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===भारत से बाहर प्रभाव=== एन्टॉनी रीड <ref>'''Anthony Reid''' (1988), Southeast Asia in the Age of Commerce, 1450-1680: The lands below the winds, Yale University Press, ISBN 978-0300047509, pages 137-138</ref> कहते हैं कि [[बर्मा]], [[थाइलैण्ड]], [[कम्बोडिया]], [[जावा]]-[[बाली]] आदि में धर्मशास्त्रों और प्रमुखतः मनुस्मृति, का बड़ा आदर था। इन देशों में इन ग्रन्थों को प्राकृतिक नियम देने वाला ग्रन्थ माना जाता था और राजाओं से अपेक्षा की जाती थी कि वे इनके अनुसार आचरण करेंगे। इन ग्रन्थों का प्रतिलिपिकरण किया गया, अनुवाद किया गया और स्थानीय कानूनों में इनको सम्मिलित कर लिया गया।<ref>Victor Lieberman (2014), Burmese Administrative Cycles, Princeton University Press, ISBN 978-0691612812, pages 66-68; Also see discussion of 13th-century Wagaru Dhamma-sattha / 11th century Manu Dhammathat manuscripts discussion</ref><ref>On Laws of Manu in 14th-century Thailand's Ayuthia kingdom named after Ayodhya, see David Wyatt (2003), Thailand: A Short History, Yale University Press, ISBN 978-0300084757, page 61; Robert Lingat (1973), The Classical Law of India, University of California Press, ISBN 978-0520018983, pages 269-272</ref> 'बाइबल इन इण्डिया' नामक ग्रन्थ में लुई जैकोलिऑट (Louis Jacolliot) लिखते हैं: : '' मनुस्मृति ही वह आधारशिला है जिसके ऊपर [[मिस्र]], [[फारस|परसिया]], [[यूनान|ग्रेसियन]] और [[रोम|रोमन]] कानूनी संहिताओं का निर्माण हुआ। आज भी यूरोप में मनु के प्रभाव का अनुभव किया जा सकता है। : '' (Manu Smriti was the foundation upon which the Egyptian, the Persian, the Grecian and the Roman codes of law were built and that the influence of Manu is still felt in Europe.)<ref>V. Krishna Rao. Expansion of Cultural Imperalism Through Globalisation. Manak Publications. p. 82.</ref>
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