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== आरंभिक जीवन == आपका जन्म [[भीलवाड़ा जिला|भीलवाड़ा जिले]] ([[राजस्थान]]) के रूपाहेली नामक ग्राम में हुआ था। पिता बृद्धिसिंघ ने आपका नाम किसनसिंह रखा था<ref>{{Cite web |url=http://books.google.com/books?id=kUz9o-EKTpwC&pg=PA110&lpg=PA110&dq=%27muni+jinavijaya%27&source=bl&ots=SVANv4CQkt&sig=yV1TkT-_jnTIK7pEd_BbDxy3Ca0&hl=en&sa=X&ei=IUhwUrqIMOrViwLi1YBI&ved=0CEAQ6AEwBw#v=onepage&q=%27muni%20jinavijaya%27&f=false |title=वैली, क्रिस्टी (२००४) ''दी ए टू ज़ी ऑफ़ जैनिज़्म'' पृष्ठ ११० प्रकाशक: स्केरक्रो प्रेस आई॰ एस॰ बी॰ एन॰ ९७८-०-८१०८-६८२१-२ |access-date=2 नवंबर 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140101200642/http://books.google.com/books?id=kUz9o-EKTpwC&pg=PA110&lpg=PA110&dq='muni+jinavijaya'&source=bl&ots=SVANv4CQkt&sig=yV1TkT-_jnTIK7pEd_BbDxy3Ca0&hl=en&sa=X&ei=IUhwUrqIMOrViwLi1YBI&ved=0CEAQ6AEwBw#v=onepage&q=%27muni%20jinavijaya%27&f=false |archive-date=1 जनवरी 2014 |url-status=live }}</ref>। १८९९ में पिता की मृत्यु के पश्चात आप स्थानकवासी साधुओं के साथ निवास करने लगे। १९०३ में आपने साधु वेश धारण किया परन्तु ज्ञान विकास अभाव के कारण आपने आपने सात वर्ष पश्चात यतिवेश त्याग दिया। १९१० में आपने श्वेताम्बर मूर्तिपूजक सम्प्रदाय से दीक्षा ग्रहण की और आपका नाम जिनविजय रखा गया<ref>दलसुख मालवाणिया (१९७१) जिनविजय मुनि अभिनन्दन ग्रन्थ, प्रकाशक: श्री मुनि जिनविजय सम्मान समिति, जयपुर पृष्ठ १-५</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.apnimaati.com/2012/10/blog-post_353.html |title=अपनी माटी (अक्टूबर २०१०) नटवर त्रिपाठी-जीवनी:पीछे मुड़कर देखा तो मुनि जिनविजय याद आये |access-date=2 नवंबर 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131104062446/http://www.apnimaati.com/2012/10/blog-post_353.html |archive-date=4 नवंबर 2013 |url-status=dead }}</ref>।
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