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==भूमिका== सन १८८७ में ए० ए० माइकेल्सन और ई० डब्ल्यू० मॉर्लि ने मिलकर ईथर में घूमती हुई पृथ्वी का वेग ज्ञात करने का प्रयास इस पूर्वानुमान पर किया कि पृथ्वी के वेग का प्रभाव [[प्रकाश का वेग|प्रकाश के वेग]] पर पड़ता है। किन्तु माइकेल्सन और मॉर्लि प्रकाश के वेग पर पृथ्वी के वेग का कोई भी प्रभाव ज्ञात करने में असफल रहे। इन दोनो वैज्ञानिकों की असफलता ही [[अल्बर्ट आइंस्टीन|आइंस्टाइन]] के [[आपेक्षिकता सिद्धांत]] की जन्मदात्री है। यह प्रयोग बार-बार दोहराया गया क्योंकि यह आपेक्षिकता सिद्धांत के लिये महत्वपूर्ण था (१९०२ से १९०५ तक तथा फिर १९२० के दशक में की गयी प्रयोगों की शृंखला)। इस प्रयोग में माइकेल्सन ने स्वनिर्मित व्यतिकरणमापी का उपयोग किया था (देखें, [[माइकेल्सन व्यतिकरणमापी]]।
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