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== जीवनी == [[चित्र:Bhikhari Thakur 02.jpg|right|thumb|300px|भिखारी ठाकुर का जवानी के समय का छायाचित्र]] भिखारी ठाकुर का जन्म १८ दिसम्बर १८८७ को [[बिहार]] के [[सारन जिला|सारन]] जिले के कुतुबपुर (दियारा) गाँव में एक [[नाई]] परिवार में हुआ था।<ref>{{cite web|url=https://www.prabhatkhabar.com/news/khabro%20ki%20khabar/story/530131.html|title=सिंगापुर तक थी भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की धूम|access-date=7 दिसंबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171207140900/https://www.prabhatkhabar.com/news/khabro%20ki%20khabar/story/530131.html|archive-date=7 दिसंबर 2017|url-status=dead}}</ref> उनके पिताजी का नाम '''दल सिंगार ठाकुर''' व माताजी का नाम '''शिवकली देवी''' था। वे जीविकोपार्जन के लिये गाँव छोड़कर [[खड़गपुर]] चले गये। वहाँ उन्होने काफी पैसा कमाया किन्तु वे अपने काम से संतुष्ट नहीं थे। [[राम लीला|रामलीला]] में उनका मन बस गया था। इसके बाद वे [[जगन्नाथ मन्दिर, पुरी|जगन्नाथ पुरी]] चले गये। अपने गाँव आकर उन्होने एक नृत्य मण्डली बनायी और रामलीला खेलने लगे। इसके साथ ही वे गाना गाते एवं सामाजिक कार्यों से भी जुड़े। इसके साथ ही उन्होने [[नाटक]], गीत एवं पुस्तके लिखना भी आरम्भ कर दिया। उनकी पुस्तकों की भाषा बहुत सरल थी जिससे लोग बहुत आकृष्ट हुए। उनकी लिखिइ किताबें [[वाराणसी]], [[हावड़ा]] एवं [[छपरा]] से प्रकाशित हुईं। १० जुलाई सन १९७१ को चौरासी वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
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