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दामोदर स्वरूप 'विद्रोही'
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== संक्षिप्त जीवनी == [[शाहजहाँपुर]] जनपद की पुवायाँ [[तहसील]] के ग्राम मुड़िया पवार में प्रतिष्ठित वैश्य [[मुरारी शर्मा|मुरारीलाल गुप्त]] के घर 2 अक्टूबर 1928 को जन्मे दामोदर स्वरूप किशोरावस्था में संघर्षो में घिर गये। बचपन में माँ देवकी चल बसीं, पिता मुरारीलाल<ref>[http://www.livehindustan.com/news/up/analysis/article1-up-election-2012-349-349-211464.html]</ref> [[मुरारी शर्मा]] के छद्म नाम से भूमिगत थे और समूचे देश में अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत के स्वर गूँजने लगे थे। ऐसे में उन्होंने अपना [[उपनाम]] विद्रोही रख लिया और जन-सभाओं में कवितायें सुनाकर राष्ट्र जागरण करने लगे। अभावों के बावजूद एम०ए० तक की उच्च शिक्षा प्राप्त की और परिवार पोषण हेतु शाहजहाँपुर के गान्धी फैजाम कालेज में हिन्दी प्रवक्ता की नौकरी शुरू की किन्तु वहाँ भी स्वाभिमान पर आँच आते ही त्यागपत्र दे दिया। [[कवि सम्मेलन|कवि सम्मेलनीय]] आकाशवृत्ति के सहारे पुनः जीवन प्रारम्भ किया और पूरे चार दशक तक काव्यमंचों पर छाये रहे। कवि सम्मेलनों में भाग लेने के कारण विद्रोही जी प्राय: घर से बाहर ही रहे परन्तु उनके ४ बेटी-बेटों के पालनपोषण में उनकी सुशीला पत्नी रमा का योगदान भी कम नहीं आँका जाना चाहिये जिन्होंने आर्य कन्या महाविद्यालय शाहजहाँपुर में अध्यापन कार्य करके घर की गाड़ी को सुचारु रूप से चलाये रक्खा। [[आपातकाल (भारत)|आपातकाल]] के दौरान हिन्दी काव्य मंच पर जो अकम्पित स्वर समय के सत्य को पूरी सक्षमता के साथ गाते रहे, विद्रोही जी उनमें विशिष्ट थे। "दिल्ली की गद्दी सावधान" नामक अपनी रचना से पूरे देश में चर्चित हुए विद्रोही जी ने आजीवन अपने तेवर की तेजस्विता और व्यक्तित्व की ठसक बरकरार रखी। [[कवि सम्मेलन|कवि-सम्मेलन]] के मंच से तो अस्वस्थता के कारण उन्होंने कई वर्ष पूर्व अपने को अलग हटा लिया था किन्तु अपनी अमोघ प्रभाव वाली अनेकानेक रचनाओं के कारण वह साहित्यिक मित्रमण्डली और साहित्यानुरागियों के मध्य सदैव स्मरण किये जाते रहे, किये जाते रहेंगे। ११ मई २००८ को शाहजहाँपुर में विद्रोही का शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। उनकी शव यात्रा में जनपद के राजनेता, समाजसेवी, कवि साहित्यकार, अधिकारी, गणमान्य नागरिक व जनप्रतिनिधि भारी संख्या में सम्मिलित हुए<ref>[http://article.wn.com/view/WNAT986094a84a347d30902d7a8206da605d/]</ref>।
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