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== प्रारंभिक जीवन == राजेन्द्र बाबू का जन्म 3 दिसम्बर 1884 को [[बिहार]] के तत्कालीन [[सारण जिला|सारण जिले]] (अब [[सीवान जिला|सीवान]]) के [[जीरादेई]] नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता महादेव सहाय [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] एवं [[फ़ारसी भाषा|फारसी]] के विद्वान थे एवं उनकी माता कमलेश्वरी देवी एक धर्मपरायण महिला थीं।<ref>{{Cite web |url=http://books.google.co.in/books?id=r2C2InxI0xAC&pg=PA1&dq=rajendra+prasad&hl=en&ei=cPqZTY3tKpHprQf_69X9Cw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CDUQ6AEwADgK#v=onepage&q&f=false |title=Presidents of India, 1950-2003 - Janak Raj Jai - Google Books<!-- Bot generated title --> |access-date=29 मई 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121104172515/http://books.google.co.in/books?id=r2C2InxI0xAC&pg=PA1&dq=rajendra+prasad&hl=en&ei=cPqZTY3tKpHprQf_69X9Cw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CDUQ6AEwADgK#v=onepage&q&f=false |archive-date=4 नवंबर 2012 |url-status=live }}</ref> राजेन्द्र प्रसाद के पूर्वज मूलरूप से कुआँगाँव, [[अमोढ़ा]] ([[उत्तर प्रदेश]]) के निवासी थे। यह एक [[कायस्थ]] परिवार था। कुछ कायस्थ परिवार इस स्थान को छोड़ कर [[बलिया]] जा बसे थे। कुछ परिवारों को बलिया भी रास नहीं आया इसलिये वे वहाँ से बिहार के जिला सारण (अब सीवान) के एक गाँव [[जीरादेई]] में जा बसे। इन परिवारों में कुछ शिक्षित लोग भी थे। इन्हीं परिवारों में राजेन्द्र प्रसाद के पूर्वजों का परिवार भी था। जीरादेई के पास ही एक छोटी सी रियासत थी - हथुआ। चूँकि '''राजेन्द्र बाबू''' के दादा पढ़े-लिखे थे, अतः उन्हें हथुआ रियासत की दीवानी मिल गई। पच्चीस-तीस सालों तक वे उस रियासत के दीवान रहे। उन्होंने स्वयं भी कुछ जमीन खरीद ली थी। राजेन्द्र बाबू के पिता महादेव सहाय इस जमींदारी की देखभाल करते थे। राजेन्द्र बाबू के चाचा जगदेव सहाय भी घर पर ही रहकर जमींदारी का काम देखते थे। अपने पाँच भाई-बहनों में वे सबसे छोटे थे इसलिए पूरे परिवार में सबके प्यारे थे। उनके चाचा के चूँकि कोई संतान नहीं थी इसलिए वे राजेन्द्र प्रसाद को अपने पुत्र की भाँति ही समझते थे। दादा, पिता और चाचा के लाड़-प्यार में ही राजेन्द्र बाबू का पालन-पोषण हुआ। दादी और माँ का भी उन पर पूर्ण प्रेम बरसता था। बचपन में राजेन्द्र बाबू जल्दी सो जाते थे और सुबह जल्दी उठ जाते थे। उठते ही माँ को भी जगा दिया करते और फिर उन्हें सोने ही नहीं देते थे। अतएव माँ भी उन्हें प्रभाती के साथ-साथ [[रामायण]] [[महाभारत]] की कहानियाँ और भजन कीर्तन आदि रोजाना सुनाती थीं। पाँच वर्ष की उम्र में ही राजेन्द्र बाबू ने एक मौलवी साहब से [[फ़ारसी भाषा|फारसी]] में शिक्षा शुरू किया। उसके बाद वे अपनी प्रारंभिक शिक्षा के लिए [[छपरा]] के जिला स्कूल गए। राजेन्द्र बाबू का [[विवाह]] उस समय की परिपाटी के अनुसार बाल्यकाल में ही, लगभग 13 वर्ष की उम्र में, राजवंशी देवी से हो गया। विवाह के बाद भी उन्होंने [[पटना]] की टी० के० घोष अकादमी से अपनी पढाई जारी रखी। उनका वैवाहिक जीवन बहुत सुखी रहा और उससे उनके अध्ययन अथवा अन्य कार्यों में कोई रुकावट नहीं पड़ी। लेकिन वे जल्द ही जिला स्कूल [[छपरा]] चले गये और वहीं से 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने [[कलकत्ता विश्वविद्यालय|कोलकाता विश्वविद्यालय]] की प्रवेश परीक्षा दी। उस प्रवेश परीक्षा में उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था।.<ref>{{Cite web |url=http://books.google.co.in/books?id=r2C2InxI0xAC&pg=PA1&dq=rajendra+prasad&hl=en&ei=cPqZTY3tKpHprQf_69X9Cw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CDUQ6AEwADgK#v=onepage&q&f=false |title=Presidents of India, 1950-2003 - Janak Raj Jai - Google Books<!-- Bot generated title --> |access-date=29 मई 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121104172515/http://books.google.co.in/books?id=r2C2InxI0xAC&pg=PA1&dq=rajendra+prasad&hl=en&ei=cPqZTY3tKpHprQf_69X9Cw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CDUQ6AEwADgK#v=onepage&q&f=false |archive-date=4 नवंबर 2012 |url-status=live }}</ref> सन् 1902 में उन्होंने [[कोलकाता]] के प्रसिद्ध [[प्रेसिडेन्सी विश्वविद्यालय|प्रेसिडेंसी कॉलेज]] में दाखिला लिया। उनकी प्रतिभा ने [[गोपाल कृष्ण गोखले]] तथा ''बिहार-विभूति'' [[अनुग्रह नारायण सिंह|अनुग्रह नारायण सिन्हा]] जैसे विद्वानों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। 1915 में उन्होंने स्वर्ण पद के साथ विधि परास्नातक (एलएलएम) की परीक्षा पास की और बाद में लॉ के क्षेत्र में ही उन्होंने डॉक्ट्रेट की उपाधि भी हासिल की। राजेन्द्र बाबू कानून की अपनी पढाई का अभ्यास [[भागलपुर]], [[बिहार]] में किया करते थे।]]<ref>{{Cite web |url=http://books.google.co.in/books?id=XsynRkUMJT4C&printsec=frontcover&dq=rajendra+prasad&hl=en&ei=1KKZTYa8PIL5cbrtmJIH&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=8&ved=0CFIQ6AEwBzgU#v=onepage&q&f=false |title=राजेंद्र बाबू: पत्रों के आईने में - Rajendra Prasad, Tara Sinha - Google Books<!-- Bot generated title --> |access-date=29 मई 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131103135902/http://books.google.co.in/books?id=XsynRkUMJT4C&printsec=frontcover&dq=rajendra+prasad&hl=en&ei=1KKZTYa8PIL5cbrtmJIH&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=8&ved=0CFIQ6AEwBzgU#v=onepage&q&f=false |archive-date=3 नवंबर 2013 |url-status=live }}</ref>
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