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==भारतीय विदेश मन्त्रालय का संगठन== स्वतन्त्रता पूर्व ब्रिटिश भारतीय सरकार का एक विदेश विभाग था। इसका सर्वप्रथम निर्माण [[वारेन हेस्टिंग्स]] के काल में 1784 में किया गया था। 1842 तक यह गुप्त और राजनीतिक विभाग (Secret and Political Department) के नाम से जाना जाता था, बाद में इसे विदेश विभाग (Foreign Department) कहा जाने लगा। इसके तीन उप विभाग थे- विदेश, राजनीतिक और गृह। 1914 के पश्चात् यह विदेश और राजनीतिक विभाग (Foreign and Political Department) कहलाने लगा। 1935 के अधिनियम के परिणामस्वरूप बढ़े हुये कार्यों के कारण विदेश और राजनीतिक विभागों को अलग स्वतन्त्र विभागों में कर दिया गया। 1945 में इस विभाग को नवीन नाम दिया गया “विदेश विभाग और राष्ट्रमण्डलीय सम्बन्ध विभाग“। 1946 को अन्तरिम सरकार का कार्यभार संभालने पर नेहरू ने इस विभाग का निर्देशन अपने हाथों में लिया। मार्च 1949 में मन्त्रालय के इन दो विभागों को एक कर दिया गया तथा इसे '''विदेश मंत्रालय''' का नाम दिया गया, जिस नाम से यह आज भी जाना जाता है। विदेश विभाग के मूल रूप से पांच कार्य माने गये हैं- *(१) अपने देश के विदेशों के साथ सम्बन्ध, *(२) अन्तर्राष्ट्रीय संधियों का क्रियान्वयन, *(३) अपने देश के नागरिकों की सुरक्षा तथा विदेशों में राष्ट्रीय हितों की रक्षा, *(४) अपने देश व पर देश के नागरिकों के आने जाने पर नियन्त्रण और, *(५) व्यापार व वाणिज्य हितों की रक्षा। इन कार्यों की पूर्ति के लिये विदेश विभाग सूचनायें एकत्रित करता है, उनका अध्ययन कर विदेश मन्त्री तथा मन्त्रिमण्डल को परामर्श देता है। विदेश विभाग आर्थिक क्षेत्र में विभिन्न देशों के साथ सम्बन्ध, देश की सुरक्षा के लिये खतरों से बचाव का परामर्श तथा सांस्कृतिक और प्रचार कार्य में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
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