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राजा गिरधरदास खण्डेला
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==जीवन== गिरधरदास खण्डेला के राजा रायसल दरबारी के कनिष्ठ पुत्र थे, लेकिन योग्यता व पिता के आज्ञाकारी होने के चलते उत्तराधिकारी के रूप में पिता के निधन के बाद वि.स.1678 में खण्डेला के राजा बने। उल्लेखनीय है कि राजा रायसल के निधन कब कहाँ हुआ, यह इतिहास में रहस्य बना हुआ है लेकिन [[जहाँगीर नामा|जहाँगीरनामा]] के उल्लेख, केसरी सिंह समर व कुछ ताम्रपत्रों के अध्ययन से विद्वान इतिहासकार राजा रायसल की मृत्यु वि.स.1678 में मानते है। राजा गिरधरदास के छः रानियाँ तथा छ: पुत्र व चार पुत्रियाँ थी।
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