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==समग्र स्वास्थ्य की परिभाषा == विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्वास्थ्य सिर्फ रोग या दुर्बलता की अनुपस्थिति ही नहीं बल्कि एक पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक खुशहाली की स्थिति है। स्वस्थ लोग रोजमर्रा की गतिविधियों से निपटने के लिए और किसी भी परिवेश के मुताबिक अपना अनुकूलन करने में सक्षम होते हैं। रोग की अनुपस्थिति एक वांछनीय स्थिति है लेकिन यह स्वास्थ्य को पूर्णतया परिभाषित नहीं करता है। यह स्वास्थ्य के लिए एक कसौटी नहीं है और इसे अकेले स्वास्थ्य निर्माण के लिए पर्याप्त भी नहीं माना जा सकता है। लेकिन स्वस्थ होने nका वास्तविक अर्थ अपने आप पर ध्यान केंद्रित करते हुए जीवन जीने के स्वस्थ तरीकों को अपनाया जाना है। Nयदि हम एक अभिन्न व्यक्तित्व की इच्छा रखते हैं तो हमें हर हमेशा खुश रहना चाहिए और मन में इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि स्वास्थ्य के आयाम अलग अलग टुकड़ों की तरह है। अतः अगर हम अपने जीवन को कोई अर्थ प्रदान करना चाहते है तो हमें स्वास्थ्य के इन विभिन्न आयामों को एक साथ फिट करना पड़ेगा। वास्तव में, अच्छे स्वास्थ्य की कल्पना समग्र स्वास्थ्य का नाम है जिसमें शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य , बौद्धिक स्वास्थ्य, आध्यात्मिक स्वास्थ्य और सामाजिक स्वास्थ्य भी शामिल है। हास्य की एक अच्छी भावना के बारे में सबसे अच्छी बात, निश्चित रूप से, यह एक निश्चित संकेत है कि आपके पास एक स्वस्थ दृष्टिकोण है शारीरिक फिटनेस स्वस्थ होने का एकमात्र आधार नहीं है; स्वस्थ होने का मतलब मानसिक और भावनात्मक रूप से फिट होना है। स्वस्थ रहना आपकी समग्र जीवन शैली का हिस्सा होना चाहिए। एक स्वस्थ जीवन शैली जीने से पुरानी बीमारियों और दीर्घकालिक बीमारियों को रोकने में मदद मिल सकती है। अपने बारे में अच्छा महसूस करना और अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना आपके आत्म-सम्मान और आत्म-छवि के लिए महत्वपूर्ण है। अपने शरीर के लिए जो सही है उसे करके स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखें। आप बहुत सारे व्यायाम कर सकते हैं, लेकिन उचित पोषण के बिना यह सब अप्रभावी हो जाएगा। फिटनेस में 70% आहार शामिल है, बाकी 30% व्यायाम है जो आप करते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.workoutaesthetics.com/2020/05/how-to-get-fit.html|title=How to get Fit?|last=|first=|date=6 जून 2020|website=|archive-url=https://web.archive.org/web/20200610044541/https://www.workoutaesthetics.com/2020/05/how-to-get-fit.html|archive-date=10 जून 2020|dead-url=|access-date=20 जून 2020|url-status=dead}}</ref> ===शारीरिक स्वास्थ्य === शारीरिक स्वास्थ्य शरीर की स्थिति को दर्शाता है जिसमें इसकी संरचना, विकास, कार्यप्रणाली और रखरखाव शामिल होता है। यह एक व्यक्ति का सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एक सामान्य स्थिति है। यह एक जीव के कार्यात्मक और/या चयापचय क्षमता का एक स्तर भी है। अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के निम्नलिखित कुछ तरीके हैं- * संतुलित आहार की आदतें, मीठी श्वास व गहरी नींद * बड़ी आंत की नियमित गतिविधि व संतुलित शारीरिक गतिविधियां * नाड़ी स्पंदन, [[रक्तचाप|रक्तदाब]], शरीर का भार व व्यायाम सहनशीलता आदि सब कुछ व्यक्ति के आकार, आयु व लिंग के लिए सामान्य मानकों के अनुसार