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==प्रकाशन का इतिहास== भारतीय कॉमिक्स उद्योग का आरंभ १९६० के मध्य ही हुआ जब [[द टाइम्स ऑफ इंडिया]] के शीर्ष अखबार ने [[इंद्रजाल कॉमिक्स]] का प्रमोचन कराया। हालाँकि इंडस्ट्री द्वारा भारत में प्रस्तुत किया गया ज्यादातर विषय पश्चिम वर्ग के थे। वहीं गत १९६० के दौर तक कॉमिक्स का लुत्फ संभ्रांत परिवार के बच्चे ही ले पाते थे। लेकिन १९९० के दशक तक इन सभी ने भारतीय बाजार में खुद को स्थापित कर लिया था।[4] मोटे तौर पर भारतीय काॅकॉमिक्स क्रम-विकास को चार चरणों पर बाँटा जा सकता है। लगभग १९५० के दौरान में पश्चिम जगत के सिंडीकेट प्रकाशन अपने स्ट्रिप कॉमिक्स [[द फ़ैन्टम]], [[मैण्ड्रेक]], [[फ्लैश गाॅर्डन]], [[रिप किर्बी]] को भारतीय भाषा में अनुवादित कर पेश किया गया। कॉमिक्स की इस कामयाबी ने लगभग कई प्रकाशकों को इन शीर्षकों को अनुसरण करने पर मजबूर कर दिया। दूसरा चरण विगत १९६० का दशक के आखिर में अमर चित्र कथा (जिसका लगभग तात्पर्य है "अविस्मरणीय चित्रों की कहानियों") आई, जो पूर्ण तौर भारतीय विषयों को लेकर समर्थित थी।[1] १९७० के दशक विभिन्न स्वदेशी कॉमिक्स पश्चिमी सुपरहीरो कॉमिक्स प्रतिद्वंद्विता देखते हुए उतारा गया।[4] ८० के दशक तक में जैसे सुपरहीरो काॅमिक्सों की लहर सी आ गई, जिसके साथ रचनाकारों एवं प्रकाशकों ने पश्चिम वर्ग के सुपरहीरो पीढ़ी की सफलता के लाभ को लेकर एक नई आशा बांधी।[1] हालाँकि, पहले भारतीय सुपरहीरो [[बैतुल द ग्रेट]] की रचना, १९६० के दशक के दरम्यान हो चुकी थी।[3] सन् १९८० के आस-पास, हीरोज ऑफ फेथ नाम की कॉमिक्स की ५.५ करोड़ प्रतियाँ भारत में बिकने का कीर्तिमान है।[4] दर्जनों प्रकाशकों ने इसी मंथन के बीच हर माह सैकड़ों की संख्या में कॉमिक्स कराते, लेकिन ९० के दशक में इस व्यवसाय का स्तर गिरने लगा जब भारत में लोग केबल टेलीविजन, इंटरनेट और दूसरे साधनों के जरीए मनोरंजन जुटाने लगे थे। हालाँकि, अन्य प्रकाशक जैसे [[राज कॉमिक्स]] वं [[डायमंड कॉमिक्स]] तथा [[अमर चित्र कथा]] (सुप्पांदी जैसे किरदार[4]) अपने पाठकों के मध्य फलते-फुलते रहें। इस मंदी के दौर में भी, नई प्रकाशन कंपनियों जैसे [[वर्जिन कॉमिक्स]] [[फेनिल कॉमिक्स]] [[ग्रीन गोल्ड. जुनियर डायमंड]] आदि ने विगत वर्ष पहले बाजार में पैठ जमाने की कोशिश की।[1] वहीं कॉमिक्स प्रकाशकों को भी वर्तमान प्रतिस्पर्धा के दौर में नई रचनाओं को जन्म ना दे पाने का भी आलोचकों की नकारात्मक प्रतिक्रिया सहनी पड़ी।[4] वहीं २००० की शुरुआत में [[वेब कॉमिक्स]] भारत में एक लोकप्रिय माध्यम साबित हुआ। भारतीय वेब कॉमिक्स बड़ी संख्या में पाठकों के बीच मुफ्त मनोरंजन का साधन बना है।<ref>{{cite web|url=http://timesofindia.indiatimes.com/home/sunday-times/deep-focus/Strip-tease-Indian-webcomics-make-a-mark/articleshow/6494318.cms|publisher=''[[The Times of India]]''|title=Strip tease: Indian webcomics make a mark|last=Arora|first=Kim|date=2010-09-05|access-date=16 जुलाई 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160912000438/http://timesofindia.indiatimes.com/home/sunday-times/deep-focus/Strip-tease-Indian-webcomics-make-a-mark/articleshow/6494318.cms|archive-date=12 सितंबर 2016|url-status=live}}</ref> और लगातार देश की युवा वर्ग के मध्य राजनीतिक एवं नारीवाद मुद्दों के बाद अपनी सामाजिक जागरूकता बढ़ा रहें हैं। लोगों में वेब कॉमिक्स पहुँच बनाने में विभिन्न [[सोशल मिडिया]] भी अपना योगदान दे रही है।