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== इतिहास == पूँजीवाद का इतिहास मनुष्य के इतिहास जितना ही पुराना है; प्राचीन मिस्र, कार्थेज, रोम, बेबिलोनिया और यूनान में व्यक्तिगत संपत्ति और एकाधिकार पर आधारित समाजों का इतिहास मिलता है। [[दासप्रथा (पाश्चात्य)|दासप्रथा]] जैसी निजी स्वामित्व की चरम स्थिति रही है। मध्यकाल में [[यूरोप]] में इसका अधिक विकास हुआ; 21वीं शताब्दी के पश्चात पूँजीवाद ने संसार के अनेक भागों में सामंतशाही और वाणिज्यवाद के बीज बोए। आधुनिक युग के आरंभ में व्यापारिक पूँजीवाद ने अपने विकासक्रम में औद्योगिक पूँजीवाद को जन्म दिया, जिसे पूँजोत्पादन पूँजीवाद (''Mass Production Capitalism'') भी कहा जाता है। पूँजीवादी आर्थिक तंत्र को यूरोप में संस्थागत ढाँचे का रूप सोलहवीं सदी में मिलना आरम्भ हुआ, हालाँकि पूँजीवादी प्रणाली के प्रमाण प्राचीन सभ्यताओं में भी मिलते हैं। [[एडम स्मिथ|ऐडम स्मिथ]] ने अपनी पुस्तक "द वेल्थ ऑफ नेशंस" (१७७६) में प्राकृतिक आधार पर आर्थिक स्वतंत्रता की बात कही है, उसने पूँजीवाद का नाम नहीं लिया है। आर्थिक मामलों में प्राकृतिक स्वतंत्रता को आधार मानकर चलने के संबंध में उसका विश्वास था, जैसा कि अन्य उदारवादियों का भी मत रहा है, कि यदि आर्थिक व्यापार को किसी भी नियंत्रण से मुक्त क्रियान्वित होने दिया जाए, तो इस स्थिति में उत्पादन-वृद्धि अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाएगी, तथा सर्वकल्याणकारी राज्य की स्थापना में सहायता मिलेगी। ऐडम स्मिथ का यह व्यक्तिगत पूँजी और स्वतंत्र उद्योग का उदारवादी मत आधुनिक पूँजीवाद का मेरुदंड हैं। १८ वीं सदी में यूरोप की [[औद्योगिक क्रांति]] के साथ पूँजीवाद को नया बल मिला। उसके प्रभाव से १७७० और १८४० के मध्य आर्थिक और व्यापारिक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। पूर्वकालीन सारी सभ्यताएँ शोषित सर्वहारा के श्रम की नींव पर बनी थी। आधुनिक सभ्यता मानवीय आविष्कारों और यांत्रिक शक्ति द्वारा निर्मित हुई है। यांत्रिक उपकरणों की सहायता से मनुष्य की उत्पादनक्षमता में अत्यधिक वृद्धि हुई और निजी उद्योगों में इस उत्पादन-क्षमता-वृद्धि के उपयोग ने पूँजीवाद के विकास को अत्यधिक बल दिया। पूँजीवादी का सिद्धांत सबसे पहले औद्योगिक क्रांति के फलस्वरुप [[कार्ल मार्क्स]] के सिद्धांत की व्याख्या के संदर्भ में आया। १९ वीं सदी में कुछ [[जर्मन भाषा|जर्मन]] सिंद्धांतकारों ने इस अवधारणा को विकसित करना आरम्भ किया जो कार्ल मार्क्स के [[पूँजी|पूंजी]] और [[ब्याज]] के सिद्धांत से हटकर था। बीसवीं सदी के आरंभ में [[मैक्स वेबर]] ने इस अवधारणा को एक सकारात्मक ढंग से व्याख्यित किया। [[शीतयुद्ध|शीत युद्ध]] के दौरान पूँजीवादी की अवधारणा को लेकर बहुत बहस चली।
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