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== इतिहास == [[द्वितीय विश्वयुद्ध|द्वितीय महायुद्ध]] में रिपोर्ताज की विधा पाश्चात्य साहित्य में बहुत लोकप्रिय हुई। विशेषकर [[रूसी भाषा|रूसी]] तथा अंग्रेजी साहित्य में इसका प्रचलन रहा। हिन्दी साहित्य में विदेशी साहित्य के प्रभाव से रिपोर्ताज लिखने की शैली अधिक परिपक्व नहीं हो पाई है। शनैः-शनैः इस विधा में परिष्कार हो रहा है। सर्वश्री [[प्रकाशचन्द्र गुप्त]], [[रांगेय राघव]], [[प्रभाकर माचवे]] तथा [[अमृत राय|अमृतराय]] आदि ने रोचक रिपोर्ताज लिखे हैं। पर हिन्दी में साहित्यिक, श्रेष्ठ रिपोर्ताज लिखे जाने की पूरी संभावनाएँ हैं। [[श्रेणी:हिन्दी]] [[श्रेणी:साहित्य]] [[श्रेणी:रिपोर्ताज]] [[श्रेणी:गद्य]]
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