सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
यूनानी दर्शन
" (अनुभाग) सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
== परिचय == यूनानी दर्शन को तीन भागों में विभक्त किया जाता है। पहला भाग उन लोगों के विचार हैं जो यूनानी थे, परंतु यूनान के बाहर यूनानी बस्तियों में रहते थे। सोफिस्ट संप्रदाय के विचारकों और सुकरात के साथ एथंस दर्शनशास्त्र की राजधानी बना। सुकरात, प्लेटो और अरस्तू ने यूनानी दर्शन को इसकी प्रौढ़ता प्रदान की और पश्चिमी विचारधारा पर न मिटनेवाली छाप लगा दी। अरस्तू के बाद, प्राचीन दर्शन नीचे की ओर लुढ़कने लगा। स्वतंत्र विचारों के स्थान में, प्लेटो और अरस्तू की व्यवस्था ही विवेचन का लक्ष्य बन गई। यूनानी दर्शन का जन्म आइओनिया में हुआ। थेल्स (624-550 ई.पू.) एनैक्सिमैंडर (611-547 ई.पू.) और ऐनेक्सिमिनिज़ (588-524 ई.पू.) ने सृष्टि के मूल तत्व के विषय में अपने विचार प्रकट किए। तीनों की धारणा एक ही थी कि मूल तत्व एक है और भौतिक है। थेल्स ने जल को, एनैक्सिमेंडर ने अव्यक्त प्रकृति को और एनेक्सिमिनिज़ ने वायु को मूल तत्व का पद दिया। प्रत्येक भौतिक पदार्थ में गुण और मात्रा प्रत्यक्ष दिखते हैं। आइओनिया के विचारकों ने गुण पर ध्यान दिया और मात्रा की उपेक्षा की। पाइथेगारस ने मात्रा को सत्ता का तत्व समझा। मात्रा की जाँच इकाई की नींव पर होती है और यह संख्या का आधार है। पाइथेगोरस के अनुसार संख्या सत्ता का तत्व है। इस तरह उसने अमूर्त को दार्शनिक विवेचन में प्रविष्ट कर दिया। पाइथेगोरस के विचारानुसार सृष्टि में अनुरूपता और सामंजस्य हर ओर दिखते हैं। यह अनुरूपता गायन में प्रसिद्ध होती है, संख्या की तुल्यता राग की जान है। नक्षत्र अपनी गति में मधुर ध्वनि उत्पन्न करते हैं, यद्यपि हम उसे सुन नहीं सकते, क्योंकि उसकी तीव्रता हमारी श्रवणशक्ति की सीमाओं में नहीं आती। सुकरात से पर्व के दर्शन में एक महत्वपूर्ण विवाद पार्मेनाइडीस और हिरेक्लिटस ने प्रस्तुत कर दिया। पार्मेनाइडीस ने गुण की तरह मात्रा की भी उपेक्षा की और स्वयं सत्ता या "सत्" को मूल तत्व के रूप में देखा। यह "सत्" एकरस निरपेक्ष है, इसमें कोई पविर्तन नहीं होता, यह अनंत है, अविभाज्य है, देश और काल से असंबद्ध है। "असत्" में इन सब गुणों का अभाव है। उद्भव "सत्" और "असत्" का मेल है। हिरेक्लिट्स न कहा कि परिवर्तन सत्ता का तत्व है, सत्ता उद्भव के अतिरिक्त कुछ नहीं। इन दोनों विचारकों ने "सत्" और "प्रकाशन" के प्रत्ययों को दार्शनिक विवेचन में केंद्रीय प्रश्न बना दिया। हिरैक्लिटस के प्रवाहवाद के विरोध में, पार्मेनाइडीस के शिष्य जीनो ने यह बताना चाहा कि गति या परिवर्तन की तो संभावना ही नहीं, तीर प्रति क्षण किसी न किसी बिंदु पर स्थित है, दो बिंदुओं पर एक साथ तो हो नहीं सकता। प्राचीन दशर्न के प्रथम युग में दो और नामों का महत्व है। डिमाक्राइटस (460-361 ई.पू.) ने कहा कि पदार्थों में गुणभेद उन परमाणुओं के परिमाण, आकार और स्थान पर निर्भर है, जिनके संयोग से पदार्थ बनते हैं। एक तरह से, डिमाक्राइटस का परमाणुवाद सद्वाद और प्रवाहवाद का समन्वय था : परमाणु सत् हैं, उनके संयोग से प्रवाह व्यक्त हाता है। एनैक्सेगोरस ने कहा कि अचेतन प्रकृति सृष्टि की व्यवस्था का समाधान नहीं कर सकती; इस समाधान के लिए चेतना की आवश्यकता है। सृष्टि विवेचन में चेतना का अनिष्ट होना एक महत्वपूर्ण परिवर्तन था। पीछे अरस्तू ने तो कहा कि मदिरा पिए हुए लोगों में एनेक्सेगोरस ही सावधान था। यूनानी दर्शन के प्रथम भाग ने निम्नांकित प्रत्ययों को विचारकों के सम्मुख रख दिया- 1. सृष्टि का मूल तत्व, 2. सत् और उद्भव, सत्ता और प्रकाशन 3. रचना में चेतना का स्थान स्पष्ट है कि उत्तरकालीन विवेचन इनमें से किसी प्रत्यय की उपेक्षा नहीं कर सका।
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)