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== रचनाकाल == उपनिषदों के रचनाकाल के सम्बन्ध में विद्वानों का एक मत नहीं है। कुछ उपनिषदों को वेदों की मूल संहिताओं का अंश माना गया है। ये सर्वाधिक प्राचीन हैं। कुछ उपनिषद ‘ब्राह्मण’ और ‘आरण्यक’ ग्रन्थों के अंश माने गये हैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना गया है। उपनिषदों के काल-निर्णय के लिए निम्न मुख्य तथ्यों को आधार माना गया है— # पुरातत्व एवं भौगोलिक परिस्थितियां # पौराणिक अथवा वैदिक ॠषियों के नाम # सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी राजाओं के समयकाल # उपनिषदों में वर्णित खगोलीय विवरण निम्न विद्वानों द्वारा विभिन्न उपनिषदों का रचना काल निम्न क्रम में माना गया है<ref>Ranade 1926, pp. 13–14</ref>- {| | {|class="wikitable" |+ विभिन्न विद्वानों द्वारा वैदिक या उपनिषद काल के लिये विभिन्न निर्धारित समयावधि ! लेखक!! शुरुवात (BC)!!समापन (BC)||विधि |- |लोकमान्य तिलक (Winternitz भी इससे सहमत है)||<center>6000||<center>200||खगोलिय विधि |- |बी. वी. कामेश्वर||<center>2300||<center>2000||खगोलिय विधि |- |मैक्स मूलर||<center>1000||<center>800||भाषाई विश्लेषण |- |रनाडे||<center>1200||<center>600||भाषाई विश्लेषण, वैचारिक सिदान्त, etc |- |राधा कृष्णन||<center>800||<center>600||वैचारिक सिदान्त |} || {|class="wikitable" |+ मुख्य उपनिषदों का रचनाकाल ! डयुसेन (1000 or 800 – 500 BC)!! रनाडे (1200 – 600 BC) !! राधा कृष्णन (800 – 600 BC) |- | '''अत्यंत प्राचीन उपनिषद गद्य शैली में:''' बृहदारण्यक, छान्दोग्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, कौषीतकि, केन<br />'''कविता शैली में:''' केन, कठ, ईश, श्वेताश्वतर, मुण्डक<br />'''बाद के उपनिषद गद्य शैली में:''' प्रश्न, मैत्री, मांडूक्य||'''समूह I:''' बृहदारण्यक, छान्दोग्य<br />'''समूह II:''' ईश, केन<br />'''समूह III:''' ऐतरेय, तैत्तिरीय, कौषीतकि<br />'''समूह IV:''' कठ, मुण्डक, श्वेताश्वतर<br />'''समूह V:''' प्रश्न, मांडूक्य, मैत्राणयी||''बुद्ध काल से पूर्व के:''' ऐतरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केन<br />'''मध्यकालीन:''' केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्य<br />'''सांख्य एवं योग पर अधारित:''' मैत्री, श्वेताश्वतर |} |}</center>
सारांश:
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