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== इतिहास == {{rquote|right|''यह पथ सनातन है। समस्त देवता और मनुष्य इसी मार्ग से पैदा हुए हैं तथा प्रगति की है। हे मनुष्यों आप अपने उत्पन्न होने की आधाररूपा अपनी माता को विनष्ट न करें।''|ऋग्वेद-3-18-1}} सनातन धर्म जिसे [[हिन्दू धर्म]] अथवा वैदिक धर्म भी कहा जाता है और यह १९६०८५३११० साल का इतिहास हैं। [[भारत]] (और आधुनिक पाकिस्तानी क्षेत्र) की [[सिन्धु घाटी सभ्यता]] में [[हिन्दू धर्म]] के कई चिह्न मिलते हैं। इनमें एक अज्ञात मातृदेवी की मूर्तियाँ, शिव पशुपति जैसे देवता की मुद्राएँ, लिंग, पीपल की पूजा, इत्यादि प्रमुख हैं। इतिहासकारों के एक दृष्टिकोण के अनुसार इस सभ्यता के अन्त के दौरान मध्य [[एशिया]] से एक अन्य जाति का आगमन हुआ, जो स्वयं को आर्य कहते थे और संस्कृत नाम की एक हिन्द यूरोपीय भाषा बोलते थे। एक अन्य दृष्टिकोण के अनुसार [[सिन्धु घाटी सभ्यता]] के लोग स्वयं ही आर्य थे और उनका मूलस्थान भारत ही था। प्राचीन काल में [[भारतीय]] सनातन धर्म में [[गाणपत्य]], [[शैव]]देव, कोटी [[वैष्णव]], [[शाक्त]] और [[सौर]] नाम के पाँच [[सम्प्रदाय]] होते थे। [[गाणपत्य]] [[गणेश]]की, [[वैष्णव]] [[विष्णु]] की, [[शैव]]देव, कोटी [[शिव]] की, [[शाक्त]] [[शक्ति]] की और [[सौर]] [[सूर्य]] की पूजा आराधना किया करते थे। पर यह मान्यता थी कि सब एक ही सत्य की व्याख्या हैं। यह न केवल [[ऋग्वेद]] परन्तु [[रामायण]] और [[महाभारत]] जैसे लोकप्रिय ग्रन्थों में भी स्पष्ट रूप से कहा गया है। प्रत्येक [[सम्प्रदाय]] के समर्थक अपने देवता को दूसरे सम्प्रदायों के देवता से बड़ा समझते थे और इस कारण से उनमें वैमनस्य बना रहता था। एकता बनाए रखने के उद्देश्य से धर्मगुरुओं ने लोगों को यह शिक्षा देना आरम्भ किया कि सभी देवता समान हैं, [[विष्णु]], [[शिव]] और [[शक्ति]] आदि देवी-देवता परस्पर एक दूसरे के भी भक्त हैं। उनकी इन शिक्षाओं से तीनों सम्प्रदायों में मेल हुआ और सनातन धर्म की उत्पत्ति हुई। सनातन धर्म में [[विष्णु]], [[शिव]] और [[शक्ति]] को समान माना गया और तीनों ही [[सम्प्रदाय]] के समर्थक इस [[धर्म]] को मानने लगे। सनातन धर्म का सारा [[साहित्य]] [[वेद]], [[पुराण]], [[श्रुति]], [[स्मृति|स्मृतियाँ]], [[उपनिषद्]], [[रामायण]], [[महाभारत]], [[गीता]] आदि [[संस्कृत]] भाषा में रचा गया है। कालान्तर में [[भारतवर्ष]] में मुसलमान शासन हो जाने के कारण देवभाषा [[संस्कृत]] का ह्रास हो गया तथा सनातन धर्म की अवनति होने लगी। इस स्थिति को सुधारने के लिये विद्वान संत [[तुलसीदास]] ने प्रचलित भाषा में धार्मिक साहित्य की रचना करके सनातन धर्म की रक्षा की। जब औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन को [[ईसाई]], [[इस्लाम|मुस्लिम]] आदि धर्मों के मानने वालों का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिये [[जनगणना]] करने की आवश्यकता पड़ी तो सनातन शब्द से अपरिचित होने के कारण उन्होंने यहाँ के धर्म का नाम सनातन धर्म के स्थान पर [[हिंदू धर्म]] रख दिया।
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