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=== [[भूगणित]] === यह पृथ्वी के आकार, विस्तार और गुरुत्वीय क्षेत्र का विज्ञान है। इसके अंतर्गत गुरुत्वीय अपकेंद्री क्षेत्रों के मापनों से निर्धारित पृथ्वी के पृष्ठ के ऊपर जहाँ तक गुरुत्वीय क्षेत्र के प्रभाव की पहचान संभव है वहाँ तक उसके वितरण का अध्ययन भी इसके अंतर्गत होता है। भूभौतिकी की अन्य शाखाओं की सहायता से भूगणित द्वारा भूपटल की बनावट और संलग्न अध:स्तर (substrata) की बनावट का अध्ययन किया जाता है सम्यक् भूमापन (mapping) और चार्ट निर्माण के लिये आवश्यक मापन और परिकलन करना भूगणित का व्यावहारिक उद्देश्य है। पृथ्वी के बड़े वृत्त के एक चाप '''a''' को भूगणितीय विधि से मापकर और वक्रताकेंद्र पर इस चाप द्वारा बनाए कोण '''X''' को खगोलिय विधि से मापकर पृथ्वी का आकार और विस्तार निर्धारित किया जाता है। '''a''' और '''X''' के अत्यंत यथार्थ मान प्राप्त करने की आधुनिक तकनीकियों में त्रिभुजन (triangulation), शोरन (Shoran), हिरन (Hiran) और अन्य वैद्युत एवं अन्य खगोलिय विधियाँ सम्मिलित हैं, जिनमें कृत्रिम उपग्रह और अत्यंत परिष्कृत खगोलीय दूरबीनों और संक्रमणों का उपयोग होता है। [[त्रिभुजन विधि]] का आधार यह है कि किसी भी त्रिभुज का आधार और दो कोण ज्ञात हों, तो त्रिभुज पूर्णत: निश्चित हो जाता है। इस त्रिभुज की एक भुजा को आधार बनाकर उत्तरोत्तर त्रिभुजों से सारे क्षेत्र को पाट देते हैं। पृथ्वी का अंतरांश दृढ नहीं है, अत: सूर्य और चंद्र के आवर्ती ज्वारीय बल से भूपटल निरस्त हो जाता है इस ज्वारीय प्रभाव को गुरुत्वमापी से मापा जाता है।
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