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== [[अपराध|दंडाभियोग]] तथा स्वत्वाधिकार == बहुधा किसी अपराध से व्यक्तिविशेष को ही हानि पहुँचती है एवं इसके लिये वह [[दीवानी न्यायालय]] में क्षतिपूर्ति की याचना कर सकता है, किंतु सामाजिक शांति एवं अनुशासन की दृष्टि से बहुत से ऐसे भी हें जिनके लिये अपराधी के विरुद्ध [[अपराध|दंडाभियोग]] लाकर उसे [[न्यायालय]] से दंडित करना राज्य का कर्त्तव्य होता है। समाज में शांति कायम रखना शासन का ही दायित्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने प्रति किए गए अपराध के लिये प्रतिपक्षी से स्वयं अपनी इच्छा के अनुसार प्रतिशोध ले तो समाज में अराजकता फैल जायगी और अंतत: सभ्य जीवन लुप्त हो जायगा। इस कारण राज्य की ओर से ही अपराधियों के विरुद्ध गुरुतर दंडाभियोग के मामले लाए जाते हैं एवं अपराध से साक्षात् त्रस्त व्यक्ति केवल साक्षी अथवा निमित्त मात्र रह जाता है। समाज का प्रतीक वह व्यक्ति माना जाता है, जिसमें सार्वभौम सत्ता विराजमान हो। भिन्न-भिन्न देशों में ऐसे सत्ताधारी व्यक्तियों के भिन्न भिन्न नाम होते हैं। यथा, इंग्लैंड में राजा, [[भारत]] में राष्ट्रपति। दंडाभियोग के मामले में प्रथम पक्ष में इन्हीं के नाम होते हैं, यद्यपि अटर्नी जेनरल अथवा डिरेक्टर ऑव पब्लिक प्रोसेक्यूशन भी शासन की ओर से प्रथम पक्ष में हो सकते हैं। दंडाभियोग एवं स्वत्वाधिकार ([[दीवानी]]) के मामलों में यह मौलिक अंतर है कि दंडाभियोग का लक्ष्य होता है दोषी को दंड दिलाना, स्वत्वाधिकर के मामले में वादी का उद्देश्य होता है संपत्ति प्राप्त करना या किसी व्यक्तिगत अधिकार की घोषणा कराना। दंडाभियोग के लिये भिन्न भिन्न रूप में दंड दिए जा सकते हैं। यथा, मृत्यु, आजीवन निर्वासन, कारावास, विरोध (Detention), कोड़े मारना, अर्थदंड, अपराधी की संपत्ति का राजसात्करण (Confiscation) इत्यादि। कभी कभी दंड के साथ साथ अपराधी को अनर्हता (Disqualification) नागरिक अधिकारों की हानि एवं राजनीतिक अधिकारों का अपहरण भी सहना पड़ता है।
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