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==जन्म स्थान== महाराणा प्रताप के जन्मस्थान के प्रश्न पर दो धारणाएँ है। पहली महाराणा प्रताप का जन्म [[कुम्भलगढ़ दुर्ग]] में हुआ था क्योंकि महाराणा उदयसिंह एवम जयवंताबाई का विवाह कुंभलगढ़ महल में हुआ। दूसरी धारणा यह है कि उनका जन्म [[पाली]] के राजमहलों में हुआ। '''महाराणा प्रताप की माता का नाम जयवंता बाई था, जो पाली के सोनगरा अखैराज की बेटी थी।''' महाराणा प्रताप का बचपन भील समुदाय के साथ बिता , भीलों के साथ ही वे युद्ध कला सीखते थे , भील अपने पुत्र को किका कहकर पुकारते है इसलिए भील महाराणा को कीका नाम से पुकारते थे।<ref>{{Cite web|url=https://m-hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/history-of-maharana-pratap-in-hindi-115052100030_1.%7D%7D|title=History of Maharana Pratap|last=|first=|date=|website=m-hindi.webdunia.com|language=hi|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=2020-12-07}}</ref> लेखक [[विजय नाहर]] की पुस्तक ''हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप'' के अनुसार जब प्रताप का जन्म हुआ था उस समय उदयसिंह युद्व और असुरक्षा से घिरे हुए थे।<ref>[[विजय नाहर]] (2017) ''"हिंडुआ सूरज मेवाड़ रतन"'', पिंकसिटी पब्लिशर्स, [[राजस्थान]] {{ISBN|9789351867210}}</ref> कुंभलगढ़ किसी तरह से सुरक्षित नही था। [[जोधपुर]] का [[राव मालदेव|राजा मालदेव]] उन दिनों उत्तर भारत मे सबसे शक्तिसम्पन्न था। एवं जयवंता बाई के पिता एवम पाली के शाषक सोनगरा अखेराज मालदेव का एक विश्वसनीय सामन्त एवं सेनानायक था। इस कारण पाली और मारवाड़ हर तरह से सुरक्षित था। अतः जयवंता बाई को पाली भेजा गया। वि. सं. ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया सं 1597 को प्रताप का जन्म पाली मारवाड़ में हुआ। प्रताप के जन्म का शुभ समाचार मिलते ही उदयसिंह की सेना ने प्रयाण प्रारम्भ कर दिया और मावली युद्ध मे बनवीर के विरूद्ध विजय श्री प्राप्त कर चित्तौड़ के सिंहासन पर अपना अधिकार कर लिया।<ref>{{Cite book|author=विजय नाहर|title=हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप|publisher=पिंकसिटी पब्लिशर्स| isbn=978-93-80522-45-6|year=2011|page= 274-278}}</ref><ref>{{cite web|title=महाराणा प्रताप के विषय में भारतीय इतिहास में लिखी भ्रांतियों को दूर करती विजय नाहर की पुस्तक "हिंदुवा सूर्य महाराणा प्रताप" की समीक्षा|url=https://udaipurkiran.in/hindi/1208578/|website=www.udaipurkiran.in|accessdate=9 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190509155336/https://udaipurkiran.in/hindi/1208578/|archive-date=9 मई 2019|url-status=dead}}</ref> भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवत्त अधिकारी देवेंद्र सिंह शक्तावत की पुस्तक ''महाराणा प्रताप के प्रमुख सहयोगी'' के अनुसार महाराणा प्रताप का जन्म स्थान महाराव के गढ़ के अवशेष जूनि कचहरी पाली में विद्यमान है। यहां सोनागरों की कुलदेवी नागनाची का मंदिर आज भी सुरक्षित है। पुस्तक के अनुसार पुरानी परम्पराओं के अनुसार लड़की का पहला पुत्र अपने पीहर में होता है।<ref>{{cite web|title=एक महान वीर योद्धा – जननायक महाराणा प्रताप – MAHARANA PRATAP|url=http://sahityapreetam.com/blog/eka-maha-na-va-ra-ya-tha-thha-janana-yaka-maha-ra-nae-pa-rata-pa-maharana-pratap|website=www.sahityapreetam.com|accessdate=26 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190526095402/http://sahityapreetam.com/blog/eka-maha-na-va-ra-ya-tha-thha-janana-yaka-maha-ra-nae-pa-rata-pa-maharana-pratap|archive-date=26 मई 2019|url-status=dead}}</ref> इतिहासकार अर्जुन सिंह शेखावत के अनुसार महाराणा प्रताप की जन्मपत्रिका पुरानी दिनमान पद्धति से अर्धरात्रि 12/17 से 12/57 के मध्य जन्मसमय से बनी हुई है। 5/51 पलमा पर बनी सूर्योदय 0/0 पर स्पष्ट सूर्य का मालूम होना जरूरी है इससे जन्मकाली इष्ट आ जाती है। यह कुंडली चित्तौड़ या मेवाड़ के किसी स्थान में हुई होती तो प्रातः स्पष्ट सूर्य का राशि अंश कला विक्ला अलग होती। पण्डित द्वारा स्थान कालगणना पुरानी पद्धति से बनी प्रातः सूर्योदय राशि कला विकला पाली के समान है।<ref>{{cite web|title=ननिहाल ही नहीं, प्रताप की जन्मस्थली भी है पाली|url=https://www.bhaskar.com/news/MAT-RAJ-PALI-c-105-300487-NOR.html|website=www.bhaskar.com|accessdate=10 जून 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20190526121308/https://www.bhaskar.com/news/MAT-RAJ-PALI-c-105-300487-NOR.html|archive-date=26 मई 2019|url-status=live}}</ref> डॉ हुकमसिंह भाटी की पुस्तक ''सोनगरा सांचोरा चौहानों का इतिहास'' 1987 एवं इतिहासकार [[मुहता नैणसी]] की पुस्तक [[ख्यात]] ''मारवाड़ रा परगना री विगत'' में भी स्पष्ट है "पाली के सुविख्यात ठाकुर अखेराज सोनगरा की कन्या जैवन्ताबाई ने वि. सं. 1597 जेष्ठ सुदी 3 रविवार को सूर्योदय से 47 घड़ी 13 पल गए एक ऐसे देदीप्यमान बालक को जन्म दिया। धन्य है पाली की यह धरा जिसने प्रताप जैसे रत्न को जन्म दिया।"<ref>{{Cite book|author=हुकमसिंह भाटी|title=सोनगरा सांचोरा चौहानों का इतिहास|url=http://ci.nii.ac.jp/ncid/BB06923259|publisher=राजस्थानी ग्रंथागार|year=1987|page=106|access-date=26 मई 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190526095406/https://ci.nii.ac.jp/ncid/BB06923259|archive-date=26 मई 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite book|author=मुहतां नैणसी|title=मारवाड़ रा परगना री विगत|publisher=राजस्थान प्राच्यविद्या संस्थान, जोधपुर|year=1968|page=486}}</ref> '''वंश वृक्ष''' {{Ahnentafel-compact5|महाराणा प्रताप|[[उदयसिंह द्वितीय|उदय सिंह]]|[[महाराणी जयवंताबाई|जयवंताबाई]]|[[राणा सांगा]]|[[रानी कर्णावती]]|राज सोंगरा चौहान|राय भा}}
सारांश:
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