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=== प्रसंवादी विश्लेषक === प्राय: किसी जटिल फलन अथवा वक्र को कई एक सरल प्रसंवादी अथवा ज्यावक्रीय संघटकों के योगफल द्वारा निरूपित करने में सुविधा रहती है। ऐसे निरूपण का आरंभ उष्मा के संवरण और विसरण के अध्ययन में फूरिये ने किया और तबसे इसका महत्व बढ़ता जा रहा है। आनुभविक न्यास के प्रसंवादी संघटकों का निर्धारण संवादन सरणियों (Communication lines), विद्युद्यंत्रों, यांत्रिकीय कंपनों और शोर, गानयंत्रों और सांख्यिकीय न्यास के पूर्वानुमान (prediction) सिद्धांत आदि के अध्ययन में महत्वपूर्ण है। यद्यपि इन क्षेत्रों में अधिकांश विश्लेषण संख्यात्मक प्रक्रियाओं द्वारा किया जाता है, तथापि कुछ अंश तक प्रसंवादी विश्लेषकों का भी उपयोग किया जाता है। प्रसंवादी विश्लेषण सिद्धांत में यह सिद्ध किया गया है कि समुचित प्रतिबंधों सहित आवर्त फलन फ (य) का निरूपण निम्नांकित श्रेणी द्वारा किया जा सकता है। प्रसंवादी विश्लेषक का उद्देश्य इन गुणांकों क और ख का सरल और त्वरित विधि से निर्धारण करना होता है। ये विश्लेषक कम से कम तीन मूलत: भिन्न प्रकार के हैं। इनमें सबसे प्राचीन क्षेत्रमापी और समाकलक का विस्तरण मात्र है। बाद के विश्लेषक ऐसे बने हैं जिनमें फलन को फोटो पटल पर निरूपित कर उसका विश्लेषण प्रकाशविद्युत विधि से किया जाता है। एक अन्य प्रकार के विश्लेषकों में न्यास को विद्युद्धाराओं में परिवर्तित कर इन धाराओं के विश्लेषण हेतु उपलब्ध विस्तृत साधनों का उपयोग किया जाता है।
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