सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
शारीरिकी
" (अनुभाग) सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
== परिचय == [[Image:Govard Bidloo t87.jpg|right|thumb|200px|[[मानव कंकाल]] का निरूपण (१६८५) ; इसके साथ कुछ अन्य वस्तुओं का चित्रण किया गया है ताकि आकार की तुलना हो सके।]] व्यावहारिक या लौकिक दृष्टि से मानव शरीररचना का अध्ययन अत्यन्त ही महत्वपूर्ण है। एक चिकित्सक को शरीररचना का अध्ययन कई दृष्टि से करना होता है, जैसे रूप, स्थिति, आकार एवं अन्य रचनाओं से संबंध। [[आकारिकीय शरीररचना विज्ञान]] (Morphological Anatomy) की दृष्टि से मानवशरीर के भीतर अंगों की उत्पत्ति के कारणों का ज्ञान, अन्वेषण का विषय बन गया है। इस ज्ञान की वृद्धि के लिए [[भ्रूणविज्ञान]] (Embryology), जीवविकास विज्ञान, जातिविकास विज्ञान एवं [[ऊतक विज्ञान]] (Histo-anatomy) का अध्ययन आवश्यक है। स्वस्थ मानव शरीर की रचना का अध्ययन निम्न भागों में किया जाता है: 1. चिकित्साशास्त्रीय शरीररचना विज्ञान, 2. शल्यचिकित्सा शरीररचना विज्ञान (Surgical Anatomy), 3. स्त्री शरीर विशेष रचना विज्ञान, 4. धरातलीय शरीररचना विज्ञान (surface Anatomy), 5. सूक्ष्मदर्शीय शरीररचना विज्ञान (Microscopic Anatomy) तथा 6. भ्रूण शरीररचना विज्ञान (Embryology)। विकृत अंगों की रचना के ज्ञान को '''विकृत शरीररचनाविज्ञान''' (Pathological Anatomy) कहते हैं। मानव की विभिन्न प्रजातियों की शरीररचना का जब तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है, तब [[मानवशास्त्र|मानवविज्ञान]] (Anthropology) का सहारा लिया जाता है। आजकल शरीररचना का अध्ययन सर्वांगी (systemic) विधि से किया जाता है। ईसा से 1,000 वर्ष पूर्व महर्षि [[सुश्रुत]] ने शवच्छेद कर शरीररचना का पर्याप्त वर्णन किया था। धीरे-धीरे यह ज्ञान अरब और यूनान होता हुआ यूरोप में पहुँचा और वहाँ पर इसका बहुत विस्तार एवं उन्नति हुई। शव की संरक्षा के साधन, सूक्ष्मदर्शी, ऐक्सरे आदि के उपलब्ध होने पर शरीररचना विज्ञान का अध्ययन अधिक सूक्ष्म एवं विस्तृत हो गया है। शरीर रचना की सबसे छोटी इकाई [[कोशिका]] है। बहुत सी कोशिकाएँ मिलकर [[ऊतक]] बनते हैं; एक या अनेक प्रकार के ऊतकों से [[अंग]] बनते हैं; कई अंग मिलकर एक [[तन्त्र|तंत्र]] बनाते हैं। शरीर कई तन्त्रों का समूह है।
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)