होना चाहिए। * शरीर के सभी अंग सामान्य आकार के हों तथा उचित रूप से कार्य कर रहे हों। * पाचन शक्ति सामान्य एवं सक्षम हो। * साफ एवं कोमल स्वच्छ त्वचा हो। * आंख नाक, कान, जिव्हा, आदि ज्ञानेन्द्रियाँ स्वस्थ हो। * जिह्वा स्वस्थ एवं निर्मल हो * दांत साफ सुथरें हो। * मुंह से दुर्गंध न आती हो। * समय पर भूख लगती हो। * शारीरिक चेष्टा सम प्रमाण में हो। * जिसका [[मेरुदण्ड]] सीधा हो। * चेहर पर कांति ओज तेज हो। * कर्मेन्द्रिय (हाथ पांव आदि) स्वस्थ हों। * मल विसर्जन सम्यक् मात्रा में समय पर होता हो। * शरीर की उंचाई के हिसाब से वजन हो। * शारीरिक संगठन सुदृढ़ एवं लचीला हो। ===मानसिक स्वास्थ्य === मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ हमारे भावनात्मक और आध्यात्मिक लचीलेपन से है जो हमें अपने जीवन में दर्द, निराशा और उदासी की स्थितियों में जीवित रहने के लिए सक्षम बनाती है। मानसिक स्वास्थ्य हमारी भावनाओं को व्यक्त करने और जीवन की ढ़ेर सारी माँगों के प्रति अनुकूलन की क्षमता है। इसे अच्छा बनाए रखने के निम्नलिखित कुछ तरीके हैं- * प्रसन्नता, शांति व व्यवहार में प्रफुल्लता * आत्म-संतुष्टि (आत्म-भर्त्सना या आत्म-दया की स्थिति न हो।) * भीतर ही भीतर कोई भावात्मक संघर्ष न हो (सदैव स्वयं से युद्धरत होने का भाव न हो।) * मन की संतुलित अवस्था। * डर, क्रोध, इर्ष्या, का अभाव हो। * मनसिक तनाव एवं अवसाद ना हो। * वाणी में संयम और मधुरता हो। * कुशल व्यवहारी हो। * स्वार्थी ना हों * संतोषी जीवन की प्रवृति का वाला हो। * परोपकार एवं समाज सेवी की भावना वाला हो। * जीव मात्र के प्रति दया की भावना वाला हो। * परिस्थितियों के साथ संघर्ष करने की सहनशक्ति वाला हो। * विकट परिस्थितियों में सांमजस्य बढाने वाला हो। *सकारात्मक सोच हो। ===बौद्धिक स्वास्थ्य=== यह किसी के भी जीवन को बढ़ाने के लिए कौशल और ज्ञान को विकसित करने के लिए संज्ञानात्मक क्षमता है। हमारी बौद्धिक क्षमता हमारी रचनात्मकता को प्रोत्साहित और हमारे निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करने में मदद करता है। *(1) समायोजन करने वाली बुद्धि, आलोचना को स्वीकार कर सके व आसानी से व्यथित न हो। *(2) दूसरों की भावात्मक आवश्यकताओं की समझ, सभी प्रकार के व्यवहारों में शिष्ट रहना व दूसरों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना, नए विचारों के लिए खुलापन, उच्च भावात्मक बुद्धि। *(3) आत्म-संयम, भय, क्रोध, मोह, जलन, अपराधबोध या चिंता के वश में न हो। लोभ के वश में न हो तथा समस्याओं का सामना करने व उनका बौद्धिक समाधान तलाशने में निपुण हो। ===आध्यात्मिक स्वास्थ्य === हमारा अच्छा स्वास्थ्य आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ हुए बिना अधूरा है। जीवन के अर्थ और उद्देश्य की तलाश करना हमें आध्यात्मिक बनाता है। आध्यात्मिक स्वास्थ्य हमारे निजी मान्यताओं और मूल्यों को दर्शाता है। अच्छे आध्यात्मिक स्वास्थ्य को प्राप्त करने का कोई निर्धारित तरीका नहीं है। यह हमारे अस्तित्व की समझ के बारे में अपने अंदर गहराई से देखने का एक तरीका है। : '' अष्टादशेषु पुराणेषु व्यासस्य वचन द्वयं । : ''परोपकारः पुण्याय, पापाय परपीडनम्॥ अर्थात [[पुराण|अट्ठारह पुराणों]] में [[वेदव्यास|महर्षि व्यास]] ने दो बातें कहीं हैं - [[परहितवाद|परोपकार]] से पुण्य मिलता है और दूसरों को पीड़ा देने से [[पाप]]। * प्राणी मात्र के कल्याण की भावना हो। * 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' (सभी सुखी हों) का आचरण हो। * तन, मन, एवं धन की शुद्वता वाला हो। * परस्पर सहानुभूति वाला हो। * परेपकार एवं लोकल्याण की भावना वाला हो। * कथनी एवं करनी में अन्तर न हो। * प्रतिबद्वता, कर्त्तव्यपालन वाला हो। * [[योग]] एवं [[प्राणायाम]] का अम्यासी हो। * श्रेष्ठ चरित्रवान व्यक्तित्त्व हो। * इन्द्रियों को संयम में रखने वाला हो। * सकारात्मक जीवन शैली जीने वाला हो। * पुण्य कार्यो के द्वारा आत्मिक उत्थान वाला हो। * अपने शरीर सहित इस भौतिक जगत की किसी भी वस्तु से मोह न रखना। * दूसरी आत्माओं के प्रभाव में आए बिना उनसे भाईचारे का नाता रखना। * समुचित ज्ञान की प्राप्ति की सतत इच्छा ===सामाजिक स्वास्थ्य=== चूँकि हम सामाजिक जीव हैं अतः संतोषजनक रिश्ते का निर्माण करना और उसे बनाए रखना हमें स्वाभाविक रूप से आता है। सामाजिक रूप से सबके द्वारा स्वीकार किया जाना हमारे भावनात्मक खुशहाली के लिए अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। * प्रदूषणमुक्त वातावरण हो। * शुद्व पेयजल एवं पानी की टंकियों का प्रबंध हो। * मल-मूत्र एवं अपशिष्ट पदार्थों के निकासी की योजना हो। * सुलभ शैचालय हो। * समाज अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रहमचर्य एवं अपरिग्रही स्वभाव वाला हो। * वृक्षारोपण का अधिकाधिक कार्य हो। * सार्वजनिक स्थलों पर पूर्ण स्वच्छता हो। * जंनसंख्यानुसार पर्याप्त चिकित्सालय हों। * संक्रमण-रोधी व्यवस्था हो। * उचित शिक्षा की व्यवस्था हो। * भय एवं भ्रममुक्त समाज हो। * मानव कल्याण के हितों का समाज वाला हो। * अपनी व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार समाज के कल्याण के लिए कार्य करना। ; पोषण एवं स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले अन्य सामाजिक तत्त्व * खाद्य सामग्री की जनसंख्या के अनुपात में उपलब्धता * मौसमी फल एवं सब्जियों की उपलब्धता * खान-पान की सामाजिक पद्वतियाँ * बच्चों के आहार से संबधी नीतियाँ * स्थानीय दुकान एवं बाजार सम्बन्धी नीतियाँ * समाजिक एवं व्यक्तिगत जीवन में स्वास्थ्य सम्बन्धी जागरण की स्थिति * पेषण संबधी स्वास्थ्य-शिक्षा का प्रचार प्रसार * समुदाय का आर्थिक स्तर * समुदाय का शैक्षिणिक स्तर * समुदाय की चिकित्सकीय व्यवस्था * समुदाय हेतु परिवहन व्यवस्था * बच्चों एवं महिलाओं से संबधित विशेष स्वास्थ्य की नीतियाँ * पोषण व्यवस्था एवं आहार के समुचित भंडारण की व्यवस्था * अंधविश्वास एवं गलत धारणाओं से मुक्त समाज * सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं मनौवैज्ञानिक स्तर * निम्न मृत्युदर एवं न्यून बीमारियाँ * जनंसख्या वृद्वि का समुचित नियंत्रण * सामाजिक रीति रिवाज एवं परम्परागत मान्यताएँ। अधिकांश लोग अच्छे स्वास्थ्य के महत्त्व को नहीं समझते हैं और अगर समझते भी हैं तो वे अभी तक इसकी उपेक्षा कर रहे हैं। हम जब भी स्वास्थ्य की बात करते हैं तो हमारा ध्यान शारीरिक स्वास्थ्य तक ही सीमित रहता है। हम बाकी आयामों के बारे में नहीं सोचते हैं। अच्छे स्वास्थ्य की आवश्यकता हम सबको है। यह किसी एक विशेष धर्म, जाति, संप्रदाय या लिंग तक सीमित नहीं है। अतः हमें इस आवश्यक वस्तु के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। अधिकांश रोगों का मूल हमारे मन में होता है। एक व्यक्ति को स्वस्थ तब कहा जाता है जब उसका शरीर स्वस्थ और मन साफ और शांत हो। कुछ लोगों के पास भौतिक साधनों की कमी नहीं होती है फिर भी वे दुःखी या मनोवैज्ञानिक स्तर पर उत्तेजित हो सकते।
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