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== परिचय == [[अमरीका]] के प्रसिद्ध विधिशास्त्री [[डीन रस्को पउंड]] ने अपनी पुस्तक "फिलासफी ऑव ला" की भूमिका में विधि की व्याख्या करते हुए कहा है कि विधि के संबंध में कम से कम 12 विभिन्न प्रकार की व्याख्याएँ की जाती हैं। :(1) कुछ लोग विधि को ईश्वरप्रदत्त मानते हैं। इस श्रेणी में हजरत मूसा, दस निदेश, हम्मूराबी और मनुसंहिताओं को रखा जा सकता है। :(2) कुछ अन्य लोग विधि का परंपराजन्य मानते हैं और उन परंपराओं की रक्षा का भार अभिजात्य वर्ग अथवा पुरोहित वर्ग पर रहता है। :(3) कुछ लोग विधि को विवेकजन्य मानते हैं। ई. पू. चौथी शताब्दी में एथेंस में डेमोस्थनीज (Demosthenes) ने विधि की इसी प्रकार व्याख्या की थी। :(4) विधि प्राकृतिक नियमों के आधार पर विकसित होती है जिसका विकास परंपरा, विवेक और दार्शनिक सिद्धांतों के योग से होता है। :(5) विधि नीति अनीति संबंधी शाश्वत नियमों का रूप है। :(6) विधि संगठित समाज के राजनीतिक अधिकारों और नियमों का वह रूप है जिसे समाज में लोग परस्पर एक दूसरे के लिए स्वीकार करते हैं। :(7) विधि ईश्वरीय न्याय है जिसका आभास ब्रह्मांड के प्राकृतिक नियमों से मिलता है और यह ईश्वरीय तर्क और विवेक का रूप है। :(8) विधि सर्वसत्तासंपन्न सत्ता का आदेश है। रोम, आंग्ल, फ्रांसीसी नरेशों और अमरीकी क्रांति के बाद संसदीय सत्ता के रूप में भी इस सिद्धांत को लागू किया गया। :(9) विधि वे नियम हैं जिन्हें मानव जाति अपने विकस में सीखती है और जिनके पालन से वह पहले से अधिक स्वतंत्रता पाने का प्रयास करती है। :(10) विधि प्राकृतिक दार्शनिक सिद्धांतों और तर्कप्रणाली के आधार पर विकसित ऐसे नियम हैं जिनमें व्यक्ति और समष्टि के हितों में संतुलन लाने का प्रयास किया जाता है। :(11) विधि ऐसे नियम हैं जिनको समाज का शक्तिशाली वर्ग अन्य लोगों को अपने अधीन बनाए रखने के लिए लागू करता है। इस प्रकार विधि वर्गहितों की रक्षा और स्थापना के लिए ही लागू की जाती है; :(12) विधि समाज के आर्थिक और सामाजिक नियमों की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले नियमों के रूप में विकसित होती है जिसमें समाज को स्थिर रखने के लिए सभी लोगों को सामान्य अधिकार देकर उनके हितों में एकरूपता और समरसता लाने का प्रयास किया जाता है और प्रत्येक व्यक्ति के हितों की रक्षा की जाती है। विधिकार के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि वह दैवी रूप से अनुप्राणित हो। हम्मूराबी (Hammurabi) की संहिता के आरंभ में यह घोषणा की गई है कि देव मरदुक (God Marduk) ने उसे न्याय के सिद्धांतों को जनता को देने का आदेश दिया। सुमेरिया के उरुकगीना (Urukagina) ने निनगिरूस (Ningirusu) से विधि ज्ञान पाया था। हजरत मूसा ने ईश्वर की प्रेरणा से न्याय के दस निदेशों (Ten commandments) की रचना की। एथेना नामक [[यूनान|यूनानी]] देवता ने जैल्युकस (Zaleucus) को स्वप्न में विधि का ज्ञान दिया। कुछ स्थानों में विधिकार स्वयं कोई देवता अथवा देवतुल्य ऋषि माना जाता है। [[अंग्रेजी भाषा]] में ईश्वर को ही विधिकार कहा गया है। ईसाई मत के अतिरिक्त अन्य मतों और धर्मों में ईश्वर अथवा सर्वोच्च सत्ता को विधि का मूल स्रोत माना गया है। मिस्र में मैनेस (Manes), रामुस द्वितीय (Ramus II), बोकोरिस (Bocchoris) फराऔह को जिन्हें पितृदेव माना गया है, उन्हें ही विधिकार भी माना गया है।
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