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== उद्योग में सफल नेता के गुण == क्रेग एवं चार्ट्स ने एक सफल नेता ने निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक माना है- :1. समर्थता (Forcefulness) अर्थात् नेता में यह कौशल हो कि वह कर्मचारी से काम ले सके। :2. नेता में ऐसे गुण होने चाहिए जिससे कर्मचारी उसको सम्मान दे सके। :3. नेता का कर्मचारियों से पक्षपात रहित व्यवहार होना चाहिए। :4. नेता को प्रशिक्षित होना चाहिए, अनुभवी होना चाहिए जिससे वह कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित कर सके। :5. कर्मचारियों के साथ वादिता रखने वाला हो तथा किसी भी कर्मचारी से दूसरे कर्मचारी की बुराई न करें। :6. उसमें सरल आत्मविश्वास होना चाहिए, ताकि विषय प्रतिस्थितियों में भी वह अपने को कमजोर न समझे। :7. नेता में अपने क्र्रोध को नियंत्रित करने की क्षमता होनी चाहिए। :8. उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कर्मचारी उसके आदेशों का पालन कर रहे है या नहीं। :9. अथीनस्थ कर्मचारियों के उचित को भी मानने वाला तथा अपनी योग्यता और सुझावों द्वारा कर्मचारियों से कार्य लेने की क्षमता हो। :10. बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से कर्मचारियों को डांटने की क्षमता तथा समय आने पर उनकी प्रशंसा करने की योग्यता हो। :11. परिस्थितियों का सामना करने की योग्यता हो। '''[[ब्लम]]''' (Blum) ने पांच सिद्धातों का वर्णन किया है। उनके अनुसार सफल नेता को निम्न पाँच सिद्धातों अन्तर्गत कार्य करना चाहिए- :1. कार्य का उचित मूल्याकंन :2. अधिकारियों का पर्याप्त मात्रा में प्रतिनिधित्व। :3. समस्त कर्मचारियों के साथ समान व उचित व्यवहार। :4. जब कभी कर्मचारी मिलना चाहे तो उसे अपना समय देना। :5. कर्मचारियों की समस्याओं का प्रबंधकों और मालिकों से विस्तार में विचार-विमर्श करना। इस संदर्भ में ब्लम एक सफल नेता के लिए ऐसे कार्य न करने के लिए निर्देश देते हैं जिससे कर्मचारी और नेता के बीच दूरी बनी रहे। वे कार्य है- *1. कर्मचारियों की इज्जत करना- नेता को चाहिए कि वह कर्मचारियों पर अपनी श्रेष्ठता का प्रभाव न डाले। उनके सामने ऐसा प्रदर्शन न करे कि वह सबसे योग्य, अधिक वेतन भोगी और अनुभवी है। नेता को चाहिए कि वह अपनी तकनीकी योग्यता द्वारा कर्मचारियों की जटिलताओं का निवारण करे। जिससे कर्मचारी स्वयं यह अनुभव करे कि उनका नेता वास्तव में एक योग्य तकनीकी व्यक्ति है। *2. नेता को चाहिए कि वह कर्मचारी के किसी भी कार्य मे बाधा न डाले। अकारण बाधा से वह हतोत्साहित हो जाता है और कार्य में रूचि नहीं ले पाता है। इससे मशीन को नुकसान हो सकता है या किसी दुर्घटना की संभावना बढ़ सकती है। कर्मचारियों को उचित तरीके से समझाना चाहिए ताकि कर्मचारी को यह विश्वास न हो कि नेता उनके कार्य में कमी निकाल रहा है। *3. कर्मचरियों में अनुशासन को बनाए रखने के लिए पक्षपात रहित व्यवहार करना चाहिए। जो नेता कुछ कर्मचारियों को अपना कृपापात्र बना लेते हैं, उससे न तो उद्योग में सफल होते हो न ही संतुलन व अनुशासन बन पाता है। *4. कर्मचारियों को ऐसे आदेश न दें जो अस्पष्ट हों या जो मानसिक तनाव पैदा करने वाले हों। यदि नेता ऐसा करता है तो उसके तथा कर्मचारियों के बीच द्वन्द्वात्मक स्थिति पैदा हो जाती है और संघर्ष की स्थिति चालू हो जाती है। गलती से कभी कोई त्रुटिपूर्ण सुझाव या आदेश दिए जाने पर उसे स्वीकार करना अधिक लाभदायक रहता है। उसे मुद्दे पर बहस नहीं करनी चाहिए तथा न ही कर्मचारियों पर दोष लगाना चाहिए। एक सफल नेता के लिए आवश्यक है कि वह न ही जल्दी में आदेश दे और न ही जल्दी में अकारण अपने सुझावों को ध्यान करे। *5. नेता को चाहिए कि वह कर्मचारियों की आलोचना न करे, उसे एकान्त में समझाए। किसी के सामने डांट फटकार न करे। इससे कर्मचारी का अहं सुरक्षित रहता है तथा वह अपमान महसूस नहीं करता है।
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