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==प्रकार== मुक्तक काव्य से तात्पर्य है ऐसे काव्य जो किसी एक प्रसंगवश लिखे गये हो। रामायण, महाभारत या रघुवंश आदि काव्य में अनेक प्रसंग है, ये काव्य कथाओं से ओत-प्रोत हैं, जिसमें अनेक भाव तथा अनेक रस है। परन्तु मुक्तक काव्य किसी एक प्रसंग, एक भाव तथा एक ही रस से निहित एक मात्र पद्य होता है। मुक्तक में एक पद्य अवश्य होता है पुनरपि मुक्तक के विकास ने इसमें कुछ और विशेषता भी सम्मिलित की है। हालांकि [[दण्डी]] आदि आचार्यों ने ऐसी रचना को मुक्तक नहीं स्वीकार किया है। परन्तु देखा जाये तो यह सभी मुक्तक के ही प्रकार है। मुक्तक काव्य के अन्तर्गत हम इन अधोलिखित सभी काव्यों प्रकारों का ग्रहण कर सकते हैं- 1. '''मुक्तक'''- प्रसंगवश किसी एक रस से निहित पद्य जो अपने आप में पूर्ण हो। 2. '''संदानिक'''- दो मुक्तक पद्य जो परस्पर सम्बन्ध रखते हो। 3. '''विशेषक'''- तीन मुक्तक पद्य जो परस्पर सम्बन्ध रखते हो। 4. '''कुलक'''- चार मुक्तक पद्य जो परस्पर सम्बन्ध रखते हो। 5. '''संघात'''- किसी एक प्रसंग पर रचित एक ही कवि के कुछ मुक्तक पद्य। 6. '''शतक'''- विभिन्न प्रसंगो पर रचित एक ही कवि के लगभग १०० मुक्तक पद्य। 7. '''खण्डकाव्य'''- यह जीवन के किसी एक अंश पर निर्भर होता है अर्थात् यह भी प्रसंगवश रचना है परन्तु इसमें महाकाव्यों के समान निबद्धता प्रतीत होती है। 8. '''कोश'''- विभिन्न कवियों द्वारा रचित मुक्तक पद्यों का संग्रह। 9. '''सहिंता'''- इसमें ऐसे मुक्तक होते है जो अनेक वृतांत कहते है। 10. '''गीतिकाव्य'''- ऐसे मुक्तक जिनका गायन के साथ अभिनय भी किया जा सकें। अतः इस प्रकार ये सभी मुक्तक काव्य की विकसित परम्परा मात्र ही है।
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