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== उद्गम == नैनोतकनीकी के सिद्धान्तों का पहला प्रयोग (मगर इस नाम के गढने से पूर्व) [[केल्टेक|<span title="Caltech">केल्टेक</span>]] में दिसम्बर २९ [[1959|१९५९]], [[अमेरिकन फिसिकल असोसिएशन|<span title="American Physical Association">अमेरिकन फिसिकल असोसिएशन</span>]] के बैठक के दोरान [[रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन|रिच्हर्ड फेइन्मन]] के व्याख्यान, [[दैरस् प्लेंटी ओफ् रूम् एट् द बोटम|<span title="There's Plenty of Room at the Bottom">"दैरस् प्लेंटी ओफ् रूम् एट् द बोटम" (आधार में काफी जगह है)</span>]], में हुआ। फेमन ने एक विधि का उल्लेख किया जिसमें एकल अणुओं और अणुकणिकाओं के प्रकलन हेतु सूक्ष्म यन्त्रों को बनाने का सुझाव है। उन्होंने इस दोरान [[गुरुत्वाकर्षण|<span title="Gravitation">गुरुत्वाकर्षण</span>]] के घटते प्रभाव और [[पृष्ठ तनाव|<span title="surface tension">पृष्ठ तनाव</span>]] और [[वॉन् डर वाल्|<span title="Van der Waals force">वॉन् डर वाल्</span>]] आकर्षण के बढते प्रमुखता का उल्लेख किया। नैनोतकनीक शब्द को गढने का श्रेय [[टोक्यो]] विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नोरिओ तानिगुच्हि ने किया। १९८० में इसकी परिभाषा का बखान गहराई सें [[एरिक ड्रेक्स्लर|<span title="Eric Drexler">एरिक ड्रेक्स्लर</span>]] ने किया, जिन्होंने नैनो स्केल के विज्ञान और यंत्रों को लोकप्रिय बनाया अपने व्याख्यानों से और अपनी किताबें से। नैनोतकनीकी और नैनोविज्ञान १९८० के दशक में इन दो आविश्कारों से हुई: [[गुच्छ (भौतिकी)|<span title="Cluster">गुच्छ</span>]] विज्ञान और [[अवलोकन टनलिंग सूक्ष्मदर्शी यंत्र|<span title="scanning tunneling microscope">अवलोकन टनलिंग सूक्ष्मदर्शी यंत्र</span>]] (STM)। इनकी सहायता से १९८६ मे [[फुल्लरीन्|<span title="Fullerenes">फुल्लरीन्</span>]] का और उसके कुछ साल बाद [[कार्बन]] नैनोट्यूब का। अर्धचालक नैनो क्रिस्टल का संश्लेषण और उस पर अनुसंधान हुआ। इसके कारण कई [[नैनोंट्यूब|<span title="Nanotubes">नैनोंट्यूबों</span>]] का आविश्कार हुआ। [[परमाण्विक बल सूक्ष्मदर्शी यंत्र|<span title="atomic force microscope">परमाण्विक बल सूक्ष्मदर्शी यंत्र</span>]] (AFM) का आविश्कार STM के ५ साल बाद हुआ। [[चित्र:Kohlenstoffnanoroehre Animation.gif|thumb|350px|कार्बन नैनोंट्यूब्स का सजीवन]]
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