<ref>{{cite web|url=http://www.hindustantimes.com/books/laughing-through-our-worries-the-indian-web-comics/story-e6RDl58hD3NGVTKiK5IF0K.html|publisher=''[[हिन्दुस्तान टाईम्स]]''|title=Laughing through our worries: The Indian web comics|last=Verma|first=Tarishi|date=2015-04-26|access-date=16 जुलाई 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160803140915/http://www.hindustantimes.com/books/laughing-through-our-worries-the-indian-web-comics/story-e6RDl58hD3NGVTKiK5IF0K.html|archive-date=3 अगस्त 2016|url-status=live}}</ref> इस तरह भारत ने पहली बार फरवरी २०११ में [[काॅन-कॉमिक्स]] की मेजबानी की।<ref>{{cite web |url=http://www.telegraph.co.uk/news/worldnews/asia/india/8257221/India-gets-its-own-Comic-Con.html |title=India gets its own Comic Con |publisher=Telegraph |date= |accessdate=22 December 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120113203235/http://www.telegraph.co.uk/news/worldnews/asia/india/8257221/India-gets-its-own-Comic-Con.html |archive-date=13 जनवरी 2012 |url-status=live }}</ref> साल २०१२ के अनुमान अनुसार, भारतीय काॅमिक्स प्रकाशक उद्योग का कारोबार अब $१०० करोड़ डाॅलर पार कर चुका है।<ref>{{cite web |url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-01-03/social-media/30584208_1_comic-industry-diamond-comics-amar-chitra-katha |title=How social media is boosting comic industry |date=3 January 2012 |accessdate=16 March 2012 |work=[[The Times of India]] |publisher=[[The Times Group]] |archive-date=7 जुलाई 2012 |archive-url=https://archive.today/20120707221259/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-01-03/social-media/30584208_1_comic-industry-diamond-comics-amar-chitra-katha |url-status=dead }}</ref> वहीं भारत में मैंगा तथा एनिमे की बढ़ती लोकप्रियता देखते हुए उन्हीं जापानी मैंगा प्रेरित काॅमिकॉमिक्सकों के जरिए, हिंदू पौराणिक गाथाओं को पौराणिक काॅमिकॉमिक्सप में [[भारत]], [[सिंगापुर]], [[मलेशिया]] एवं [[युरोप]] में बिक्री जारी कर रहा है।<ref>{{cite web |url=http://thediplomat.com/2014/08/japanese-cultural-influence-grows-in-india/ |title=Japanese Cultural Influence Grows in India |access-date=16 जुलाई 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160920100614/http://thediplomat.com/2014/08/japanese-cultural-influence-grows-in-india |archive-date=20 सितंबर 2016 |url-status=live }}</ref>
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