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== इतिहास == रॉकेट का इतिहास १३वी सदी से प्रारंभ होता है। [[चीन]] में राकेट विद्या का विकास बहुत तेज़ी से हुआ और जल्दी ही इसका प्रयोग अस्त्र के रूप में किया जाने लगा।<ref>{{cite book | last = क्रॉसबाय| first = अल्फ्रेड डब्ल्यु | title = थ्रोविंग फायर: प्रोजेक्टाइल टेक्नोलॉजी थ्रू हिस्ट्री| year = 2002 | publisher = कॅम्ब्रिज युनिवर्सिटी प्रेस| location = कॅम्ब्रिज | isbn = 0521791588 | pages = १००-१०३}}</ref> [[मंगोल]] लड़ाकों के द्वारा रॉकेट तकनीक [[यूरोप]] पहुँची और फिर विभिन्न शासकों द्वारा यूरोप और एशिया के अन्य भागों में प्रचलित हुई। सन १७९२ में [[मैसूर]] के शासक [[टीपू सुल्तान]] ने अंग्रेज सेना के विरुद्ध [[लोहा|लोहे]] के बने रॉकेटों का प्रयोग किया। इस युद्ध के बाद [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी|अंग्रेज सेना]] ने रॉकेट के महत्त्व को समझा और इसकी तकनीक को विकसित कर विश्व भर में इसका प्रचार किया।<ref>[http://www.tigerandthistle.net/tipu312.htm टीपू की जीवनी] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070929195356/http://www.tigerandthistle.net/tipu312.htm |date=29 सितंबर 2007 }}, मैसूर का इतिहास</ref> <!-- संपादन अपेक्षित == भारतीय रॉकेट == [[भारत]] ने कई रॉकेट विकसित किए हैं। इनमें से अधिकांश उपग्रह प्रक्षेपण यान यानि ''सैटेलाइट लॉन्च वहीकल'' (एस.एल.वी) थे। पहला उप-कक्षीय भारतीय रॉकेट [[२१ नवंबर]], [[१९६३]] को प्रक्षेपित किय़ा गया था। प्रथम एस.एल.वी. का प्रयोगात्मक प्रक्षेपण [[१० अगस्त]], [[१९७९]] को किया गया था। ग्यारह महीने बाद [[१८ जुलाई]], [[१९८०]] को भारत ने अपना प्रथम उपग्रह रोहिणी-१ श्रीहरिकोटा से एक एस.एल.वी पर प्रक्षेपित किय़ा था। [[२४ मार्च]], [[१९८७]] को ऑग्मेन्टेड एस.एल.वी (ए.एस.एल.ई) का आरंभ हुआ। उसके बाद [[सितंबर]], [[१९९३]] में ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पी.एस.एल.वी) का आरंभ हुआ। [[२८ मार्च]], [[२००१]] को ''जियोसिंक्रोनस'' एस.एल.वी (जी.एस.एल.वी) श्रेणी के रॉकेटों का आरंभ हुआ। ये रॉकेट भू-सतह से २२,३०० मील ऊपर पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह को स्थापित करने की क्षमता रखते थे।<ref name = " ">[http://www.spacetoday.org/India/IndiaSpaceRockets.html भारतीय अंतरिक्ष रॉकेट] स्पेस टुडे पर</ref>-->
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