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== पौराणिक संदर्भ == पुराणों के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी पाप मोचिनी है अर्थात पाप को नष्ट करने वाली। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इसे अर्जुन से कहा है। कथा के अनुसार भगवान अर्जुन से कहते हैं, राजा मान्धाता ने एक समय में [[लोमश|लोमश ऋषि]] से जब पूछा कि प्रभु यह बताएं कि मनुष्य जो जाने अनजाने पाप कर्म करता है उससे कैसे मुक्त हो सकता है।
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