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बृहस्पतिवार व्रत कथा
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== विधि == सूर्योदय से पहले उठकर स्नान से निवृत्त होकर पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। शुद्ध जल छिड़ककर पूरा घर पवित्र करें। घर के ही किसी पवित्र स्थान पर बृहस्पतिवार की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। तत्पश्चात पीत वर्ण के गन्ध-पुष्प और अक्षत से विधिविधान से पूजन करें। {{citation needed}} इसके बाद निम्न मंत्र से प्रार्थना करें- {{citation needed}} धर्मशास्तार्थतत्वज्ञ ज्ञानविज्ञानपारग। विविधार्तिहराचिन्त्य देवाचार्य नमोऽस्तु ते॥ तत्पश्चात आरती कर व्रतकथा सुनें। इस दिन एक समय ही भोजन किया जाता है। बृहस्पतिवार के व्रत में कन्दलीफल (केले) के वृक्ष की पूजा की जाती है। {{citation needed}}
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