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==इतिहास== प्राचीनकाल में मनुष्य द्वारा पौधों का वर्गीकरण उनकी उपयोगिता जैसे भोजन के रूप में, [[तन्तु|रेशे]] प्रदान करने वाले, औषधि प्रदान करने वाले आदि के आधार पर किया गया था लेकिन बाद में पौधों को उनके आकारिकीय लक्षणों (morphological characters) जैसे पादप स्वभाव, बीजपत्रों की संख्या, पुष्पीय भागों की संरचना आदि के आधार पर किया जाने लगा। [[मनु]] ने पादपों की निम्नलिखित श्रेणियाँ बतायीं हैं-<ref>[https://www.biologydiscussion.com/plant-taxonomy/plant-classification/history-of-plant-classification-in-india-5-periods/47594 History of Plant Classification in India: 5 Periods]</ref> *(१) औषधि *(२) वनस्पति *(३) वृक्ष *(४) गुच्छ *(५) गुल्म *(६) तृण *(७) प्रतान *(८) वल्ली [[सुश्रुत]] (800-1000 ईसापूर्व) ने पुष्प-विन्यास के संरचना तथा उनके जीवनकाल के आधार पर पादपों को चार वर्गों में बाँटा है- (१) वनस्पति (२) वृक्ष (३) वीरुध (४) ओषधि : ''तासां स्थावराश्चतुर्विधाः वनस्पतयो, वृक्षाः, वीरुधः, ओषधयः इति। तासु, अपुष्पाः फलवन्तो वनस्पतयः, पुष्पफलवन्तो वृक्षाः, प्रतानवत्यः स्तम्बिन्यश्च वीरुधः, फलपाकनिष्ठा ओषधय इति ॥ सुश्रुत सूत्र १/२॥ पुनः औषधीय पादपों को सुश्रुत ने ३७ गणों में विभक्त किया है। वर्तमान में पौधों के आकारिकीय लक्षणों के साथ-साथ भौगोलिक वितरण, शारीरिक लक्षणों (Anatomical characters), रासायनिक संगठन, आण्विक लक्षणों (molecular characters) आदि को भी वर्गिकी में प्रयुक्त किया जाता है। इस प्रकार पादप वर्गिकी के उपयुक्त आधारों के अनुसार निम्न प्रकार के बिन्दु स्पष्ट हो जाते है - *(1) कोशिका वर्गिकी (Cytotaxonomy) : कोशिकीय संरचना व संगठन के आधार पर *(2) रसायन वर्गिकी (Chemotaxonomy) : रासायनिक संगठन के आधार पर *(3) आण्विक वर्गिकी (molecular taxonomy) : आनुवांशिक पदार्थ के आधार पर वर्गिकी शब्द का प्रयोग सबसे पहले फ्रेन्च वनस्पति शास्त्री ए. पी. डी. केण्डोले (A.P.De. Candolle) ने 1834 में अपनी पुस्तक “Theories elementaire de la botanique” (Theory of Elementary Botany) में किया तथा इसमें वर्गीकरण के सामान्य सिद्धान्तों के अध्ययन के बारे में बताया तथा पादप वर्गिकी को इस प्रकार परिभाषित किया- :“पादप वर्गिकी वनस्पति विज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत पौधों की पहचान, नामकरण एवं वर्गीकरण के बारे में अध्ययन किया जाता है।'' बाद में कैरोलस लिनीयस (Carolus Linnaeus) ने अपनी पुस्तक 'सिस्टेमा नेचुरी' (Systema Naturae) में वर्गीकरणीय विज्ञान (Systematics) शब्द का प्रयोग किया जो ग्रीक भाषा के शब्द Systema से लिया गया है जिसका अर्थ समूहबद्ध करना या साथ-साथ रखना है। अत: स्पष्ट है कि वर्गिकी के अन्तर्गत निम्न कार्य प्रमुखतः सम्पन्न किये जाते है - *(1) जाति को पहचान कर उसका पूरा विवरण प्रस्तुत करना अर्थात् आधारभूत वर्गिकी इकाई (Basic taxonomic unit) को पहचानना। *(2) सजीवों की समानताओं एवं पारस्परिक सम्बन्धों के आधार पर इन आधारभूत इकाईयों का समूहबद्द करने के तरीकों का विकास करना।
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