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==कृतियाँ== उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं: उलझन (१९३४), क्षमा (१९२५), एकाकिनी या अकेली स्त्री (१९३७), प्रेम परीक्षा (१९२७), जागरण (१९३७), प्रजामण्डल (१९४१), एक और अनेक (१९५१), अपहृता (१९५२) आदि आपकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। इनकी कहानियों में ,जो कि पड़ोसी तथा अन्य कहानियाँ , पाथेयिका एवं नयनतारा आदि संग्रहों में संग्रहित हैं , तत्कालीन ग्रामीण जनजीवन की झलक देखी जा सकती है| इन्होने शिशु, बालसखा, बालबोध एवं दीदी<ref>{{पुस्तक सन्दर्भ|last1=शुक्ला|first1=सुधाड|title=महिला पत्रकारिता|date=2012|publisher=प्रतिभा प्रकाशन|page=160|url=https://books.google.co.in/books?id=0FSDBQAAQBAJ&lpg=PT160&ots=k2YQ993sEm&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%|A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%20%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PT160#v=onepage&q=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%20%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%20%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80&f=false|accessdate=20 जुलाई 2015}}</ref>, हल, आदि मासिक पत्रिकाओं का अनेक वर्षों तक संपादन किया। श्रीनाथ सिंह ने दैनिक देशबंधु<ref>{{cite web|title=Dainik Deshbandhu|url=https://archive.org/details/DainikDeshbandhu|accessdate=13 मार्च 2017}}</ref> (१९२६ )तथा देशदूत साप्ताहिक समाचारपत्रों का भी सम्पादन किया | बच्चों के लिये श्रीनाथ सिंह ने अनेक लोकप्रिय एवं सरल, सुबोध कविताओं की रचना की जो कि इनके द्वारा रचित पुस्तकों और उपरोक्त पत्रों में मौजूद हैं।<ref>{{वेब सन्दर्भ|last1=वर्मा|first1=सुरेन्द्र|title=हिंदी के श्रेष्ठ शिशु-बाल गीत|url=http://www.deshbandhu.co.in/newsdetail/3909/3/0|website=http://www.deshbandhu.co.in/|accessdate=20 जुलाई 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150923215609/http://www.deshbandhu.co.in/newsdetail/3909/3/0|archive-date=23 सितंबर 2015|url-status=live}}</ref> अपने समय में ठाकुर श्रीनाथ सिंह के नाम से भी जाने जाते थे। हिंदी के उस समय के कई साहित्यकारों द्वारा समय समय पर उन्हें लिखे गये अनेक पत्र नेहरु म्यूजियम नई दिल्ली में संरक्षित हैं<ref>{{cite web|title=Srinath Singh's Docs Nehru Memorial Museum|url=https://archive.org/details/SrinathSinghsDocsNehruMemorialMuseum|website=Internet Archive|accessdate=7 मई 2017}}</ref>।इनकी बाल उपयोगी रचनाएँ हैं - बाल कवितावली, खेलघर, बालभारती, पिपेहरी, गुब्बारा, मीठीतानें, (सभी कविताएँ)| गरुणकन्या, सुनेहरी नदी का देवता, परिदेश की सैर (कथायें), अविष्कारों की कथायें, इनके उपन्यास कवि और क्रन्तिकारी व सोमनाथ तथा बच्चों के लिये लिखित अविष्कारों की कथायें जो कि श्रीनाथ सिंह के नाम से लिखी गई है , डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ़ इण्डिया में हैं। उनकी कई रचनाओं को ''internet archive'' में देखा जा सकता है ||
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