना के साथ ऐसे ड्रम लेकर चलने को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, हालाँकि तुर्क सेनाओं के साथ चलने वाले ये वाद्ययंत्र तबले से कोई समानता नहीं रखते बल्कि "नक्कारा" (भीषण आवाज़ पैदा करने वाले) से समानता रखते हैं।<ref name="Gottlieb1993p1"/> दूसरी स्थापना के मुताबिक़, अलाउद्दीन खिलजी के समय में, अमीर ख़ुसरो ने "आवाज़ बाजा" (बीच में पतला तालवाद्य) को काट कर तबले का रूप देने की बात कही जाती है। हालाँकि, यह भी संभव नहीं लगता क्योंकि उस समय के कोई भी चित्र इस तरह के किसी वाद्य यंत्र का निरूपण नहीं करते। मुस्लिम इतिहासकारों ने भी अपने विवरणों में ऐसे किसी वाद्ययंत्र का उल्लेख नहीं किया है। उदाहरण के लिए, अबुल फैजी ने आईन-ए-अकबरी में तत्कालीन वाद्ययंत्रों की लंबी सूची गिनाई है, लेकिन इसमें तबले का ज़िक्र नहीं है।<ref name="Gottlieb1993p1"/> एक अन्य तीसरे मतानुसार दिल्ली के ख़यात गायक [[सदारंग]] के शिष्य और प्रसिद्ध पखावज वादक रहमान खान के पुत्र, अमीर खुसरो (द्वितीय) ने 1738 ई॰ में पखावज से तबले का आविष्कार किया।<ref>{{cite book|title=Solo Tabla Drumming of North India: Inam Ali Khan ; Keramatullah Khan ; Wajid Hussain|url=https://books.google.com/books?id=f-xk7L_DNcUC&pg=PA122|year=1993|publisher=Motilal Banarsidass Publ.|isbn=978-81-208-1093-8|pages=122–|access-date=26 फ़रवरी 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170227064721/https://books.google.com/books?id=f-xk7L_DNcUC&pg=PA122|archive-date=27 फ़रवरी 2017|url-status=live}}</ref> इससे पहले ख़याल गायन में भी पखावज से संगत की जाती थी। इस सिद्धांत में सत्यता संभावित है क्योंकि उस समय की लघु कलाकृतियों (मिनियेचर पेंटिंग) में तबले से मिलते-जुलते वाद्ययंत्र के प्रमाण मिलते हैं। हालाँकि, इससे यह प्रतीत होता है की इस वाद्ययंत्र की उत्पत्ति भारतीय उपमहादीप के मुस्लिम समुदायों में दिल्ली के आसपास हुई न कि यह अरब देशों से आयातित वाद्ययंत्र है।<ref name="Gottlieb1993p1"/><ref name="Lavezzoli2006p37">{{cite book|author=पीटर लाजौली|title=The Dawn of Indian Music in the West|trans-title=पश्चिम में भारतीय संगीत का उदय|url=https://books.google.com/books?id=OSZKCXtx-wEC&pg=PA37|year=2006|publisher=ब्लूम्सबरी ऐकेडमिक|isbn=978-0-8264-1815-9|pages=37–39|access-date=26 फ़रवरी 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20161213075546/https://books.google.com/books?id=OSZKCXtx-wEC|archive-date=13 दिसंबर 2016|url-status=live}}</ref> नील सोर्रेल और पंडित राम नारायण जैसे संगीतविद पखावज काट कर तबला बनाये जाने की इस किम्वदंती में बहुत सत्यता नहीं देखते।<ref name="SorrellNarayan1980p40"/> ===भारतीय उत्पत्ति === [[File:Five Celestial Musicians LACMA AC1992.254.1-.5.jpg|thumb|upright=1.2|चौथी-पाँचवी सदी की मूर्तियों में विविध वाद्ययंत्र बजाते गंधर्व, जिनमें दो नादवाद्य बजा रहे, हालाँकि ये तबले जैसे नहीं दीखते, अन्य मंदिर उत्कीर्णनों में अवश्य दिखता है।