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==2007 का राजनैतिक संकट== सन 2007 का आम चुनाव विवाद का पात्र बन गए जब [[बांग्लादेश अवामी लीग|अवामी लीग]] और उसके घटक दलों ने राष्ट्रपति [[इयाजुद्दीन अहमद|इयाज़ुद्दीन अहमद]] की सरपरस्ती वाली सामयिक सरकार, जो चुनावों के समय सरकारी कार्य के देखरेख की जिम्मेदार थी, पर [[खालिदा ज़िया]] के पक्ष में पक्षपात के आरोप तले, सरकार के विरोध में प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। [[बांग्लादेश अवामी लीग|अवामी लीग]] की अध्यक्षा [[शेख हसीना]] क्यों यह मांग थी कि [[बांग्लादेश में सामयिक सरकार|सामायिक सरकार]] के प्रमुख राष्ट्रपति [[इयाजुद्दीन अहमद|इयाज़ुद्दीन अहमद]] अपने पद का त्याग करें। तत्पश्चात 3 जनवरी 2007 को उन्होंने यह घोषणा की कि [[बांग्लादेश अवामी लीग|अवामी लीग]] और उसके गठबंधन दल चुनावों का बहिष्कार करेंगे।<ref>{{cite news |last=Habib |first=Haroon |authorlink=Haroon Habib |date=4 January 2007 |title=Polls won't be fair: Hasina |url=http://www.hindu.com/2007/01/04/stories/2007010405671400.htm |newspaper=The Hindu |access-date=28 मई 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121103212117/http://www.hindu.com/2007/01/04/stories/2007010405671400.htm |archive-date=3 नवंबर 2012 |url-status=live }}</ref> उसी महीने, सेना प्रमुख जनरल मोईनुद्दीन अहमद के नेतृत्व में, सेना ने हस्तक्षेप किया और राष्ट्रपति इयाज़ुद्दीन को [[मुख्य सलाहकार]] के अपने पद से त्यागपत्र देने के लिए कहा, एवं उन्हें [[आपातकाल (भारत)|आपातकाल]] की घोषणा भी करने के लिए कहा गया। डॉ [[फ़ख़रुद्दीन अहमद|फखरुद्दीन अहमद]] की मुख्य सलाहकारी में एक नई सेना-नियंत्रित सामयिक सरकार गठित की गई और पूर्व निर्धारित चुनावों को टाल दिया गया। 12 जनवरी 2007 को [[इयाजुद्दीन अहमद|इयाज़ुद्दीन अहमद]] ने [[फ़ख़रुद्दीन अहमद|फकरुद्दीन अहमद]] को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ दिलाई। फकरुद्दीन अहमद की सरकार का सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि रही उनकी स्थापित तंत्र के विरुद्ध भ्रष्टाचार विरोधी अभियान। उनके इस अभियान की जाँच तले करीब 160 वरिष्ठ राजनीतिज्ञों समेत अनेक सरकारी नौकर और सुरक्षा अधिकारियों को आर्थिक अपराधों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।<ref>{{cite journal |last=Abdullah |first=Abir |date=22 March 2007 |title=Corruption has emerged as a great threat |url=http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1601618,00.html |journal=Time Magazine |access-date=28 मई 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130824210804/http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1601618,00.html |archive-date=24 अगस्त 2013 |url-status=live }}</ref> इसके अलावा, इस जांच के जाल में दो प्रमुख राजनीतिक दलों के कई पूर्व मंत्रीगण, जिनमें, पूर्व सलाहकार [[फज़्लुल हक|फज्लुल हक़]], पूर्व प्रधानमंत्री, [[खालिदा ज़िया|खालिदा जिया]] और शेख हसीना भी शामिल थे, भी फसे थे।
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