<ref name="Gottlieb1993p2"/><ref>{{cite book|author=ऍस॰ प्रज्ञानंद |title=A historical study of Indian music |trans-title= भारतीय संगीत का एक ऐतिहासिक अध्ययन |url=https://books.google.com/books?id=guXibgtWsNwC|year=1981|publisher=मुंशीराम मनोहरलाल |page=82}}</ref>]] भारतीय उत्पत्ति के सिद्धांत को मानने वाले तबले का मूल भारत में मानते हैं और यह कहते हैं कि मुस्लिम काल में इसने मात्र अरबी नाम ग्रहण कर लिया।<ref name="Dean2012p104"/> भारतीय नाट्यशास्त्र के प्रणेता भरत मुनि के द्वारा ''उर्ध्वक आलिंग्यक'' वाद्यों के वर्णन की बात कही जाती है।<ref name="atoday2014" /> ऐसे ही, हाथ में लेकर बजाये जाने वाले "पुष्कर" नामक तालवाद्यों से तबले की उत्पत्ति बतायी जाती है। "पुष्कर" वाद्य के प्रमाण छठवीं-सातवीं सदी के मंदिर उत्कीर्णनों में, ख़ासतौर पर मुक्तेश्वर और भुवनेश्वर मंदिरों में, प्राप्त होते हैं।<ref name="Dean2012p104"/><ref name="Gottlieb1993p2">{{cite book|author=रॉबर्ट ऍस॰ गौट्लिब|title=Solo Tabla Drumming of North India |trans-title=उत्तर भारतीय एकल तबला वादन |url=https://books.google.com/books?id=f-xk7L_DNcUC&pg=PA1|year=1993|publisher=मोतीलाल बनारसीदास |isbn=978-81-208-1093-8|pages=2–3}}</ref><ref name="Singh2000p135">{{cite book|author=परशुराम सिंह |title=The Guru Granth Sahib: Canon, Meaning and Authority |trans-title= गुरु ग्रंथ साहिव:पंथ, अर्थ और प्राधिकार |url=https://books.google.com/books?id=HMvXAAAAMAAJ|year=2000|publisher=ऑक्स्फ़र्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |isbn=978-0-19-564894-2|pages=135–136}}</ref> इन कलाकृतियों में वादक कलाकार दो या तीन अलग-अलग रखे तालवाद्यों को सामने रख कर बैठे दिखाए गए हैं और उनके हाथों और उँगलियों के निरूपण से वे इन्हें बजाते हुए प्रतीत होते हैं।<ref name="Gottlieb1993p2"/> हालाँकि, इन निरूपणों से यह नहीं पता चलता कि ये वाद्ययंत्र उन्हीं पदार्थों से निर्मित हैं और चर्मवाद्य ही हैं, जैसा की आधुनिक समय का तबला होता है।<ref name="Gottlieb1993p2"/> तबला आज जिन पदार्थों से और जिस रूप में बनाया जाता है, ऐसे वाद्ययंत्रों के निर्माण के लिखित प्रमाण संस्कृत ग्रंथों में उपलब्ध हैं। "तबला"-जैसे वाद्ययंत्र के निर्माण सम्बन्धी सबसे पुरानी जानकारी संस्कृत ''[[नाट्य शास्त्र]]'' में मिलती है।<ref name="Gottlieb1993p2"/> इन तालवाद्यों को बजाने से सम्बंधित विवरण भी नाट्यशास्त्र में मिलती है। वहीं, दक्षिण भारतीय ग्रंथ, उदाहरणार्थ, ''[[शिलप्पदिकारम]]'', जिसकी रचना प्रथम शताब्दी ईसवी मानी जाती है, लगभग तीस ताल वाद्यों का विवरण देता है जिनमें कुछ रस्सियों द्वारा कसे जाने वाले और अन्य शामिल हैं, लेकिन इसमें "तबला" नामक किसी वाद्य का विवरण नहीं है।<ref>{{cite book |author1=ब्रूनों नेट्ल |author2=स्टोन ऍम॰ रथ |author3=जेम्स पोर्टल (et al) |title=The Garland Encyclopedia of World Music |trans-title=विश्व संगीत का हार रूपी ज्ञानकोश |url=https://books.google.com/books?id=ZOlNv8MAXIEC&pg=PA327 |year=1998 |publisher=टेलर & फ्रांसिस |isbn=978-0-8240-4946-1 |page=327 |access-date=26 फ़रवरी 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170418151350/https://books.google.com/books?id=ZOlNv8MAXIEC |archive-date=18 अप्रैल 2017 |url-status=live }}</ref>
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